भाई, मै तेरी तरह स्वार्थी नहीं हूँ – मंजू ओमर

यह  घर यह प्रॉपर्टी और घर का सारा रुपया पैसा पर बेटे का हक होता है बेटियों का नहीं समझी सिया। तुमने मां को रख लिया इसका मतलब यह नहीं सारी प्रॉपर्टी पर हक तुम्हारा हो गया सूरज बोला। मैं तुम्हारी तरह स्वार्थी नहीं हूं भाई जो मैं यहां पैसे या प्रॉपर्टी के लालच में … Read more

*भाई, मैं तेरी तरह स्वार्थी नहीं हूं* – तोषिका

“आज क्या बनाया है खाने में आपने मां?” पीछे से गले लगकर तारा ने अपनी मां सुषमा से पूछा।” तेरी मनपसंद कड़ी बनाई है, जल्दी से हाथ मुंह धो ले, मैं खाना गरम कर देती हू।” उधर तारा हाथ मुंह धो कर आई और खाना खाने बैठी और सुषमा से पूछा कि “मां, ये भाई … Read more

“भाई मैं तेरी तरह स्वार्थी नहीं हूं” – सुनीता मलिक सोलंकी 

बागपत  की एक तंग सी गली में दो भाई रहते थे — बड़ा भाई मुकेश और छोटा अनिल । उम्र में पाँच साल का फासला, पर सोच में ज़मीन-आसमान का। उनके पिता जी की परचून की दुकान थी । पिता के बाद  मुकेश ने दुकान संभाल ली। अनिल पढ़ने में तेज़ था, सो पढ़ाई कर  … Read more

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