रोज़ डे* – *नम्रता सरन “सोना”

“दीदी,अब जाऊं मैं, बहुत देर हो गई है, राजू के बापू भी घर आ गए होंगे” कामवाली रत्ना ने रात होते देख पूछा। “क्या यार, कभी कभी तो रोकती हूं तुझे, आज इनके कुछ दोस्त आने वाले हैं, इसीलिए तुझसे थोड़ा ज़्यादा काम करवा रही हूं, तू चिंता मत कर,अलग से पैसे भी दे दूंगी” … Read more

रोती  आंखें –  मंजु मिश्रा

……………. अमिता की आंखे द्वार की ओर यूं लगी थी जैसे अभी उसका पूरा परिवार आकर उसे अपने घेरे में ले लेगा और वो निहाल हो जाएगी।पंद्रह दिन पूर्व रजत की मृत्यु के पश्चात पंद्रह दिन बाद आज सुबह ही सब अपने अपने घरौंदों में लौट गए।             उसे अपनी विवाह की पहली रात याद आयी … Read more

अपना कौन – मंजु मिश्रा

ये कहानी लगभग 1966 -67 की है।भीषण अकाल पड़ा था।लोग जिस अनाज को पशुओं को खिला देते थे,उसे साफ कर स्वयं खाने को मजबूर थे।दालों के बचे हुए महीन टुकड़ों की रोटी और चावल की कनकी को उबाल कर पीने को मजबूर थे लोग। जिनके पास पिछले वर्ष का अन्न बचा था,उन्हें ही कुछ राहत … Read more

मरघट – काव्या शर्मा

रात के करीब 9 बजे थे। मरघट का माहौल बहुत डरावना था  एक तरफ एक औरत को लाश जल रही थी। वही दूसरी तरफ एक कुछ लोग झाड़ियों में कुछ छिपा रहे थे। पता नही कैसा मन था उन लोगो जो जीते जागते जीव को कब्रिस्तान में छोड़ गए।  एक तरफ वो रूह तडफ रही … Read more

अपमान का बदला – चन्द्रकान्ता वर्मा

श्यामू नाम का एक बड़ा प्यारा बच्चा था। उसके मां-बाप बचपन में ही एक दुर्घटना में मर गए थे। श्यामू के मामा उसे अपने पास ले आए थे। मामी को वह रत्ती भर ना  सुहाता। वह बच्चे से कभी मीठे बोल ना बोली। घर के सारे काम वह उससे से कराती। हमेशा उसका अपमान करतीं … Read more

 कंजूस ‘ – विभा गुप्ता

  शिवचरण बाबू अपने पोते के जन्मदिन के उपलक्ष्य में अपने घर में पार्टी दे रहें थें।अपने नाते-रिश्तेदारों के साथ-साथ उन्होंने अपने सभी मित्रों को भी आमंत्रित किया था।मित्र आश्चर्यचकित थें कि हमेशा कम खर्च करने वाला ये कंजूस आज पार्टी कैसे दे रहा है।       केक कट जाने के बाद शिवचरण बाबू के मित्र जब भोजन-स्थल … Read more

काश! – कंचन श्रीवास्तव 

ठंडी पड़ी पत्नी को कोसता हुआ रमेश करवट बदल सो गया।पर क्यों आखिर क्यों कोस रहा है उसको क्यों नहीं कारण खोजने की कोशिश कर रहा ,आखिर पहले तो ऐसी नहीं थी। गर ऐसी होती तो शादी के बाद से ही उसका दीवाना बना न फिरता। ये वही रमेश है जिसने दिन को दिन नही … Read more

 हाथ जोड़कर किया अपमान – गुरविंदर टूटेजा

 बड़ी ननद का आठवी में थी तब से ही आना-जाना था परिवार में चाचा-चाची से बहुत बनती थी तो जब छोटे भाई को देखा…तो चाचाजी ने कहा कि नीतू बिन मां-बाप की बच्ची है आप अपने भाई से रिश्ता कर लो और उन्होनें शादी करा ही दी…!! शादी के दो साल बाद चाचाजी की बेटी … Read more

  मान-सम्मान-अपमान –  अरुण कुमार अविनाश

“जीजा जी, एक रिक्वेस्ट थी।”– सूरज बाबू ने मोबाइल फोन पर कहा। “जी बोलिये।”– आशीष जी ने छोटे साले की आवाज़ पहचान कर बोला। सूरज बाबू मोबाइल पर भी कुछ देर तक सोंचते रहें कि बात शुरू करें तो कहाँ से करें । दरअसल बात बहुत ही संवेदनशील थी। घर की इज़्ज़त का सवाल था। … Read more

अपमान का बदला कुछ यूँ लिया” – भावना ठाकर ‘भावु’ बेंगलोर

“मत डरो तम घिरी राहों के अंधेरों से, जब अंधेरा होता है तभी हम सितारों को देख पाते है”  कब कौनसी रात का अंधेरा, एक रोशन सितारा लेकर आएगा कोई नहीं जानता। उम्र के कौनसे पड़ाव में, कौनसी घटना हमारी ज़िंदगी का रुख़ मोड़ देगी कुछ नहीं कह सकते। संभावनाओं से भरी ज़िंदगी जब करवट … Read more

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