ज़िम्मेदारी का बोझ – आरती झा
“ये आंखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं… ओह सिया, कितनी खूबसूरत हैं तुम्हारी आंखें।” राघव सिया की आंखों की गहराइयों में उतर जाना चाहता था। और सचमुच, सिया की आंखें थीं भी किसी जादुई झील जैसी—गहरी, काली और भावनाओं के समंदर को अपने भीतर समेटे हुए। जैसे भगवान ने बड़ी फुर्सत में, … Read more