राधिका का संघर्ष – भारती अनिल सोनी

राधिका आज बहुत खुश थी,, आज उसकी सालों की मेहनत सफल हुई थी। उसके इतने सालों के संघर्ष का अब अंत करीब था । उसकी बेटी अनुभा का आज डिप्टी कलेक्टर के पद पर चयन हो गया था । अनुभा पिछले 3 सालों से आई ए एस अधिकारी की परीक्षा दे रही थी पर आज … Read more

*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* – तोषिका

“*घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है* समझा तू। जो तू मुझे पैसों का बोल रहा है ना, मैं सब जानती हू। मुझे ना तेरी सलाह की कोई जरूरत नहीं है।” मिहिर का सामान बाहर फेंकते हुए उसकी मां रानी बोली और अपने घर का दरवाज़ा बंद कर दिया। बस उस बंद कमरे की … Read more

घर सिर्फ ईंट पत्थरों से नहीं बनता – मंजू ओमर

बेटी की शादी के कार्ड छप चुके थे और वही कुर्सियों पर बैठा महेश कैलकुलेटर पर जोड़ घटाना कर रहा था।  सामने मेज पर रखे पेपर पंखे की हवा से फड़फड़ा कर महेश की दिमाग को और उलझा रहे थे। तभी वंदना ने चाय का कप रखते हुए महेश से कहा देखो महेश भूमिका की … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है – बिमला रावत जड़धारी

कमली ने अपने ससुराल वालों के सहयोग से अपनी माॅंजी (भरोसी) का अंतिम संस्कार कर दिया। अब तेरहवीं की व्यवस्था के लिए सास बोली,;तुम दूसरे हिस्से में रह कर शांति से अपनी माॅं का बाकी का काम निपटा लो। सारे रीति-रिवाज पंडित जी तुम से करा देंगे। अभी पितृ भोज की व्यवस्था भी करनी है। … Read more

घर ईंटों से नहीं, दिल से बनता है – शुभ्रा बैनर्जी 

रामेश्वरम ने अपनी पत्नी कमला से वादा किया था, एक सुंदर घर बनाकर कमला को उपहार देने का।हर महीने हार्ड वेयर की दुकान जाते, साथ में एक छोटी सी डायरी और पेन लेकर।दुकान में जाकर सीमेंट,और सरिया की कीमत पूछकर लिखते थे। दुकानदार ने पूछा एक दिन”दादा, पिछले बारह सालों से यही काम कर रहे … Read more

घर ईटों से नहीं दिलों से बनता है – खुशी

रामानंद एक सीधे साधे ईमानदार आदमी थे जो एक सरकारी अध्यापक थे।स्कूल के बाद दो तीन ट्यूशन पढ़ाते फिर शाम को घर लौट कर बच्चों को पढ़ाते ।उनकी पत्नी रजनी गृह लक्ष्मी थी जो घर संभालती बचत करती और अपने पति का सहयोग करती।रामानंद किराए के घर में रहते थे उनकी बहुत इच्छा थी कि … Read more

परिवार – मधु वशिष्ठ

बड़ा सा बोर्ड लगा था और उस पर लिखा था बच्चों का अपना घर। उद्घाटन के बाद जब सब घर जाने को थे तो मिन्नी ने सविता मैडम को रोकते हुए कहा, आप कहीं नहीं जाएंगे आपका कमरा तो यहां ही बना हुआ है अब इस अपना घर का काम आपको ही संभालना है।  मैडम … Read more

एक कटोरी चीनी – प्रतिमा श्रीवास्तव

कुछ ही दिन आए हुए थे कविता को इस शहर में। सबकुछ नया – नया सा था। किसी को जानती नहीं थी, ऑफिस वालों से थोड़ी – थोड़ी जान-पहचान का सिलसिला शुरू हुआ था। कविता बहुत ही सुलझी, समझदार थी, बहुत जल्दी किसी से घुलती मिलती नहीं थी।उसे इंसानों की बहुत समझ थी जो उसे … Read more

आत्मीयता – डॉ बीना कुण्डलिया

अरी शान्ति ओ शान्ति ऽऽऽ राह चलती शान्ति देवी को पीछे से लगी आवाज सुनकर रूकना पड़ा। उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो शकुन बुआ उनकी ही तरफ दौड़ी चली आ रहीं थीं।  अरी, हुआ तेरे छोटे लडके का रिश्ता कहीं क्या ? शकुन बुआ बोली। पड़ोसी शकुन बुआ जो रिश्ते कराने का काम करती वो … Read more

घर में रौनक नहीं रही – करुणा मलिक

पूजा, सब ठीक तो है? बार-बार दरवाजे पर आ रही हो सुबह से…..मम्मी जी भी कह रही हैं कि आज पता नहीं, क्या बात है….पूजा कई बार दरवाजे पर दिख रही है। हाँ-हाँ सब ठीक है…..दरसल जोधपुर से दोनों ननदें आने वाली है, वैसे तरुण गए हैं रेलवे स्टेशन….. पर न जाने क्यों लेट हो … Read more

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