ज़िम्मेदारी का बोझ – आरती झा 

“ये आंखें देख कर हम सारी दुनिया भूल जाते हैं… ओह सिया, कितनी खूबसूरत हैं तुम्हारी आंखें।” राघव सिया की आंखों की गहराइयों में उतर जाना चाहता था। और सचमुच, सिया की आंखें थीं भी किसी जादुई झील जैसी—गहरी, काली और भावनाओं के समंदर को अपने भीतर समेटे हुए। जैसे भगवान ने बड़ी फुर्सत में, … Read more

रिश्ते प्रेम से निभाए जाते हैं -स्वाति जैन 

मीरा ने सूटकेस की चेन बंद की ही थी कि कमरे के दरवाजे पर खड़े प्रतीक की परछाई फ़र्श पर लंबी होती दिखाई दी। उसने सिर उठाकर देखा। प्रतीक के चेहरे पर वही चिरपरिचित शिकन थी, जो हर उस वक़्त उभर आती थी जब मीरा अपने मायके जाने की बात करती थी। “तुम सच में … Read more

उपहार की कीमत नहीं नियत देखी जाती है – तोषिका

सलोनी अगली बार से ऐसा मत बोलना। तुम मेरी दोस्त हो, तुमने ऐसा कैसे सोच लिया कि मैं यह देखूंगी तो हमारी दोस्ती में फरक आ जाएगा। उदास प्राची ने बोला। सलोनी बोली पर…पर… प्राची उसकी बात को काट कर बोली पर वर कुछ नहीं, इतना मत सोचा कर। *एक हफ्ते पहले* प्राची बहुत खुश … Read more

बहू मैं अपने पति का पैसा खर्च कर रही हू – अर्चना खण्डेलवाल 

अरे!! जीजी अब ये साड़ी पसंद आ रही है तो ले ही लो, आप पर वैसे भी ये गुलाबी रंग बहुत खिलता है, जीजाजी देखकर प्रसन्न हो जायेंगे, रीता ने अपनी बड़ी जीजी सविता से कहा। रीता की बात सुनकर सविता जी सोच में पड़ गई, आखिर इतनी महंगी साड़ी वो कैसे ले सकती है … Read more

सीमा – खुशी

पलक एक खुशनुमा मिजाज की लड़की थी जिसके परिवार में मां मीना पिताजी राजेश दो भाई सुरेश और मगेश उनकी पत्नियां काव्या और सोनिया उनके दो दो  बच्चे ऐसा भरा पूरा परिवार था।पलक में सबकी जान बसती वो भी बड़बड़ करती रहती बच्चों पर जान छिड़कती एक प्यारा परिवार था। माता पिता चाहते थे कि … Read more

वजूद – गरिमा चौधरी 

सुधा अपनी छोटी सी बगिया में गुलाब की कलम लगा रही थी कि तभी फोन की घंटी बजी। स्क्रीन पर ‘आकृति’ का नाम देखकर उसके चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान तैर गई। आकृति, उसकी इकलौती बेटी, जो पुणे में ब्याही थी। “नमस्ते माँ!” आकृति की आवाज़ में एक अलग ही चहक थी। “खुश रहो … Read more

पश्चाताप के आंसु – करुणा मलिक

खिड़की के बाहर होती मूसलाधार बारिश ने ‘शांति निकेतन’ वृद्धाश्रम के उस छोटे से कमरे में सन्नाटे को और गहरा कर दिया था। 70 वर्षीय वंदना देवी अपनी व्हीलचेयर पर बैठी, कांच पर फिसलती पानी की बूंदों को एकटक निहार रही थीं। उनकी गोद में एक पुराना, मखमली फोटो एल्बम रखा था, जिसके पन्ने अब … Read more

पति-पत्नी या दोस्त – डॉ उर्मिला सिन्हा 

कमरे की हवा में मोगरे और रजनीगंधा के फूलों की महक थी, लेकिन उस महक में एक अजीब सा भारीपन घुला हुआ था। यह वो रात थी जिसे दुनिया ‘सुहागरात’ कहती है, लेकिन काव्या के लिए यह एक ‘समझौते की रात’ से ज्यादा कुछ नहीं थी। वह पलंग के एक किनारे पर बैठी थी। उसकी … Read more

बड़े भाई हो, बाप मत बनो – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव

“माँ! अब और नाटक नहीं होगा। कह दो भैया से कि आज ही हिसाब कर दें। मैं अब इनके टुकड़ों पर पलने वाला नहीं हूँ। मुझे मेरा हिस्सा चाहिए, अभी और इसी वक़्त!” सुमित की आवाज़ से ड्राइंग रूम की खिड़कियाँ थरथरा गईं। उसका चेहरा गुस्से से लाल था और उंगली सीधे अपने बड़े भाई, … Read more

सुमित्रा स्नेह छाया – रश्मि झा मिश्रा 

पीली मखमली गद्देदार कुर्सी पर सुमित्रा देवी को बड़े ही आदर के साथ बैठाया गया था। घर के सबसे बड़े हॉल के बीचों-बीच, जहाँ से वो पूरे घर पर नज़र रख सकती थीं। आज ‘रघुवंशी सदन’ में चहल-पहल कुछ ज़्यादा ही थी। घर की सबसे बुजुर्ग और मुखिया होने के नाते सुमित्रा देवी का सम्मान … Read more

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