टूटते रिश्ते – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

आज सुमित की शादी की दूसरी सालगिरह और बेटे की छठी दोनो है… बहुत मनुहार किया आना जरूर आशीर्वाद देने… शहर का नामी संपन्न परिवार… धन्य धान्य से भरपूर…शहर के तीन फैक्ट्रियों के मालिक…उड़ीसा में पिछले साल एक और नई फैक्ट्री लगी है… इसलिए शहर के नामी गिरामी हस्ती आमंत्रित हैं…. मेरे नजरें सुमित की … Read more

टूटते रिश्ते – डाॅक्टर संजु झा : Moral Stories in Hindi

इंसान की जिंदगी में प्यार का एहसास  जितना ही खुबसूरत होता है,इसके विपरीत  टूटे हुए  रिश्ते का दर्द  उतना ही कष्टप्रद और दुखदायी होता है।टूटे हुए  रिश्ते के जख्म ताउम्र नहीं भरते हैं,भले ही वक्त उस पर धूल की चादरें क्यों न चढ़ा दे! अतीत  के दुखदायी लम्हें व्यक्ति के दिल के कोने में ज्यों … Read more

” टूटते रिश्ते ” – उमा वर्मा : Moral Stories in Hindi

मीता का आज मन नहीं लग रहा था ।आज चौबीस मई है ।पति के गुजरे पूरे बीस वर्ष पलक झपकते न जाने कैसे बीत गया ।कितनी खुशहाल थी वह अपनी गृहस्थी में ।कितने जतन से बचाया था उसने अपने परिवार के बीच ” टूटते रिश्ते ” को। आज अचानक क्यों याद आ रहें हैं उसे … Read more

ये कैसा प्यार ? – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” हैलो मम्मी !” श्रुति फोन मिला बोली। ” कौन ?” उधर से आवाज आई। ” मम्मी अपनी बेटी को भी भूल गई आप !” श्रुति उदास हो बोली। ” बेटी …कौन बेटी ?” उधर से अभी भी सपाट स्वर था। ” मम्मी ऐसे मत बोलो प्लीज !” श्रुति रोते हुए बोली। ” यहां आपकी … Read more

रिश्तों को संभालना पड़ता है – विभा गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 ” सुन मानसी…मुझे मार्केट में कुछ काम है, इसलिए मैं जल्दी जा रही हूँ…तू किसी और से लिफ़्ट ले लेना।” कहकर दिव्या ने लैपटाॅप बंद करके अपने बैग में रखा और कंधे पर डालकर ऑफ़िस से बाहर निकल गई। उसने अपनी स्कूटी ‘सिटी माॅल ‘ के पार्किंग में रखी और घर के लिये कुछ ज़रूरी … Read more

सब्र का फल – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

पिछले तीन सालों से मधु की छोटी बहन मायके नहीं आई थी।पांच भाई-बहनों में मधु ही सबसे बड़ी थी,और मीता सबसे छोटी।पहली कक्षा में थी ,जब पापा गुज़र गए।पिता की अंतिम यात्रा में अपनी दीदी का हांथ पकड़े पूछ रही थी वह”दीदी,पापा को कहां ले जा रहें हैं?सब रो क्यों रहें हैं?अस्पताल जा रहें हैं … Read more

पापा की फोटोकॉपी – शुभ्रा बैनर्जी : Moral Stories in Hindi

बचपन से ही और लड़कों की तरह शुभा का बेटा भी मां के आगे -पीछे ही घूमता रहता था।पापा के ड्यूटी से आते ही दौड़कर दादी के पास चला जाता था।बहन इसके विपरीत अपनी पापा की ज्यादा लाड़ली थी।शुभा को सासू मां अक्सर कहती”यही होता आया है हमेशा से बहू,बेटा मां का और बेटी पापा … Read more

एक प्रेम ऐसा भी…. – विनोद सिन्हा “सुदामा” : Moral Stories in Hindi

आज़ जब पूरे दो महीने बाद ऑफिसियल टूर से लौटकर घर आया तो धर्मपत्नी धुर्वा ने दरवाजा खोला.. मैंने इधर उधर नजरें घुमाई मेरी निगाहें माँ को ढूंढ रही थी.. धुर्वा से माँ को पूछा तो धुर्वा ने माँ की ओर इशारा किया देखा माँ बरामदे में लगे आराम कुर्सी पर बैठी बालों में लगी … Read more

साथ रहकर अलग होने से अच्छा है अलग रहकर साथ रहें। – सविता गोयल : Moral Stories in Hindi

”  बड़ी भाभी सुना है आपका नया मकान बस बनने को हीं है। अब तो जब अगली बार आऊंगी तो लगता है आपके पास अलग से हीं आना पड़ेगा । बुलाएं तो गीं ना मुझे ??? ,,  ममता अपनी बड़ी भाभी रीति से बोली लेकिन उनकी बोली में एक तंज था। या फिर शायद अपने … Read more

बेचारी..? कौन बेचारी..? – रोनिता : Moral Stories in Hindi

सुना है मनोज…. हमारे पड़ोस के वर्मा जी के बेटे का तलाक हो रहा है… यह तो होना ही था… रोज-रोज के झगड़ों से अच्छा है कि एक ही बार में अलग हो जाए… आशा जी ने अपने बेटे मनोज से कहा  मनोज:   अच्छा..? पर अतुल भैया और सीमा भाभी तो बड़े खुश दिखते … Read more

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