अनकहा दर्द और एक अधूरी सौगात

 मैंने जैसे ही उस डिब्बे को खोला, मेरे पैरों तले जमीन खिसक गई। उसमें एक बहुत ही खूबसूरत और पुरानी चांदी की पायल रखी थी और साथ में एक मुड़ा हुआ कागज था। मेरे हाथ कांपने लगे। मैंने उस कागज को खोला। वह एक चिट्ठी थी, जिसकी लिखावट कई जगह से आंसुओं की वजह से … Read more

स्मृतियों की धुंध

“अरे वाह! मुझे हमेशा से पता था कि तुम एक दिन बहुत बड़े अफसर बनोगे। तुम्हारी मेहनत और लगन ही ऐसी थी,” अवंतिका की आंखों में एक सच्चा गर्व झलक रहा था। “मैं यहां हिमाचल यूनिवर्सिटी में बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) की एक नेशनल कांफ्रेंस में मुख्य वक्ता के तौर पर आई हूं। मैं चंडीगढ़ की … Read more

खोखली सोच और एक पाक रिश्ता

लेकिन, यह पूरा नजारा दूसरी मंजिल की बालकनी में खड़ी मालती जी की गिद्ध जैसी नजरों से नहीं बच पाया। उन्होंने देखा कि एक जवान लड़की एक बूढ़े आदमी को महंगे फूल और तोहफे दे रही है और वह बूढ़ा आदमी उसे देखकर खुशी से फूला नहीं समा रहा है। मालती जी के खुराफाती दिमाग … Read more

कांच के ख्वाब

 एक शाम जब मीरा काम से लौटी, तो उस का चेहरा उतरा हुआ था और आँखें सूजी हुई थीं। शांति से अब और रहा नहीं गया। उन्होंने मशीन बंद की और मीरा के पास जाकर बैठ गईं। “मीरा… बेटी, मुझे बहुत डर लग रहा है। तू पिछले कई दिनों से बहुत परेशान दिख रही है। … Read more

सच्चाई का स्पर्श

मैंने बहुत कम उम्र में ही दुनिया का असली चेहरा देख लिया था। मैंने अपने हक के लिए लड़ना सीखा है। अगर कोई मुझसे तेज आवाज में बात करता है, तो मैं चुप होकर रोने वाली लड़की नहीं हूं, मैं पलटकर जवाब देती हूं। मेरे व्यवहार में एक तरह का कड़कपन है, जो असल में … Read more

परछाईयों की तलाश – अनीता रवि

ऐसे लगता है जैसे सारी मनौतियाँ पूरी करने कर के गंगा नहा आई हूँ या हज से लौटी हूँ या पवित्र रोमनगरी से हो आई हूँ  । शब्‍दों के धागे जैसे मन की भावनाओं को गूँथ ही नहीं पा रहे । बस महक रही हूँ मैं अखंड तृप्ति के फूलों की सुगंध से । विश्‍वास … Read more

कच्चे धागे – एम. पी. सिंह

पूनम की डोली ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में ननद और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति अंगद की अच्छी नोकरी थी। सब ठीक चल रहा था, ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। परंतु पूनम की ननद बिमला ज्यादा घुल मिल नहीं रही थीं।  उसे भाभी की … Read more

त्याग की मूरत और स्वार्थ का आईना

शहर की चकाचौंध और भागदौड़ भरी जिंदगी के बीच, माधव अपनी पत्नी कामिनी और सात साल की बेटी रिया के साथ एक आलीशान फ्लैट में रहता था। माधव ने अपने जीवन में बहुत तरक्की की थी। एक साधारण से घर से निकलकर उसने अपनी एक अच्छी खासी कंस्ट्रक्शन कंपनी खड़ी कर ली थी। इस सफलता … Read more

ज़िंदा लाश: एक बहन का खौफ़नाक इंसाफ़

अदालत के उस विशाल और शांत कमरे में आज एक अजीब सा सन्नाटा पसरा था। यह सन्नाटा किसी डर का नहीं, बल्कि एक स्तब्ध कर देने वाले सच का था। कटघरे में अट्ठाईस वर्षीय देविका खड़ी थी। उसके चेहरे पर न तो कोई पछतावा था, न कोई खौफ और न ही किसी तरह की घबराहट। … Read more

लौटते कदमों की आहट

 लड़की की आँखों में एक अजीब सी चमक आई, लेकिन यह चमक सम्मान की नहीं, बल्कि एक तीखे सवाल की थी। उसने कहा, “तो फिर अंकल, जब आप इतने बड़े आदमी हैं, तो आपने इस भूखी बच्ची को दस रुपये का बिस्किट क्यों नहीं दिला दिया? आप तो बैठकर बस देखते रहे।” अंकल थोड़ा सकपका … Read more

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