गुरूर – खुशी प्रजापति : Moral Stories in Hindi

एक गाँव में एक राजा रहता था जो निर्दयी और घमंडी था। एक बार एक वृद्ध राजा के दरबार में आया और बोला महाराज! क्या आपके पास मेरे योग्य कोई कार्य है यदि हो तो बताइए। राजा बोला अभी मेरे पास कोई ऐसा कार्य नहीं जो तुम्हारे योग्य हो। वृद्ध बोला महाराज कृपा करें मेरी … Read more

मेरे पापा मेरा गुरुर हैं – कमलेश आहूजा : Moral Stories in Hindi

“बेटी,बड़ी हो रही है अभी भी आप उसके साथ बच्चों की तरह आंख मिचौनी खेलते रहते हैं।”रमा झल्लाते हुए बोली। “रमा,यही तो समय है जितना अपनी बेटी का साथ लाड लगा सकूं उसके साथ मस्ती कर सकूं।बड़ी होकर तो ये अपने ससुराल चली जाएगी।क्या पता फिर इससे मिलने के लिए भी तरस जाऊं।”सुरेश जी कहते … Read more

अपशगुन – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

” माफ़ कीजियेगा भाभीजी…अब हमारे आकाश की शादी आपकी सिमरन के साथ नहीं हो सकती…।” देवीलाल ने सगाई का सामान लौटाते हुए प्रमिला जी से कहा तो वो चौंक गई।   ” शादी नहीं हो सकती!…मगर क्यों भाईसाहब? सिमरन या हमसे ऐसी क्या भूल गई है जो आप…।आपकी कोई डिमांड हो तो बताइये…मैं पूरा करुँगी…।”     ” … Read more

मेरा गुरूर मेरी सासू मां – माधुरी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

यों तो समाचार पत्रों में अधिकतर ऐसी-ऐसी खबरें समय समय पर प्रकाशित होती रहती हैं कि फलां बहिन ने अपने भाई को किडनी देकर उसकी जान बचाई या कभी बेटी ने अपने पिता को किडनी दी।लेकिन आज की खबर इन सब खबरों से एकदम अनूठी थी,खबर ही कुछ ऐसी थी कि जो भी पढ़ता ,दांतों … Read more

अपना अपना धर्म – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

अपना नाम सुन वीरेन ठिठक गया।दरवाजा खुला था,सो पहले की तरह वह अंदर चला गया।धीरेंद्र अपनी पत्नी को समझा रहा था, देखो वीरेन की नौकरी भी कोविड के समय चली गयी है, इस समय बेरोजगार है,जरूरतमंद है,पता नही मिलते ही क्या डिमांड कर दे,मैं तो इसीलिये उससे मिलने से कतराता हूँ।ध्यान रखना मेरे पीछे आये … Read more

गुरूर -निशा जैन : Moral Stories in Hindi

अरे छोटी  .. आओ … आज तो बहुत दिनो बाद याद आई अपनी दीदी की… रंभा ने राम्या (अपनी देवरानी) को बोला जो आज पूरे एक महीने बाद अपनी जेठानी के घर आई थी। हां दीदी बच्चों के एग्जाम चल रहे थे तो थोड़ी बिज़ी थी .. आज कुछ काम से बाजार आई थी तो … Read more

ईश्वर दृष्टि – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 आधुनिक व्यापारिक गुर सिखाते हुए शांतिशरण अपने पुत्र  हेमंत के साथ हरिद्वार पहुँचे।हर की पौड़ी पर भरपूर गंगा स्नान के बाद वही सामने मोहन पूरी वाले के यहां बाप बेटे हलवा पूरी का नाश्ता करने पहुँचे।पहले बेटा हेमंत ने आगे बढ़कर हलवा पूरी ली और एक ओर खड़ा होकर खाने लगा।उसके बाद में पिता शांतिशरण … Read more

गुरूर -प्रतिभा भारद्वाज ‘प्रभा’ : Moral Stories in Hindi

“अरे बहुओं को थोड़ा कंट्रोल में रखना चाहिए नहीं तो घर बिगड़ते देर नहीं लगती….” रामदयाल जी ने अपने छोटे भाई किशनलाल से कहा जिनकी बहू किसी बात से नाराज होकर एक दिन पहले अपने मायके चली गई थी। “अब क्या बताएं राहुल भी तो नहीं कहता कुछ उससे…अब हम भी कब तक कहें…हमारा ज्यादा … Read more

सोने की अंगूठी -शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

हमनें अभी  नई काॅलोनी में शिफ्ट किया था।यह काॅलोनी पुरानी काॅलोनी से काफी दूर थी सो यहाँ सारी व्यवस्थाएं नये सिरे से करनी पड़ी। जैसे दूधवाला , पेपर वाला, कामवाली मेड ,प्रेसवाला सामान के लिए परचूनी की दूकान ।पेपर देने वाला लड़का जिसे हम गुप्ता जी के नाम  से बुलाते थे यही कोई तेइस-चौबीस वर्ष … Read more

कठपुतली – शनाया अहम : Moral Stories in Hindi

आख़िर क्यों कोई मुझे नहीं समझता , क्या मैं इस घर के लिए सिर्फ कमाई का एक साधन मात्र हूँ ??? क्या मेरे अपनी कोई इच्छा कोई चाहत नहीं है ??? यहां हर कोई मुझसे ही क्यों हर तरह की उम्मीद लगाए बैठा है ??? अपनी कुछ ज़िम्मेदारी ये सब ख़ुद क्यों नहीं उठा सकते … Read more

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