धोखा तो था लेकिन…’ – डॉ. सुनील शर्मा

सीमा और राकेश की शादी को अभी दो सप्ताह ही हुए थे. विवाह परिवारों तथा एक जानने वाले के द्वारा हुआ था. राकेश किसी कम्पनी में वरिष्ठ अधिकारी के पद पर था. सीमा ने तो एम बी ए करके अभी ज्वाइन ही किया था. देखने में राकेश काफी हैंडसम था. सीमा से पहली मुलाकात एक … Read more

प्रणय त्रिकोण एक “धोखा” – भावना ठाकर ‘भावु’

देख विनी मैं कुछ सुनना नहीं चाहती, अगर तू नहीं आई तो मैं शादी के मंडप में नहीं बैठने वाली कह कर तानी ने फोन रख दिया। फ़ेशनडिज़ाइनिंग का कोर्स करने अमरिका गई विनी का अभी 6 महीने का कोर्स बाकी था, पर अपनी प्यारी बहन तानी की ज़िद के आगे झुकना पड़ा तो विनी … Read more

रंग बदलती जिंदगी – संगीता त्रिपाठी

 उफ़्फ़..पीड़ा की एक लहर आई और उसे माँ की याद दिला गई।ऐसे ही माँ भी पीड़ा से गुजरी होंगी। दिलजोत सोच रही थी।पहले कहाँ भान हुआ था, स्त्री के जज्बातों की। वो तो लाडली बेटी थी। माँ, पापा और चाची की।   दिलजोत के पापा दो भाई थे, दोनों में बहुत प्यार था। चाचा मुखविंदर को … Read more

चुनौती – बेला पुनीवाला

एक औरत के लिए सब से बड़ी चुनौती का वक़्त तब आता है, जब उसे अपने पति और बच्चों में से किसी एक को चुनना होता है।              ऐसा ही कुछ हमारी कहानी की नमिता के साथ हुआ है। नमिता एक हाउस वाइफ है और उसके पति निशांत किसी बड़ी कंपनी में जॉब करते है। एक … Read more

पापा,, काश शादी के पहले आपने दूसरों पर भरोसा ना करके खुद तसल्ली की होती – नीतिका गुप्ता 

आज फिर सुबह से ही पड़ोस वाले घर से नई बहू के चीखने चिल्लाने की आवाज आ रही थीं,, कुछ ही देर में आवाज तेज होती गईं… अब बहू के चीखने के साथ-साथ सामान फेंकने की आवाजें भी आ रही थीं। सपना  समझ ही नहीं पा रही थी कि आखिर माजरा क्या है..?? पड़ोस वाली … Read more

नयनसुख – नीरजा कृष्णा

आज सीमा अपना मोबाइल उनके कमरे में भूल आई थी और सब्जी खरीदने बाहर निकल गई थी। पहले तो उन्होंने बहू को पुकारा पर जब कोई उत्तर नहीं मिला… उत्सुकतावश वो मोबाइल खोल कर गैलरी की फोटो देखने लगी। मयंक और सीमा दोनों बच्चों के साथ एक सप्ताह के लिए भूटान गए थे। कल ही … Read more

सपनो की तहरीर – भगवती सक्सेना गौड़

सुबह जैसे ही रवीना की नींद खुली, आज का सपना याद आ गया। वैसे कई बार परेशान रहती थी, सपने में कुछ दखा था, पर याद ही नह आता था। तो आज का सपना उसका बहुत स्वादिष्ट सा था, जो तीस वर्ष पहले की यादों को जीवंत करने पर आमादा था। उसने देखा था, सामने … Read more

“कर्तव्य” – ऋतु अग्रवाल

 “माँ, सुलेखा, देखो आज आप सबके लिए एक सरप्राइज है।” मयंक एक हाथ में मिठाई का डिब्बा और दूसरे हाथ में ब्रीफकेस लिए खड़ा था।        पर वहाँ उसकी बात सुनने वाला कोई ना था। हाथ का सामान टेबल पर रख मयंक माँ के कमरे में गया। माँ आंखें बंद किए लेटी थी।       “माँ! क्या हुआ? … Read more

मजबूर – श्वेता मंजु शर्मा

यह कहानी है मिन्हाज़ और फरहा की। फरहा जहाँ बी कॉम दूसरे वर्ष की छात्रा थी वहीं मिन्हाज़ कंप्यूटर क्लास मे tally सिखाया करता था। एक कॉमन दोस्त के घर दोनों मिले और प्यार हो गया. फरहा ने इश्क का इज़हार कर दिया जिसे मिन्हाज़ ने मंजूर किया । बहुत सारी बातों के अलावा एक … Read more

शोभा – दर्शना जैन

श्यामा जी की ना कोई बेटी थी न ननंद, उन्हें बेटी की कमी बहुत खलती थी। उनकी बड़ी बहू तनु जब गर्भवती हुई तो पोती पाने के लिये उन्होंने शहर के मंदिरों में माथा टेक मन्नत मांगी, दरगाह पर चादर चढ़ाई, चर्च में मोमबत्तियाँ जलाई। दिल से मांगी मन्नत पूरी होती है, जब बहू को … Read more

error: Content is protected !!