नई सुबह की देहरी
“मुझे माफ़ कर दीजियेगा बाबूजी,” राधिका का गला बुरी तरह रुंध चुका था। “मुझे पता है, मेरा चेहरा देखकर हर कोई ऐसे ही डर जाता है। मैं यहां से चली जाती हूँ।” वह पीछे मुड़ने लगी, लेकिन उसका दर्द आंसुओं और शब्दों के रूप में बह निकला। वह बिना उनकी तरफ देखे, रुंधे हुए गले … Read more