“ममता की कोई कीमत नहीं – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा
हम लोग दूसरे जगह शिफ्ट हो रहे थे l सारा सामान पैक हो चुका था….कुछ हो रहा था….गाड़ी दरवाजे पर लगी थी ताकि हमलोगों को जाने में देरी ना हो जाए l. मैं बार -बार ताई को आवाज दे रहीं थी कि वो जल्दी से बिट्टू को दूध पीला दे…मुझसे वह ढंग से नहीं पी … Read more