जैसा तुम ठीक समझो – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

जावित्री और सुकेश पति-पत्नी बन कर फूले नहीं समा रहे थे। 7सालो की जान-पहचान के बाद अब कहीं जाकर शादी हो पाई थी। वहीं सुकेश का किसी और जाति होना तथा जावित्री का उनके स्टेटस का न होना शादी में बांधा बन रहा था। जावित्री के नाना सुकेश की दूसरी जाति की वजह से परेशान … Read more

“सुझाव” – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

बनारस की राइशो में एक नाम ठाकुर बलवंत सिंह का था। वह अपनी शानो-शौकत तथा रुतबो के लिए जाने जाते।   बलवंत की मां कमला बहुत ही बुद्धिमान तथा गंभीर महिला थी ।  बलवंत सिंह अपनी मां की बहुत इज्जत किया करते । इनके दो पुत्र बड़ा बेटा गोपाल और छोटा गोविंद । पत्नी दुर्गा बोले … Read more

“नज़ाकत रिश्तों की” – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

“कान खोल कर सुन लो तुम दोनों! नीमा और दामाद जी राखी पर आ रहे हैं कोई कमी ना होनी चाहिए!और बहू जी तुम? तुम तो अपनी कंजूसी अपने घरवालों के लिए ही बचा के रखना !मेरी बेटी की आवभगत खूब अच्छी तरह होनी चाहिए बस!” मयंक तुम आज ही जाके बैंक से पैसे निकाल … Read more

पीढ़ियों का अंतर – के कामेश्वरी : Moral Stories in Hindi

अलार्म के बजते ही सोनाली की नींद खुल गई । उसे लगा कि पाँच मिनट और सो जाती हूँ फिर लगा कि नहीं एक मिनट देरी की तो सारे काम पीछे हो जाएँगे और ऑफिस के लिए लेट हो जाऊँगी सोचकर अलसाए हुए शरीर को लेकर बाथरूम की तरफ़ फ्रेश होने के लिए बढ़ी । … Read more

सिर्फ़ बहु से बेटी बनने की उम्मीद क्यों ?? : Moral Stories in Hindi

सुबह -सुबह घर की घंटी बजी , देविका ने दरवाजा खोल कर देखा तो सामने शर्मा ऑन्टी थीं।  उसने अभिवादन कर उन्हें बैठाया।  तभी उसकी सासूमाँ सरिता जी भी अपने कमरे से बाहर आकर हॉल में बैठ गयी।  दोनों बातें करने लगी।  देविका चाय-नाश्ता लेकर हॉल में पहुँची तो उसकी सास हर बार की तरह … Read more

बहू और बेटी खिलखिलाती ही अच्छी लगती है – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

ऑफिस में नये साल पर मॉल में खुले नये रेस्टोरेंट में लंच होना तय किया गया,साल का पहला दिन, सुबह सबको मुबारकवाद देने में गुजरा और दोपहर में लंच के लिये ऑफिस के कुलीग के संग सुधाकर जी भी मॉल पहुंचे। पार्टी के दौरान सुधाकर जी क़ी नजरें कोने में बैठे लाल रंग क़ी जैकेट … Read more

सास ससुर की सेवा का थोड़ा पुण्य तो बेटे को भी कमाने दो मां – सविता गोयल। : Moral Stories in Hindi

” मांजी, वो कल मम्मी को चेकअप के लिए ले कर जाना है। पापा की तबियत भी ठीक नहीं है तो क्या मैं कल अपने मायके चली जाऊं??” रेणु ने अपनी सासु माँ सुभद्रा जी से इजाजत मांगते हुए कहा। रेणु की मायके जाने की बात सुनते ही सुभद्रा जी का मुंह बन गया । … Read more

अनजान लड़की – नेकराम : Moral Stories in Hindi

अम्मा मैं शहर में पहुंच चुका हूं 2 दिन से नौकरी ढूंढ रहा था मगर नहीं मिली लेकिन मुझे एक ऑटो मालिक मिल गया उसने मुझ पर तरस खा कर मुझे ऑटो किराए पर चलाने के लिए दिया है ऑटो का भाड़ा भी बहुत कम है अब मैं बहुत पैसा कमा लूंगा और अपने गांव … Read more

सुनिये सबकी करिये मन की – संगीता त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

चित्रा के घर किट्टी पार्टी थी। फरवरी का महीना था, वैलेंटाइन वीक चल रहा था तो किट्टी की थीम भी वही थी। रोज डे पर सबको लाल ड्रेस पहनना था। सब लोग सज धज कर आ गये सिर्फ काव्या अभी तक नहीं आई। उसका इंतजार करते हुये सब गपशप कर रहे थे तभी गुस्से से … Read more

अपनों का साथ – सुनीता परसाई, : Moral Stories in Hindi

रोहन माता-पिता का इकलौता दुलारा बेटा था।माता-पिता खेती करके गुजारा करते थे।जमीन थोड़ी-थोड़ी बेचकर हर साल उसकी इंजीनियरिंग कालेज की फीस जमा करते थे।इसी आशा से कि चार साल बाद सब ठीक हो जायेगा। बेटा होनहार था ।पढ़ाई समाप्त होने के पहले ही उसे अमेरिका में अच्छी नौकरी मिल गयी। माता- पिता ने सोचा विदेश … Read more

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