तेरी छाँव रहे – रवीन्द्र कांत त्यागी

सत्तर की उम्र आते आते श्रीनिवास जी की जिंदगी का एक रूटीन बन बन गया था. सुबह शौच आदि से निवृत होकर गाय की सानी पानी करना. दूध दुहकर घर चले जाना और चूल्हे के पास धनवंती से बतियाते हुए दो ग्लास गुड़ की चाय पीना. फिर अपने बँटाई पर दिये खेतों का एक चक्कर … Read more

चौथी बेटी – परमा दत्त झा

अरे रमेश बाबू अब आप खतरे से बाहर हैं।आप सभी से मिल सकते हैं।-यह डा मिश्र बंसल के थै जो रूटीन विजिट में आये थे। मैं कहां हूं, मुझे क्या हुआ था -ये अकचका गये। आपको सिरियस हार्ट अटैक आया था और आप अस्पताल में भर्ती हैं।परसों आपकी बायपास सर्जरी हुई है।-डा उन्हें समझाते बोले। … Read more

न बिट्टी न – सुनीता मुखर्जी “श्रुति”

न बेटी न…! ऐसा मत सोचना। तुम इस दुनिया की सबसे खूबसूरत ईश्वर की रचना हो। तुम में वह सभी अच्छाई समाहित हैं जिसकी लोग कल्पना करते हैं। और रही बात रंग रूप की…. यह भी कहां स्थाई है, आज है कल चला जाएगा।  मणिमाला – मैं सुंदर नहीं हूंँ, लोग मेरा उपवास उड़ाते हैं। … Read more

रिश्ते – शालिनी दीक्षित

डॉक्टर की क्लीनिक में बैठे हुए मनीषा की नजर दूसरी तरफ बैठे हुए एक इंसान पर पड़ी, दुख और टेंशन में भी उसके चेहरे पर चमक सी आ गई लेकिन वो सोच में पड़ गई क्या ये सच मे अनुराग है? पहचान पाना मुश्किल हो सकता है क्योकि करीब करीब 25 साल हो गए उस … Read more

“कठोर शब्दों की पीड़ा ” – कमलेश आहूजा

“क्या इसी दिन के लिए तुम्हें इतना पढ़ाया लिखाया था,कि तुम अपने पिता को समझाओ क्या गलत है?क्या सही?मैं मर जाऊँ तो मेरा मुँह भी मत देखना।” पिता के मुँह से ऐसे कठोर वचन सुनकर नेहा बहुत रोई।उसकी गलती सिर्फ इतनी थी,कि वो अपने पापा को ये समझा रही थी..माँ को परेशान ना किया करें … Read more

मेरी यादों में दूर्गापूजा – डाॅ उर्मिला  सिन्हा

दशहरा ..शारदीय नवरात्रि के दशमी को नीलकंठ पक्षी का  दर्शन अत्यंत शुभ माना जाता है.. अतः आप सभी के समक्ष प्रस्तुत है  -नीलकंठ, हे भोलेनाथ आप सभी को सपरिवार विजयादशमी की हार्दिक  शुभकामनाएँ  बधाई.. मां भगवती की  कृपा बनी  रहे।बडों को चरणस्पर्श और छोटों को शुभाशीष..  मेरी यादों में—दुर्गापूजा डॉ उर्मिला सिन्हा    बरसात में निरन्तर … Read more

जीवन का मूल मन्त्र – एम पी सिंह

मि. और मिसिस गुप्ता कि शादी को 10 साल हो गए थे। इन 10 सालों मे शायद ही कोई दिन ऐसा होता हो कि दोनों झगड़ते न हो। झगड़े कि वजह कोई बड़ी नहीं होती थी, गुप्ता जी बस यही शिकायत करते कि चाय ठंडी है, चाय अब तक क्यों नहीं मिली, दाल में नमक … Read more

यह बात तो भगवान शिव ने पार्वती को भी समझाई थी – बीना शर्मा

कनिका को जब पता चला कि उसकी भतीजी पुरवा का रिश्ता पक्का हो गया और कुछ दिन बाद उसकी शादी होने वाली है तो उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा था। वह खुद ही अपनी भतीजी की शादी में जाने की तैयारी करने लगी थी। जब कनिका के पति सुजीत ने कनिका को पुरवा की … Read more

जेवर – प्रियंका पांडेय त्रिपाठी

प्रिया की शादी का दूसरा दिन था। सुबह का समय जेठानी जी फर्श पर बैठी हुई थी ननद रसोई में नाश्ता बना रही थी अचानक ननद प्रिया के पास आई ,उसे आंगन में ले गई और ऊंचे स्वर में प्रिया से कहने लगी कि….      “भाभी ने हमारे लिए बहुत किया है वो मां के समान … Read more

वो भी तो मेरा अंश था… – चंचल नरूला

काश कोई बड़ा भाई या बहन होती जो संभाल लेती मेरी लाडो को हम बुड्ढा बुढ़िया के बाद | जाने किस उधेड़ बुन मे फंसी थी चेतना जब डॉ. ने कहा माँ जी आपको अपने लिए नहीं अपनी इकलोती  बेटी के लिए जीना है | ” कितनी खुश थी न चेतना उन 2 लकीरों को … Read more

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