रिश्तों के घाव
“बाबूजी, आपसे कितनी बार कहा है कि डाइनिंग टेबल पर बैठकर खाना खाया कीजिए। बिस्तर पर फिर से दाल गिरा दी आपने। अब यह चादर कौन धोएगा? सुमन तो नौकरानी है नहीं, और मुझे ऑफिस से आकर इतनी फुर्सत नहीं कि आपकी गंध साफ करता रहूं।” रजत की आवाज़ में कड़वाहट थी, इतनी कड़वाहट कि … Read more