सड़क की बंजारन – नेकराम : Moral Stories in Hindi

सीतामड़ी अपने मोहल्ले का एक धनवान व्यक्ति था घर में एक सुंदर सी पत्नी कौशल्या थी और एक सात बर्ष की काव्या नाम की पुत्री थी सीतामड़ी हमेशा ही गरीबों से दूरी बनाकर रखता था उसे गरीबों से बहुत नफरत थी उसके आंगन में चमचमाती एक सफेद रंग की कार हमेशा खड़ी रहती थी चांदनी … Read more

खुश रहने को एक वजह काफी है । – संगीता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

” क्या बात है पल्लवी आजकल बड़ी सुस्त सी रहती है तू ऑफिस में ….सब ठीक तो है ना?” चाहत ने पूछा। “हां चाहत बस सब ठीक ही है!” पल्लवी फीकी हंसी हंसते हुए बोली। ” चल कैंटीन में चलकर एक एक कप काफी पीकर आते है!” चाहत उसका हाथ पकड़ कर बोली। ” नहीं … Read more

हर कन्या माता का रूप – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मां जल्दी बाहर आईए, देखिए मैं किन्हें साथ लेकर आया हूं, बंटी की आवाज सुनकर मां बाहर दौड़ी हुई आई और देखा 12 साल के बंटी के  साथ में 8-10 छोटी-छोटी गरीब घरों की लड़कियां थी, अरे.. इन्हें कहां से उठा लाया, मैंने तुझे कन्याओं को लाने को कहा था और तू नीचे बस्ती में … Read more

रिश्तो में गलतफहमी की गुंजाइश न हो – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

क्या बात है चारु…  आज तुमने अपनी भाभी को जन्मदिन का ना कोई मैसेज भेजा ना फोन किया और न हीं स्टेटस लगाया, तुम्हारी तबीयत तो ठीक है या फिर कुछ भाभी से अनबन हो गई, रितेश ने अपनी पत्नी चारु से पूछा! नहीं तो.. ऐसी तो कोई बात नहीं है बस मन नहीं किया … Read more

“रिश्तों में बढ़ती दूरियाँ” – समिता बडियाल : Moral Stories in Hindi

`सलोनी और सोमेश, अजीत और गीता के दो बच्चे थे। दोनों होनहार और पढाई में अब्बल। संस्कार तो कूट -कूट कर भरे थे। कभी पलटकर जबाब नहीं देते सलोनी नाम के जैसे साँवले रंग की , तीखे नैन -नक्श , कमर तक लम्बे बाल, आँखों में हल्का सा काजल। बहुत सुंदर लगती। माँ गीता तो … Read more

*अनुभूति* – मधुलता पारे : Moral Stories in Hindi

मंदिर की घंटियों की आवाज से अन्विता की नींद खुली देख कमरे में झकाझक उजाला फैला था । उसकी कल की थकान अभी तक नहीं उतरी थी। पर बहुत काम पड़ा था पर उठना जरूरी था। असल में रवि का ट्रान्सफर प्रदेश की राजधानी में प्रमोशन पर हुआ था। कल ही वे लोग इस घर … Read more

खुशियों के दिये – सुधा शर्मा : Moral Stories in Hindi

 कितना खूबसूरत है चारों तरफ रोशनी का नजारा ।कमला ने  शिवनाथ जी को शाल उढाते हुए कहा ,” अन्दर चलो , ठंड होने लगी है ।” “थोडी देर बैठो यहीं , कितनी सुन्दर रोशनी करी है सब ने   ।परसों  दीवाली है , कल मै भी थोड़ी सी लाइट लगा लूँगा ।”       ” मन नहीं … Read more

बेटी बना कर रखूंगी – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

कहते हैं  ताली एक हाथ से नहीं बजती, दोनों हाथों का उपयोग करना जरूरी होता है ठीक वैसे ही सिर्फ बहू से ही बेटी बनने की उम्मीद करना एक असफल प्रयास है क्योंकि जब तक पूरा परिवार उसे बेटी नहीं  मान लेगाऔर बेटी के समान ही उससे व्यवहार नहीं करेगा तब तक बहु-बहु ही रहेगी … Read more

सॉरी- भैय्या – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

          पहली बार मेरे बचपन के घनिष्ठ मित्र प्रियांशु के भाई का फोन आया।स्वाभाविक रूप से आश्चर्य हुआ।मैंने पूछा आकाश सब ठीक है ना।मैं पहली बार तुम्हारा फोन सुन रहा हूँ।       आकाश बोला  नही भाईसाहब कुछ ठीक नही है।मुझे लगा कि भाइयो का जमीन जायदाद के बंटवारे का  झंझट होगा।फिर भी मैंने कहा कि क्या हुआ … Read more

कच्चे धागे से बुने रिश्ते – संजय मृदुल : Moral Stories in Hindi

सुनो अखिल! अब तुम्हें मेरा हालचाल पूछने के लिए आने की जरूरत नहीं है, तुम्हारे पापा है मुझे सम्हालने के लिए। जब हमें तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम्हे नहीं लगा कि यहां होना चाहिए तुम्हें, तो अब रोज यूँ आकर दिखावा मत करो। अखिल ने कुछ कहना चाहा, पर माँ ने चादर ओढ़ कर करवट … Read more

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