कलाई की खनक
“अरे… सुनते हो!” “हाँ-हाँ, क्यों नहीं सुनूँगा? कोई इतना भी बूढ़ा नहीं हुआ हूँ। माना कि घुटनों में थोड़ा दर्द रहता है और अखबार पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत पड़ती है, पर मेरी जान… कान मेरे अभी भी सोलह साल वाले लड़के जैसे तेज हैं। बोलो, क्या हुक्म है सरकार का?” रमा देवी अपनी … Read more