भोर – रश्मि झा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

“…पापा प्लीज हमें छोड़कर मत जाइए…!” ” यह बात अपनी मां से कहो… उसी ने तो मुझे जाने को कहा है… !” “नहीं पापा… प्लीज पापा…!” बोलते हुए दोनों बच्चियां पापा के पैरों में झूल गईं…  धैर्य ने परी और मीरा दोनों को खुद से अलग किया, और अपने कमरे में जाकर अपना जरुरी सामान … Read more

और दूरियाँ मिट गई – ज्योति आहूजा : Moral Stories in Hindi

सूरज की हल्की रोशनी प्राची के कमरे में धीरे-धीरे फैल रही थी। अलार्म की घंटी बजी और 45 साल की प्राची उठ गई। कुछ साल पहले उसके पति गुजर चुके थे, और तब से घर की सारी जिम्मेदारियाँ उसके कंधों पर थीं। बेटी नेहा की परवरिश, घर का खर्च, ऑफिस का काम — सब कुछ … Read more

देवकी – अभिलाषा श्रीवास्तव :

 Moral Stories in Hindi “चाची नहीं छोटी माँ है आप हमारी” कहते हुए किशन अपनी नई नवेली चाची के गोद में बैठ गयें तो दिपा निश्छल प्रेम से देखतीं रहीं अमर सिंह के परिवार में नई बहू के रूप में साक्षात गृहलक्ष्मी आ चुकीं थीं अत:बिना किसी कलेश के दोनों बेटों का परिवार हंसी खुशी … Read more

दो चेहरे-मनीषा सिंह

“मां •••!मुझे डर लग रहा है प्लीज अगर हो सके तो पापा को यहां भेज दिजीये•• ताकि मैं उनके साथ चली आऊ!  रात के 12:00 बजे कली अपनी मां को फोन लगाती है परंतु उधर से कोई जवाब न मिल पाने के कारण वह घबरा जाती है और पुनः काट कर डायल करती है। हेलो-हेलो-हेलो! … Read more

हाँ मैं हूँ सावित्री – बालेश्वर गुप्ता

   आपकी आंखों में आँसू मैं देख नही पाती, उपेंद्र तुमने अपना जीवन खुद जिया है, बनाया है तो क्यों इतना कमजोर होते हो?सुनो मैं हूँ ना,तुम्हे यमराज के हाथों से भी छीन लाउंगी।बस तुम हिम्मत मत हारो।      मालती के कहे शब्दो का असर ही था कि एक माह बाद  उपेंद्र ने आंखे खोल भरपूर दृष्टि … Read more

“और दूरियां मिट गई” – ज्योति आहूजा

सूरज की हल्की रोशनी प्राची के कमरे में धीरे-धीरे फैल रही थी। अलार्म की घंटी बजी और 45 साल की प्राची उठ गई। कुछ साल पहले उसके पति गुजर चुके थे, और तब से घर की सारी जिम्मेदारियाँ उसके कंधों पर थीं। बेटी नेहा की परवरिश, घर का खर्च, ऑफिस का काम — सब कुछ … Read more

काली रात – अर्चना खण्डेलवाल

रश्मि इस वक्त तेरा पार्टी में जाना सही नहीं है, तेरे पापा भी घर पर नहीं है, और अगर कल को कुछ हो जाता है तो पापा मुझे बहुत ही डांटेंगे, मैं उनसे पूछे बिना तुझे जाने की आज्ञा नहीं दे सकती हूं, सरला ने समझाकर कहा ताकि रश्मि मान जायें। ओहह!! मेरी प्यारी मम्मी … Read more

आदर्श परिणय – सुनीता मुखर्जी “श्रुति” :  Moral Stories in Hindi

लावण्या टेढ़ी-मेढ़ी गांव की मेड़ पर उछल-उछल कर चल रही थी। अरे लावण्या खेत में कितनी सब्जी हो गई है कुछ तुड़वा लो..!  लावण्या अपनी धुन में इधर-उधर कुछ देख- देख कर चल रही थी। अम्मा की बात सुनकर लावण्या भी खेत से भिंडी तरोई और टिंडे तुड़वाने में मदद करने लगी।  लावण्या बहुत खूबसूरत … Read more

काली रात – मधु वशिष्ठ :  Moral Stories in Hindi

मेरी उपस्थिति शायद किसी को महसूस ही नहीं हो रही थी। तीनों बहनें चाचा जी के बेटे से गले मिलकर रो रही थी, भैया यह कैसी काली रात आई हमने तो अपने पिता को ही खो दिया और वह चाचा जिनको कि पिताजी और माता जी सौ सौ गालियां देते थे कि इन्होंने दादा जी … Read more

काली रात – गीता अस्थाना :  Moral Stories in Hindi

हीरालाल जी बड़े ही गर्म मिज़ाज और थोड़े झगड़ालू स्वभाव के व्यक्ति थे।आए दिन मुहल्ले में उनकी क्रोधपूर्ण आवाज़ सुनाई पड़ जाती थी। कभी पत्नी से बहस करते हुए, कभी बच्चों को डांटते हुए या कभी अपने किसी किरायेदार से झड़प करते हुए। आसपास के लोगों के लिए एक तमाशे का माहौल बन जाता था। … Read more

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