एक अनकही विदाई

 “पापा… ये क्या हो गया? आपने बताया क्यों नहीं कि आपकी तबीयत खराब है? आपको कोई परेशानी थी तो मुझसे कहना चाहिए था, आख़िर मैं आपका बेटा हूँ!” अभिनव के आँसू श्रीनाथ जी के हाथों पर गिर रहे थे। श्रीनाथ जी ने एक बहुत ही फीकी, लेकिन दर्द भरी मुस्कान के साथ उसकी तरफ देखा। … Read more

अहसास के धागे

मीनल यह सब देख और समझ रही थी। वह जानती थी कि एक नई लड़की को नए घर में ढलने में वक्त लगता है और कभी-कभी असुरक्षा की भावना हावी हो जाती है। घर की शांति भंग न हो और परिवार एक डोर में बँधा रहे, सिर्फ इसलिए मीनल चुपचाप काव्या की सारी गुस्ताखियों को … Read more

खामोश दर्द

कांता बुआ ने भी मुंह बनाते हुए जवाब दिया, “सही कह रही हो भाभी! आखिर बेटी तो बेटी ही होती है न। खून का रिश्ता है उसका। बहू तो पराये घर से आई है, उसे क्या दर्द होगा अपनी सास के मरने का। बस नाम का रोना-धोना भी नहीं कर रही।” पास ही बैठी एक … Read more

उड़ान खामोशियों की

अपनी आलीशान कांच की इमारत के सबसे ऊपरी माले पर बनी अपनी शानदार केबिन में, बाहर हो रही बारिश को देखते हुए अवनि ने अपनी ब्लैक कॉफ़ी का कप अभी होंठों से लगाया ही था कि उसके दिमाग के किसी कोने में पच्चीस साल पुरानी वो खौफनाक रात फिर से जिंदा हो उठी। वो रात … Read more

अनकहे जज्बात और माँ की पारखी नज़र

  रमा देवी गैस के पास खड़ी होकर अपने पच्चीस साल के बेटे कबीर के लिए टिफिन पैक कर रही थीं। डाइनिंग टेबल पर बैठे उनके पति, आनंद जी, अपने चश्मे को नाक पर टिकाए अख़बार की सुर्ख़ियों में खोए हुए थे। घर का माहौल बिल्कुल वैसा ही था जैसा किसी भी आम मध्यमवर्गीय परिवार का … Read more

संस्कारों की कद्र

“सुषमा जी, देखिए हमारे पंडित जी ने कहा है कि अगले महीने की पंद्रह तारीख का मुहूर्त सबसे उत्तम है। इसके बाद तो सीधा छह महीने तक कोई शुभ मुहूर्त नहीं है। हम चाहते हैं कि शादी इसी मुहूर्त में हो जाए। आखिर हमें भी तो अपने रिश्तेदारों को जवाब देना होता है।” फोन के … Read more

पहली बारिश और वो अजनबी सा अपनापन

कमरे के अंदर बैठी स्नेहा अपने कपड़ों को सूटकेस में सहेज रही थी, लेकिन उसकी नज़रें बार-बार खिड़की के बाहर गिरती बारिश की बूंदों पर जा टिकती थीं। उसकी शादी को अभी महज़ चार महीने ही हुए थे। शादी के बाद यह उसका पहला सावन था और मायके जाने की खुशी उसके चेहरे पर साफ … Read more

स्मृतियों की वसीयत

वैदेही की आंखें आंसुओं से सूज चुकी थीं और उसका सिर अपनी छाती तक झुका हुआ था। सामने बाबूजी क्रोध से कांप रहे थे। “तूने सोच भी कैसे लिया कि इस घर की बेटी उस साधारण से मास्टर के बेटे के साथ अपना जीवन बिताएगी? हमारी और उनके परिवार की जो पीढ़ियों पुरानी खटास है, … Read more

आँगन की वो गौरैया

यह सुनकर मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई। मेरा बाल-मन इस बात को स्वीकार ही नहीं कर पा रहा था कि मौसी मुझे छोड़कर हमेशा के लिए कहीं और रहने जा रही हैं। अगर शादी का मतलब बिछड़ना होता है, तो फिर शादी करनी ही क्यों? मैं दौड़कर मौसी के पास जाना चाहता था, उन्हें … Read more

फासलों के बीच सिमटती दुनिया

  बरामदे में रखी आराम कुर्सी पर बैठे माधव जी के हाथों में उनका टैबलेट था और उनके चेहरे पर एक सौम्य मुस्कान तैर रही थी। पास ही बैठी उनकी पत्नी, सुमित्रा, अपने फोन पर किसी को अपनी नई बुनाई का डिजाइन समझा रही थीं। जो भी उन्हें बाहर से देखता, उसे यही लगता कि उम्र … Read more

error: Content is protected !!