पश्चाताप के आंसू – डॉ अंजना गर्ग
पूर्णिमा और उसकी पड़ोसन शीला दोनों अपनी मृत्यु के बाद यमराज के सामने पहुंच गई। यमराज ने अपना वही खाता खोला। कुछ पढ़ा और सेवकों को कहा, “इसे 36 नंबर कमरे में ले जाओ।” पूर्णिमा खुश थी कि उसने तो बहुत दान पुण्य किया है इसलिए अच्छी जगह ही यमराज ने उसे भेजा होगा। फिर … Read more