टाइमपास – कंचन शुक्ला

आभा!!  हाँ, यही नाम था उसका। जिसकी तारीफ़ में, मैं कलमें पढ़ा करता था। बारिश के मौसम की तरह शीतल, शांत तो बिल्कुल भी नही। उसी मौसम की तेज़ हवाओं सी चंचल, मदमस्त और अनन्य ऊर्जा से परिपूर्ण। मन के भावों को कभी समेटती कभी बिखेरती। पढ़ीलिखी, समझदार परंतु फिर भी सरल। सौम्यता की खान, … Read more

प्यारे अमित – गरिमा जैन 

  बहुत दिन हुए तुमसे कोई बातचीत नहीं हुई ।पहले तुम्हें जब मन फोन कर लिया करती थी पर अब वो अपनापन नहीं लगता कि जब चाहू तुमसे बात कर लूं इसलिए तुम्हें आज एक पत्र लिखने बैठ गयी। ऐसे तो यह बीते जमाने की बात हो गई पर कहते हैं ना कभी  कभी पुरानी बातें … Read more

विम्मो बूआ … सीमा वर्मा

विम्मो तो हम उन्हें प्यार से बुलाते हैं  उनका पूरा नाम था विमला । जब कभी मैं जाड़े के दिनों मे हौस्टल से घर वापस आती वे अम्मा के कहे अनुसार अंगीठी सुलगा कमरे में रख जाती सारा कमरा धुएं से भर जाता मेरी आंखें कड़वा जाती और मैं चिल्लाती ,  ” जल्दी बाहर कर … Read more

अपशकुन – मिन्नी मिश्रा

 मेरा मन उदास था। घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। पतिदेव को आफिस विदा करते ही एक विचार आया , क्यों नहीं सहेलियों से मिलकर मन को हल्का किया जाय ।झट वार्डरोब खोलकर ड्रेस निहारने लगी | लाल कोर वाली हरी सिल्क साड़ी दिखी। अरे वाह ! यह साड़ी दादाजी ने शादी की पहली साल-गिरह … Read more

अतृप्त – सरिता गर्ग ‘सरि’

नारी -मन की संवेदना की अछूती कहानी           उस रात  उसकी सुगन्धित देह को घर्षण और चोट से रौंदता वो आनंद पाता रहा और वो ठंडी और निष्प्राण चादर -सी ,वक्त की सिलवटों से मुड़ी -तुड़ी बिस्तर पर बिछी रही । इसी तरह वो हर रात रौंदी जाती रही,उस पर बलात्कार होता रहा,फिर भी वो मुस्कुराती … Read more

बर्बाद हुआ घोंसला – नेहा मिश्रा ‘नेहू’

आज लता की शादी के 2 महीने पूरे हो गए। गरीबी के कारण उसके माता-पिता ने उसकी शादी एक ऐसे इंसान से की जिसकी पहली औरत स्वर्गवासी हो गई थी। पर उसे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता वह तो अपनी शादीशुदा जिंदगी से बहुत खुश है। हालांकि उसके पति की पहली बीवी से … Read more

और कोहरा छँट गया – नीरजा कृष्णा

मीता घर के पास के एक छोटे से नर्सिंग होम में भर्ती थी…..कल रात को ही उसने एक प्यारी सी गु़ड़िया को जन्म दिया था..बहुत कोशिश के बाद भी सामान्य प्रसव    सम्भव नहीं हो पाया था…आँख खुली तो दाई की बेटी को बैठा पाया….मीता ने उससे नन्हीं गुड़िया एवं घर के अन्य लोगों के … Read more

पुनर्प्रतिष्ठा – दीप्ति मित्तल

बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई. सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ आई थी. शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें … Read more

“ईर्ष्या बनी औजार” –   सीमा वर्मा

अंधेरी रात। साढ़े आठ के करीब बिहार प्रांत के किसी शहर के पास किसी कस्बे में जहाँ शाम में ही रात का सन्नाटा पसर जाता है। आवाज आ रही है एक सफेद रंग से पुते चार कमरों वाले घर से। घर की दो बहुएँ हैं हीरा और नीरा जो आपस में सगी बहनें भी हैं। … Read more

 बारिश ने बना दी बात – ऋतु अग्रवाल

   आयुषी कल से बहुत परेशान है। जबसे मम्मी ने बताया है कि कल लड़के वाले उसे देखने आ रहे हैं तब से वह मन ही मन ना जाने क्या-क्या तिकड़में लगा रही है पर मम्मी भी उससे एक कदम आगे हैं। मतलब वह डाल डाल तो मम्मी पात पात।     अब आप सोचेंगे कि आयुष इतनी … Read more

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