“कपूत” – डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा

सर ,बाहर एक नव-युवक काफी देर से आश्रम के दरवाजे पर बैठा है। वह आपसे मिलना चाहता है । कहिये तो बुला दूँ उसे…..। ऐसे कैसे किसी को भी ऑफिस के अंदर बुला लोगे तुम? सर, मैं दस बार उसे कह चुका हूं पर वह जिद पर अड़ा है आपसे मिलने के लिए। जाकर पूछो … Read more

“बेबस पिता” – सीमा वर्मा

यह कहानी मेरी है।  मैं बाबू ‘ दीनदयाल शर्मा’  प्राथमिक विद्यालय का रिटायर्ड टीचर हूं। मेरी दो संतानें एक बेटा ‘सुप्रिय’ और दूसरी बिटिया ‘रूपा’ जिसकी शादी कानपुर शहर में मध्य वित्त परिवार के सरकारी मुलाजिम बेटे से मैंने अपनी ऐक्टिव सर्विस में ही कर दी थी। लेकिन उसकी बदकिस्मती या इसे किस्मत का खेल … Read more

 ” आ, अब लौट चलें” (भाग-2) – नीति सक्सेना      

सुबह पांच बजे तैयार होके सुरेश जी ने अमित के बेडरूम का दरवाज़ा खटखटाया।अमित ने आंखें मलते हुए दरवाज़ा खोला तो पाया कि मां ,पापा दोनों हाथ में अटैची और बैग लेकर तैयार खड़े थे। ” हम गांव वापस जा रहे हैं बेटा,सोचा जाते वक्त तुमको बता तो दें ताकि तुम  मुख्य दरवाज़ा अंदर से … Read more

सखी का घरौंदा – निभा राजीव “निर्वी”

विधि और सुमन का फ्लैट एक ही अपार्टमेंट में आमने-सामने था। विधि के पति बैंक में अधिकारी थे जबकि सुमन के पति एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में कार्यरत थे। दोनों परिवारों में बहुत गहरी मित्रता थी या यूं कहिए कि एक परिवार के जैसी घनिष्ठता थी। आए दिन दोनों परिवार एक ही जगह एकत्रित हो जाते … Read more

समय रहते – आभा अदीब राज़दान

” क्या बात है नयना तुम्हारी तबियत तो ठीक है ।” नारायण ने पत्नी से पूछा था । ” मेरी तबियत सही है लेकिन आप ऐसे क्यों पूछ रहे हैं ।” वह बोली । ” नहीं मैं देख रहा हूँ तुम अपनी माँ से अब बहुत स्नेह से बात करती हो । यही तरीका है … Read more

धोखे का समाज – नेकराम

कौशल्या ने सुबह अपने बेटे अक्षय को बिस्तर से उठाते हुए कहा  ,, आज दोपहर को लड़की वाले तुम्हें देखने आ रहे हैं   ,,  जल्दी बाथरूम में जाकर नहा ले ,,  और सुन ,, चेहरे पर यह इतनी बड़ी-बड़ी दाढ़ी मूछें क्यों रखी है ,,  क्या तुम्हें बाबा रामदेव का चेला बनना है सर … Read more

चोरी – भगवती सक्सेना गौड़

ससुराल में शादी थी, अक्षय का जाना जरूरी था। वो अलग बात है कि घर में भी उसके पापा की तबियत नासाज थी। पर पत्नी रवीना को नाराज नही करना चाहता था। नियत दिन ससुराल के लिए पत्नी के साथ चल पड़े। माँ, पापा को घर छोड़कर ही गए थे, दोनो का बुढ़ापा था, वैसे … Read more

मेरी बेटियां मेरा अभिमान –

“क्यूं रे सुरेसवा !इन छोरियों को पढ़ा लिखाकर कलेक्टर वनावेगा क्या?टैम रहते ब्याह दे ना तो कोई दिन नाक कटवा कै हाथ मैं धर दैंगी!फिर ना कहियो अम्मा ने समझाया ना था”सुरेश की अम्मा को पोतियों का स्कूल जाना एक आँख नहीं भाता था।सुरेश हंसकर अम्मा की बात को टालता सा बोला“मेरे घर की शान … Read more

एकादशी का व्रत – नीरजा कृष्णा

आज माँ बाउजी अमेरिका से लौट रहे हैं। तीन महीने वहाँ भैया भाभी के पास थे। दिलीपजी उन्हें रिसीव करने पटना से गए थे। आधी रात को उनकी फ्लाइट आई और वो बगल में एक होटल में ठहर गए थे। “अरे अम्मा! तुम तो बहुत स्मार्ट हो गई हो। पूरा विदेशी रंग चढ़ा हुआ है।” … Read more

*अंतिम मुलाकात*- मुकुन्द लाल

दोमंजिला मकान के पास टैक्सी रुकते ही रंजना उस मकान के अन्दर प्रवेश कर गई, फिर वह सीधे अपनी माँ गायत्री के पास पहुंँच गई। उसके पीछे-पीछे उसकी भाभी महिमा भी चली आई।  “कमरे में अंधेरा है दिन में भी।”  “प्लग में कुछ खराबी आ गई है, मिस्त्री कल बना देगा, मैं जाती हूंँ कैंडिल … Read more

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