कलाई की खनक

“अरे… सुनते हो!” “हाँ-हाँ, क्यों नहीं सुनूँगा? कोई इतना भी बूढ़ा नहीं हुआ हूँ। माना कि घुटनों में थोड़ा दर्द रहता है और अखबार पढ़ने के लिए चश्मे की जरूरत पड़ती है, पर मेरी जान… कान मेरे अभी भी सोलह साल वाले लड़के जैसे तेज हैं। बोलो, क्या हुक्म है सरकार का?” रमा देवी अपनी … Read more

अन्नपूर्णा का स्पर्श

“माँ…” साकेत का गला थोड़ा भर्राया हुआ था। “पिछले कुछ सालों में मैंने दुनिया भर के व्यंजन खाए। मुझे लगने लगा था कि मुझे अब हमारे घर का वो सादा खाना कभी पसंद नहीं आएगा। मुझे लगता था कि मैं आगे बढ़ गया हूँ। पर आज तुम्हारी बनाई इस दाल-रोटी ने मुझे एहसास दिलाया है … Read more

मृगतृष्णा

गुलमोहर अपार्टमेंट्स की ग्यारहवीं मंजिल पर रहने वाली सिम्मी , शहर की उन चुनिंदा महिलाओं में से एक थी जिन्हें देखकर किसी को भी ईर्ष्या हो जाए। वह और उसकी तीन अन्य सहेलियाँ—रोशनी, शिखा और तान्या—पूरी सोसाइटी में आकर्षण का केंद्र थीं। उनकी ज़िंदगी किसी हॉलीवुड फिल्म के सीन जैसी लगती थी। वे जब भी … Read more

इंतज़ार के रंग

 मीरा का गला भर आया। उसके पास इस मासूम सवाल का कोई तार्किक जवाब नहीं था। उसने बस आरव को अपने सीने से लगा लिया और उसके बालों को सहलाते हुए कहा, “पापा के समय को खरीदने की जरूरत नहीं है मेरे बच्चे। तुम उनकी जान हो। वो तुमसे बहुत प्यार करते हैं, बस अपनी … Read more

रिश्तों की बदलती छाँव

 एक दिन शाम को जब स्नेहा ऑफिस में एक जरूरी मीटिंग के कारण लेट हो गई, तो घर पहुँचते ही उसे सावित्री जी के तीखे व्यंग्य सुनने पड़े। “नौकरी करने का यह मतलब थोड़ी है कि घर-परिवार को भूल जाओ। हम भी तो अपने ज़माने में काम करते थे, लेकिन घर के चूल्हे-चौके से कभी … Read more

जिंदगी की लौ

 सुजाता की स्नेह भरी लेकिन सशक्त बातों ने सीमा  के अंदर सोई हुई उस चिंगारी को फिर से हवा दे दी, जो डर और शर्मिंदगी के कारण बुझ गई थी। उसे अपनी भूल का एहसास हो गया। उसे समझ आ गया कि भागना और हार मान लेना किसी समस्या का समाधान नहीं है। सीमा  ने … Read more

प्रायश्चित के आंसू

लेकिन यह रास्ता इतना आसान नहीं था। जब स्वाति के पति नरेश और उसके ससुराल वालों को इस बात का पता चला, तो घर में तूफान आ गया। नरेश ने साफ शब्दों में कह दिया, “तुम पागल हो गई हो स्वाति? यह कोई खून देने जैसी छोटी बात नहीं है, यह एक बहुत बड़ा ऑपरेशन … Read more

तकदीर का पन्ना

मीरा अपनी बेटी का दुख समझ रही थी, लेकिन वह बेबस थी। उसने अपने आंसुओं को छिपाते हुए मीना  को गले लगाया और कहा, “नहीं बेटा, ऐसा बिल्कुल नहीं है। दादी तुमसे भी बहुत प्यार करती हैं। लेकिन सार्थक अभी बहुत छोटा है ना, इसलिए उसका ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है। तुम तो मेरी समझदार … Read more

प्रतीक्षा के वो सात समंदर

 खैर, आज का दिन बहुत खास है। आज मेरी वही पोती, जो कल तक मेरे कंधों पर बैठकर बनारस के घाट घूमा करती थी, खुद चलकर इस आंगन में आ रही है। लड़कियाँ जब मायके आती हैं, तो घर की दीवारें भी जैसे मुस्कुराने लगती हैं। उनकी हंसी की खनक से पूरे घर का सन्नाटा … Read more

सुकून का नया पता

 सुमित्रा जी मुस्कुराते हुए बोलीं, “नहीं मालती, बच्चों ने कभी हमसे एक पैसा नहीं मांगा। बल्कि वे तो हर महीने हमें पैसे भेजना चाहते हैं। सच तो यह है कि उस बड़े घर में हम थक चुके थे। रोज सुबह उठकर कामवाली का इंतजार करना, कभी प्लंबर को बुलाना, कभी बिजली वाले के पीछे भागना। … Read more

error: Content is protected !!