बुढ़ापे का असली सहारा न बेटा न बेटी बल्कि बहू होती है – प्रतिमा श्रीवास्तव
जिस बहू को हमेशा से अपने ही घर में परायों सी जिंदगी गुजारने को मजबूर कर दिया जाता है वही बहू अपनी जिम्मेदारियों को निभाते – निभाते हर कदम पर ये साबित करती है की ये ही उसका परिवार है लेकिन फिर भी उसे वो स्थान या सम्मान कभी नहीं मिलता जो बेटी – बेटा … Read more