यह लड़की मेरे बुढ़ापे का सहारा नहीं, जंजाल बन गई है – आरती झा

शाम के साढ़े सात बज रहे थे। अपार्टमेंट की लिफ्ट से बाहर निकलते ही आर्यन को अपने फ्लैट के दरवाजे से आती हुई ऊँची आवाजें सुनाई देने लगीं। उसके कदमों की रफ्तार, जो दिन भर की थकान के कारण धीमी थी, अचानक तेज हो गई। यह कोई नई बात नहीं थी, लेकिन आज आवाज़ में … Read more

पाप और पुण्य – गरिमा चौधरी

बनारस के घाटों से थोड़ी दूर, एक पुरानी लेकिन बेहद भव्य हवेली ‘संस्कार भवन’ में आज सुबह से ही गहमागहमी थी। हवेली के मुखिया, पंडित दीनानाथ शास्त्री, शहर के माने हुए विद्वान और धर्म-कर्म में विश्वास रखने वाले व्यक्ति थे। आज का दिन उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण था। उनके दिवंगत पिता की 50वीं पुण्यतिथि थी … Read more

अपमान जब अपनों से मिलता है, तो आँसू सूख जाते हैं – मुकेश पटेल

आज ‘गृह-प्रवेश’ की पूजा थी। घर मेहमानों से भरा था। हर कोई विनय और उसकी पत्नी शिखा की किस्मत की तारीफ कर रहा था। “क्या घर बनाया है विनय! बिल्कुल महल जैसा है,” विनय के बॉस ने व्हिस्की का गिलास थामते हुए कहा। विनय का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। “थैंक यू सर। बस, … Read more

बहू हम इस घर के नौकर नहीं मालिक हैं – मुकेश पटेल 

जब घर में आई नई बहू ने अपने वृद्ध सास ससुर को घर से निकालने और अपनी चलाने के लिए रची साजिश तो वृद्ध सास ससुर ने चली ऐसी चाल कि बहू की रूह कांप गई. “उफ्फ! मम्मी जी,” शालिनी ने नाक सिकोड़ते हुए कहा, “मैंने आपसे कितनी बार कहा है कि अपनी ये आयुर्वेदिक … Read more

अपमान का घूंट – हेमलता गुप्ता 

अरे जब बाप ही ऐसा हो, तो बेटी तो ऐसी होगी ही ना, ससुर जी जरा सख्त होते हुए बोले… पहली बार ससुराल आए पिता की बेज्जती होते देख, बेटी ने सास ससुर को सिखाया ऐसा सबक कि उनके होश उड़ गए…. शहर के सबसे पॉश इलाके ‘सिविल लाइन्स’ में स्थित मल्होत्रा मेंशन आज रोशनी … Read more

माँ का फ़ैसला सुन बेटे को आ गया पसीना – रश्मि प्रकाश

65 वर्षीय वृद्ध विधवा मां से बेटा बहू वृद्धाश्रम में मिलने और धोखे से उनकी सारी प्रॉपर्टी अपने नाम कराने पहुंचे तो वहां पर वृद्धाश्रम के मैनेजर ने उनको दिया एक ऐसा तोहफा कि उनके पैरों तले जमीन खिसक गई  दोपहर की चिलचिलाती धूप में ‘आनंदम वृद्धाश्रम’ का लोहे का गेट खुला और एक चमचमाती … Read more

“ये क्या बात हुई मम्मी जी? मैं आपके पूरे घर के लोगों के लिए सोचूं … – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव 

” ये क्या बात हुई मम्मी जी? मैं आपके पूरे घर के लोगों के लिए सोचूं। और आप लोग मेरे बारे में बिल्कुल भी ना सोचो। अब घर में मेहमान हों और घर की बहू कमरे में कुंडी लगाकर बैठी रहे, यह अच्छा लगता है क्या? लोग क्या कहेंगे? कि भाई-भाभी ने स्वागत नहीं किया?” … Read more

माँ ने 25 लाख के लिए बेटा बेच दिया… – मुकेश पटेल

बाहर मूसलाधार बारिश हो रही थी, लेकिन शर्मा विला के ड्राइंग रूम में जो तूफ़ान खड़ा था, वह बाहर के मौसम से कहीं ज़्यादा भयानक था। दीवार घड़ी रात के नौ बजा रही थी। कमरे के बीचों-बीच बिखरे हुए काँच के टुकड़े और फटे हुए कागज़ इस बात की गवाही दे रहे थे कि यहाँ … Read more

“पापाजी अब घर में रह रहे हैं.. तो कुछ तो काम करना ही होगा।” – डॉ अनुपमा श्रीवास्तव 

खिड़की से आती धूप अब कमरे के फर्श से हटकर दीवार पर चढ़ चुकी थी। दोपहर के दो बज रहे थे, लेकिन दीनानाथ जी अभी तक अपनी उसी पुरानी आराम कुर्सी पर लेटे हुए थे। उनकी आँखों पर चश्मा टिका था, और हाथ में एक किताब थी जिसका पन्ना पिछले एक घंटे से नहीं पलटा … Read more

घर कचहरी नहीं बनेगा! – मुकेश पटेल 

आख़िर छोटी-छोटी बातों में बहू के मायके वालों को क्यों शामिल करना??  शाम के छह बज रहे थे। घर की दीवार घड़ी ने अपना घंटा बजाया, लेकिन सुमन के कानों में वह आवाज़ किसी अलार्म की तरह नहीं, बल्कि किसी आने वाले तूफ़ान की चेतावनी जैसी लगी। वह ऑफिस से अभी-अभी लौटी थी। थकी हुई … Read more

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