संस्कार – सुधा शर्मा 

रास्ते भर सोचते हुये आ रही थी सुशीला जी ‘ पता नहीं इस लड़की ने क्या गजब किया जो माला जी ने कह दिया कि निशा की बहुत शिकायतें इकट्ठी हो गई है जब भी समय और सुविधा हो तो आने का प्रयास कीजियेगा।    शहर में ही शादी की थी उन्होंने बेटी की ।वैसे तो … Read more

खुशी की किरण –   रीता खरे

 “आज फिर पूनम की रात, वही पूर्ण चांद, जिसने अपनी चांदनी से सारा जहां  दुधिया  रंग में रंग दिया है, कितनी सुन्दर लगती है, फिर .. फिर क्यों? इस इतनी उज्जवल रात ने मेरे मन को इतना मलिन कर दिया, क्यों यह पूनम की रात मेरे जिंदगी में अपने हिस्से की थोड़ी सी किरणें नहीं … Read more

 रूबरू – पुष्पा कुमारी “पुष्प”

“रात काफी हो गई है अतुल!. जाओ सो जाओ।” धीरे से बिस्तर पर करवट लेते हुए उसने अभी-अभी फिर से अपने कमरे के भीतर आते बेटे की ओर देखा… “नहीं!.नींद नहीं आ रही है।” अतुल ने पिता की बात को नजरअंदाज कर दिया। आज अचानक फिर से तबीयत नासाज हो जाने की वजह से बिस्तर … Read more

उसका अपराध आत्महत्या थी । – अनिल कान्त

प्रथम बीयर के अंतिम घूँट के साथ ही उसकी आँखें बहकने लग गयीं । अभी चार की गिनती शेष थी । हम सन् 2002 की बीती सर्दियों की शाम को याद करके पीने में ख़ुशी महसूस कर रहे थे । उसके पास उन सर्दियों को याद करके ख़ुशी मनाने का अच्छा बहाना रहता था । … Read more

बिजली गिर गई  – गौतम जैन

रात गहन अन्धकार में सन्नाटे को चीरती हुई मुसला-धार बारिश….सांय-सांय की आवाज के साथ तूफानी हवाएं…..रह रह कर आसमान का सीना चीरकर कहर बरपाती बिजलियां ….. और गड़गड़ाहट …… वातावरण को बेहद भयावह बना रही थी ।         तेज हवाएं कार की गति अनियंत्रित कर रही थी ।बड़ी मुश्किल से धीरे धीरे कार आगे बढ़ रही … Read more

परिवार की दीप्ति – बालेश्वर गुप्ता

 सब ठीक हो गया है, सनी,तुम बिल्कुल भी चिंता मत करना,मैं हूँ ना,सब सम्भाल लूंगी।पापा अब बिल्कुल ठीक हैं।        क्या हुआ है,दीप्ति, पापा को क्या हुआ है?तुम क्या बोले जा रही हो,तीन दिन से तुम्हारा फोन भी नही लग रहा है, मुझे वैसे ही चिंता हो रही थी।मुझे सब बात तो बताओ?      रमेश बाबू और … Read more

वो सुनसान रात – कामिनी मिश्रा कनक

चारों तरफ अँधेरा ही अँधेरा , बादल और बिजली की आवाजे । दर्द से चीखती कमला तड़प रही थी अचानक ही कमला को प्रसव पीड़ा होती है । कमला घबरा जाती है , बहुत चीखती है , चिल्लाती है , दर्द से तड़पती है , अपने पास किसी को बुलाने की बहुता कोशिश करती है … Read more

शीर्षक-छुटकी का पत्र  – गीता वाधवानी

एक सेठ थे नाम माणिक चंद। कई कारखाने, कई बंगले, बड़ी-बड़ी गाड़ियां गाड़ियों में अलग-अलग ड्राइवर, नौकर चाकर और भरा -पूरा परिवार सब कुछ था उनके पास, सिर्फ एक चीज की कमी थी वह था चैन। ना जाने क्यों उनका मन सदा बेचैन रहता था, मन में बिल्कुल शांति नहीं थी।  उन्हें खुद पता नहीं … Read more

माँ मुझे गोद ले लो – संगीता अग्रवाल

वृद्धाश्रम मे बहुत गहमगहमी थी ऐसी क्या बात है जो नम्रता बिटिया ने यहाँ इकट्ठा होने को कहा है  सभी बुजुर्ग आपस मे यही चर्चा कर रहे थे । वृद्धाश्रम का वो हॉल जिसमे सभी बुजुर्ग खाना खाते थे वो आज शाम के वक़्त भी गुलजार था वरना इस समय सभी कमरों मे होते है … Read more

“बहु वचन” – रमेश चंद्र शर्मा

” क्या माताजी जी आप भी बड़ी कंजूस हैं ।आपकी  गांठ से पैसे छूटते ही नहीं? आजकल तो फल सब्जियां कितनी महंगी हो गई है, ऊपर से बच्चों की पढ़ाई भी”    आज सुनंदा का मूड कुछ ज्यादा ही खराब था। उसने माताजी के पेंशन की डायरी मांगी  देख ली थी । “अरे वाह रुपया तो … Read more

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