वह छाँव जिसे हम बेड़ियाँ समझ बैठे

“रोज-रोज की ये किचकिच अब और बर्दाश्त नहीं होती!” शिखा ने अपना हैंडबैग सोफे पर जोर से पटकते हुए कहा था। आज फिर वही बात हुई थी। ऑफिस से आने में थोड़ी देर क्या हो गई, उसकी माँ ने लगातार दस बार फोन कर दिया था। जब शिखा घर पहुंची, तो माँ दरवाजे पर ही … Read more

प्यार की बेड़ियाँ

शाम ढलते ही भैरवगढ़ की संकरी और पुरानी गलियों में एक अजीब सी खामोशी छा जाती थी। यह वह कस्बा था जहाँ समय जैसे दशकों पहले ठहर गया था। इसी कस्बे में एक नया सरकारी बैंक खुला था, जिसके नवनियुक्त मैनेजर अनिरुद्ध ने अभी हफ्ते भर पहले ही यहाँ अपना कार्यभार संभाला था। अनिरुद्ध शहर … Read more

राखी का धागा – डॉ बीना कुण्डलिया

बबीता के परिवार में वो दो बहनें, तीन भाई, एक सबसे बड़ी बहन फिर तीन भाई फिर सबसे छोटी थी बबीता। बड़े ही लाड़ प्यार से माता-पिता ने परवरिश की उन सबकी । एक दूसरे को समझता, एक दूसरे पर निछावर, जान छिड़कता ऐसा था उनका परिवार। पिता मनोज जी सरकारी आफिसर माँ पार्वती घरेलू … Read more

प्यार का ज़ायका: एक अनकही वसीयत

 रिया को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ। एक रिटायर्ड बैंक मैनेजर, घर का सबसे बुजुर्ग और सम्मानीय व्यक्ति, सुबह-सुबह रसोई में नाश्ता बना रहा था! शर्म, संकोच और अपराधबोध से रिया का चेहरा लाल हो गया। वह तुरंत रसोई के अंदर गई और कांपती हुई आवाज़ में बोली, “बाबूजी! ये… ये आप क्या कर … Read more

सपनों की उड़ान और एक अजनबी का साथ

 सूरज की यह बात सुनकर दीनदयाल सन्न रह गया। एक छोटा सा बच्चा, जो खुद ठंड से कांप रहा है, वह अपने भविष्य, अपनी पढ़ाई और अपनी मां के सपनों के लिए अपने शरीर को गर्माहट देने वाले इकलौते सहारे को बेचने निकल पड़ा था। दीनदयाल को अचानक अपना वो बेटा याद आ गया, जिसे … Read more

वजूद की उड़ान

 नौ साल का ‘सावन’ कोने में दुबक कर रो रहा था। दीनानाथ भारी कदमों से अंदर गए और सावन के सिर पर हाथ रखा। सावन ने अपनी डबडबाई आँखों से पिता की ओर देखा और मासूमियत से पूछ लिया, “बाबा, मेरे शरीर में ये अजीब से बदलाव क्यों हो रहे हैं? आज स्कूल में जब … Read more

सूने आंगन की गूंज

सर्दियों की एक धुंधली और सर्द सुबह थी। लखनऊ के गोमती नगर इलाके में स्थित ‘आनंद कुंज’ नाम की एक विशाल और खूबसूरत हवेली, जो कभी बच्चों की किलकारियों और मेहमानों के ठहाकों से गूंजा करती थी, आज एक अजीब से सन्नाटे में डूबी हुई थी। उस सन्नाटे को चीरती हुई सिर्फ एक ही आवाज़ … Read more

फासलों के पार का अपनापन

लखनऊ की सर्द और कोहरे में लिपटी हुई नवंबर की वह सुबह देवकी जी के लिए किसी उत्सव से कम नहीं थी। साठ पार कर चुकीं देवकी जी पिछले कई सालों से इस विशाल और पुराने पुश्तैनी मकान में नितांत अकेली रह रही थीं। उनके इकलौते बेटे सिद्धार्थ की नौकरी मर्चेंट नेवी में थी, जिसके … Read more

ममता अनमोल है

आज शारदा जी  बहुत गमगीन होकर विचारों में डूबी हुई थी। सिंगापुर में रहने वाली उनकी बेटी संजना की तबियत बहुत खराब थी। पिछले माह ही उसके सिज़ेरियन सैक्शन से बेटा हुआ था पर उन्हें कोई खुशी नहीं हुई थी। एकदम निर्विकार भाव से सब देखती सुनती रही थी।  सच तो ये था कि वो … Read more

स्वाभिमान की उड़ान: एक बेटी का फर्ज

रात के करीब दो बज रहे थे। पूरा घर गहरी नींद में डूबा था, लेकिन स्वाति की आँखों से नींद कोसों दूर थी। तभी उसके फोन की स्क्रीन रोशन हुई। स्क्रीन पर ‘माँ’ का नाम झिलमिला रहा था। इतनी रात गए माँ का फोन आना किसी अनहोनी का संकेत था। कांपते हाथों से स्वाति ने … Read more

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