एक छत के नीचे दो दुनिया
*बुढ़ापे की लाठी वो नहीं जो घर के कोने में रखी हो, बल्कि वो है जो लड़खड़ाते वक्त हाथ थाम ले, चाहे वो हाथ सात समंदर पार से ही क्यों न बढ़ा हो।* फ़ोन रखने के बाद, रघुनाथ जी ने कड़वाहट से कहा, “विमला, तू कब तक झूठ बोलेगी? जो बेटी पांच सौ किलोमीटर दूर … Read more