रायपुर वाली भौजी – सुबोध चतुर्वेदी  : Moral Stories in Hindi A

एक दिन मैंने पिताजी को मां से कहते सुना- अब हम जाकर बहू को शहर छोड  आयेंगे ,कब तक  अकेली यहां पडी रहेगी ? आखिर हमारा भी तो कुछ फर्ज बनता है.मां का दबा स्वर आया –जो रखने से उन्हौंने इंकार कर दिया तो ? पिताजी ने कोई जबाव नहीं दिया ,शायद उनके पास था … Read more

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