अपने वजूद का पता – अनंत मारवाड़ी
सावित्री जी निहारिका की बात सुनकर सन्न रह गईं। उनके पास अपनी बेटी के इस कड़वे सच का कोई जवाब नहीं था। उन्होंने बस एक लंबी ठंडी आह भरी और कपड़ों की तह लगाने लगीं। लेकिन उस दिन निहारिका के अंदर एक चिंगारी सुलग उठी थी। उसे समझ आ गया था कि समाज ने औरतों … Read more