खोखले हो चुके रिश्ते – गरिमा चौधरी
“अरे कोई है इस घर में या सब बहरे हो गए हैं? मीना… ओ मीना! कहां मर गई?” ड्राइंग रूम में फाइलों का पुलिंदा बिखेरते हुए राजेंद्र बाबू का पारा सातवें आसमान पर था। उनकी गरजती आवाज से खिड़कियों के कांच भी मानो थर्रा गए हों। रसोई में सुबह के नाश्ते की तैयारी में जुटी … Read more