सोने का दिल – सावित्री गोंड
शादी की शहनाइयों का शोर अभी थमा भी नहीं था कि सुमेधा के कानों में एक अलग ही सुर घोला जाने लगा था। वह सुर था उसकी ममीरी सास, यानी उसके पति आलोक की बुआ, सरला जी का। सुमेधा जब ब्याह कर ‘शांति-निवास’ में आई, तो उसे लगा था कि संयुक्त परिवार में रहना थोड़ा … Read more