तुम दिन भर करती क्या हो – मनीषा भरतीया : Moral Stories in Hindi

सुजाता मेरी नीले रंग की शर्ट कहां है, अलमारी में दिखाई नहीं दे रही??? मैंने तुम्हें परसों ही बताया था, ना कि मेरी हिंदुस्तान क्लव में विदेशी क्लाइंट के साथ मीटिंग है|……  फिर तुमने मेरी शर्ट इस्त्री क्यों नहीं की??? अब बताओ क्या पहनू मैं,मुझे कोट के साथ वही मैचिंग शर्ट पहननी थी | तुम … Read more

माँ बोझ हो गई इसलिए छोड़ कर जाना चाहते हो? – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“मैं कह रही हूँ ना तुम लोगों से मुझे खाना नहीं खाना…. ले जाओ ये खाना यहाँ से….. चार पैसे क्या कमाने लगे हैं खुद को बहुत होशियार समझने लगे हैं… माँ की तो कोई फ़िक्र ही नहीं है… बस बीबी बच्चा यही इनकी दुनिया है।” सुनंदा जी ग़ुस्से में धमकियाते हुए बेटा बहू से … Read more

रिश्ते भी बिकते हैं.. – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

उसने  अद्वैत से पूछ ही लिया कि आखिर मुझमें क्या कमी हैं? ” अद्वैत और  आलिवा की शादी धूमधाम से हुई.। आलिवा बहू बन, अलकनंदन  निवास में प्रवेश कर गई.। सासुमां अलका ने बेटे -बहू की आरती  कर, गृहप्रवेश कराया।अलका जी के दो बच्चें अद्वैत और ऐश्वर्या थे.। ऐश्वर्या छोटी थी, हॉस्टल में रह कर … Read more

बिना प्रेम के कोई किसी की मदद नहीं करता – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

आज सावित्री की बेटी कलेक्टर बन गई… कितनी तपस्या के बाद आज का दिन देखना नसीब हुआ… बेटी ने कलेक्टर बनते ही माँ को बोला, अब तुम काम नहीं करोगी। नहीं पारो एक घर में तो मुझे करना ही है.. कुसुम मैडम को मैं नहीं छोड़ सकती….उनकी बदौलत ही तुम आज कलेक्टर बन पाई हो। … Read more

आखिर कब तक – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

विपुल जी एवं विभा जी अपने दोनों बच्चों के साथ दिल्ली में तीन बेडरूम फ्लैट में रहते थे। बच्चे क्रमशः बेटा मितेश बारह वर्षीय एवं दस वर्षीय बेटी मिताली । दोनों ही बच्चे स्कूल में सातवीं  एवं पांचवीं कक्षा में  पढ़ रहे थे। आज की इस महंगाई के जमाने में उच्चमध्यवर्गीय परिवार के सामने दोहरी … Read more

घर_वापसी – निभा राजीव निर्वी : Moral Stories in Hindi

अवधेश बाबू और निर्मला जी पुत्र उदित के साथ जब घर के द्वार पर पहुंचे तो बहू कनक सर पर पल्लू डाले आरती का थाल लिए उनके स्वागत को मुस्कुराती हुई खड़ी मिली। दोनों की आरती करने के पश्चात कनक ने उनके पांव छूते हुए उन्हें आदर सहित अंदर बुलाकर बिठाया। शीघ्र ही उन दोनों … Read more

सीख – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

      साधारण सी मध्यम वर्गीय संयुक्त परिवार में पली बढ़ी संयुक्ता ने मेहनत कर मेट्रोसिटी के नामीगामी कंपनी में अपनी जगह बना ली थी । और स्वतंत्र विचारों वाले एक संपन्न परिवार में निखिल से संयुक्ता की शादी भी हो गई थी ।       शादी के पहले वर्षगांठ पर सास ससुर ने संयुक्ता के मम्मी पापा को … Read more

*निःशब्द रिश्ते* – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

 भाई रमेश तुमने नोट किया,जबसे माँ बीमार पड़ी है, तब से नयना ने यहां जल्दी जल्दी आना शुरू कर दिया है।         बस सुरेश तुमने कह दिया जबकि मेरे मन मे ये बात पहले से ही थी।         माँ के तो अब चला चली के दिन है,ये घर और प्लाट पिता छोड़ कर गये हैं।नयना कहीं हिस्से … Read more

क्या समझौते सिर्फ पत्नियां करती है ? – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” क्या बात है रिया आज ऑफिस आने में देर हो गई तुम्हे ?” रिया की सहेली प्रतीक्षा ने उससे पूछा। ” हां यार बस थोड़ी देर हो गई घर से निकलने में ये शादी नाम की घंटी गले में लटकाई है ना उसके कुछ तो साइड इफेक्ट्स होंगे ही !” रिया गुस्से में बोली। … Read more

बेटा, तूने घर-वापसी में बहुत देर कर दी। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

बेटा, सब कुछ रख तो लिया, कुछ छूट तो नहीं गया? गीता जी ने भारी मन से पूछा, और अपने आंसू छुपा लिए। हां, मम्मी सब कुछ रख लिया  है, आप फ्रिक मत कीजिए, फिर कोई सामान छूट भी गया तो, बाहर से नया खरीद लूंगा, वैसे भी हमारे शहर में इस शहर से अच्छी … Read more

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