शगुन का एक रुपया – संगीता अग्रवाल
“जब एक अमीर समधी ने गरीब पिता के सामने हाथ फैलाकर कहा—’मुझे आपकी दौलत नहीं, आपकी वो धरोहर चाहिए जिसे आपने अपनी गरीबी की भट्टी में तपाकर कुंदन बनाया है… मुझे दहेज में आपकी बेटी के संस्कार और आपकी जेब का वो एक सिक्का चाहिए।’” शहर के सबसे पॉश इलाके में बने ‘सिंघानिया विला’ के … Read more