खुशियों का आधार परिवार – नंदिनी

महक जैसा नाम वैसी ही थी, आसपास सबको महका कर रखती थी। चलबुली ,पढ़ाई में होशियार जिंदादिल हर काम मे सबसे आगे अपनी दो बड़ी बहनों की लाड़ली बहना  तीनों की जान एक दूसरे में बसती थी ,उनका ये परिवार उनकी सारी दुनियां थी।  महक को पड़ने का शौक शुरू से था, जीवन में कुछ … Read more

बुलावा आया है – स्मिता टोके ‘पारिजात’

बालों की पफ वाली चोटी, साँवली रंगत, मझौला कद, हमेशा चहकते रहने का स्वभाव मिनी विशेषताएँ थीं । वो पटर पटर करती थी या उसके मुख से फूल झरते थे ये  विभेद करना सिर्फ भाषायी सौंदर्य की अलग-अलग परिभाषाएँ हो सकती हैं। मेन रोड़ से अंदर जाने पर शॉपिंग कॉम्प्लेक्स वाला बड़ा सा प्लॉट पर … Read more

परिवार का महत्व  – पुष्पा जोशी

घर की बालकनी में बैठी दीपा जी अपनी सूनी उदास धंसी हुई ऑंखों से कभी आसमान की ओर देख रही है, तो कभी उनके नये आए किराएदार के परिवार को देख रही है.ऑंखों के नीचे स्याह झाई पढ़़  गई है,चेहरे और हाथ पैर पर झुर्रियाँ, बालों की सफेदी उम्र को दर्शा रही है, चेहरे की … Read more

“यादों की अलमारी” – कविता भड़ाना

बात थोड़ी पुरानी है हम जिस कॉलोनी में रहते थे वहां के सभी परिवारों में बहुत ही प्यार,भाईचारा और मेलजोल था किसी की भी बहन बेटी जब अपने ससुराल से आती तो वो पूरी कॉलोनी की मेहमान होती थी और शादी ब्याह चाहे किसी के भी घर में हो, पूरी कॉलोनी की रौनक देखते ही … Read more

अनसुने बोल –   त्रिलोचना कौर

कल से काम वाली बाई दो दिन की छुट्टी बोल कर गई थी सुबह-सुबह तो कई काम होते है यह सोचकर सविता रात को बर्तन साफ करने लगी।अभी बर्तन धो ही रही थी कि रसोई की ट्यूब लाइट आँख झप-झपकाकर बन्द हो गई। अनमने मन से कैन्डिल जलाकर बर्तन धोये लेकिन स्टैंड पर लगाने का … Read more

अंतिम दर्शन – पूनम अरोड़ा

अशोक जी के घर में आज जश्न  का माहौल  था। खुशी और गर्व  के आधिक्य  से उनके मन का कोना कोना चहक रहा था घर का कोना कोना  महक रहा था ।बात ही ऐसी थी बेटे का अमेरिका  की एक बहुत   प्रतिष्ठित  और नामी कंपनी  में  चयन कर लिया गया था और वो भी … Read more

किस्सा साड़ी का – डॉ. पारुल अग्रवाल

आज जब सिया की बेटी सिद्धि अपने कॉलेज से घर आई तो खुशी से चहक रही थी। उसने आते ही बताया कि उसके विद्यालय का वार्षिक उत्सव है जिसमें उसको मंच संचालन और कार्यक्रम के प्रबंधन का कार्य सौंपा गया है। उसको कार्यक्रम के दिन साड़ी पहनकर जाना है। साड़ी की बात सुनकर सिया को … Read more

पागल स्त्री और उसकी अस्मिता – मंजू तिवारी

आज इस बात को लगभग  26 साल बीत गए हैं। लेकिन मेरे मानस पटल पर जस के तस अंकित है।  मुझे आज भी उसका गोरा चेहरा इकहरा बदन पतली नाक,,,,, कुल मिलाकर बहुत ही खूबसूरत महिला,,,,, जब मैंने और मेरी सहेली ने उसे पहली बार देखा तब वह बहुत ही खूबसूरत थी,,,,, हम दोनों सहेलियां … Read more

शिकारी का शिकार – नीलम सौरभ

देवल और प्रत्यूष स्कूल के जमाने में कभी साथ पढ़ा करते थे। उन दिनों बहुत घनिष्ठता तो नहीं थी उनमें, बस दोनों दूसरे दोस्तों के कारण आपस में जुड़े हुए थे। फिर देवल के पापा का वहाँ से स्थानांतरण हो गया था, जिसके बाद यह शहर छूट गया था। सालों बाद एक दिन अनायास दोनों … Read more

अंगूठा  टेक… – मंजू तिवारी

अंगूठा यह बड़ा महत्वपूर्ण रहा है। हम स्त्रियों के लिए,,,, हम स्त्रियों ने अंगूठे के सहारे उंगलियों से बेलन पकड़ कर रोटी बनाने में इसका इस्तेमाल किया है।,,,,, रोटियो के आकार को हम स्त्रियां पहचानते  तो थे लेकिन गणित की भाषा में इसको व्रत कहा जाता है यह हमें दूर-दूर तक पता ना था ,, … Read more

error: Content is protected !!