“घर ईंटों से नहीं, दिलों से बनता है।” – अंशु कंसल

“मां, आज टिफिन में सूजी का हलवा थोड़ा ज्यादा रखना,” सोनल ने रसोई में काम करती मां से चहकते हुए कहा। मां ने प्यार से उसके बाल सहलाए और मुस्कुराते हुए बोलीं, “पता है मुझे, तुम्हारी सहेली रश्मि को मेरे हाथ का हलवा कितना प्रिय है। पर सोचती हूं, जब तुम दोनों की शादी हो … Read more

घर इंटों से नहीं , दिलों से बनता है | – सुदर्शन सचदेवा

दिल्ली की एक ऊँची सोसायटी के बारहवें माले पर स्थित फ्लैट नंबर 1204 बाहर से किसी सपनों के घर जैसा दिखता था। आधुनिक फर्नीचर, चमकदार इंटीरियर, हर कमरे में एसी, नवीनतम गैजेट्स और हर सुविधा मौजूद थी। सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरें देखकर लोग कहते, “वाह! क्या शानदार घर है!” लेकिन उस फ्लैट के भीतर … Read more

पैसा ही सब कुछ नहीं – बिमला रावत जड़धारी

रिया ने अपने बाबा को फोन किया। “बाबा, रोहन का फोन आया था। वह कह रहा था कि बाबा और मम्मी वसीयत बनाने वाले हैं।” “हाँ, बेटा। रोहन ठीक ही बोल रहा था। मैं और मम्मी सोच रहे हैं कि अब वसीयत बना दें, पर रोहन मना कर रहा था कि अभी कोई जरूरत नहीं … Read more

पति पत्नी का एक साथ परिवार में , समर्पण ही तो है। – मंजू ओमर 

मां यह लोग घर खर्च के पैसे अच्छा बेटा । सुनिए जी आपकी तनख्वाह मिल गई क्या हां ,पत्नी बोली  तो क्यों ना हम इस महीने पीछे वाले कमरे में एक ऐसी लगवा ले। इस महीने नहीं हो पाएगा आगे देखेंगे आनंद जी बोले। क्यों नहीं हो पाएगा सैलरी तो पूरी मिली है ना। हां … Read more

सच्ची श्रद्धांजलि – कमलेश आहूजा

लगभग एक वर्ष बीत गया था रमेश को इस संसार को अलविदा कहे हुए।रमा पति की यादों में खोई हुई थी।पति के साथ बिताए हुए हर एक लम्हें को इस एक वर्ष में उसने हजारों-हजार बार जिया था।पति को याद करते हुए कभी उसकी आँखें नम हो जातीं तो कभी होंठो पर खोई हुई मुस्कान … Read more

*रिश्तों की कीमत* – तोषिका

लड़की तो बहुत सुंदर और सुशील है, हमें हमारे बेटे ऋषि के लिए सीमा पसंद है। मुस्कुराते हुए ऋषि की मां सुलेखा ने बोला। ऋषि और सीमा की शादी हो गई थी। पर ज्यादा बड़े घर से ना होने के चलते वो दहेज के लिए इतने गहने और सोना चांदी ये सब नहीं लाई थी। … Read more

*अस्ति कुटीर * – अनु माथुर

लखनऊ के कश्मीरी मोहल्ले की वो गली जानी जाती थी अपने आमने-सामने वाले दो मकानों से।   एक था “शांति कुटीर” – प्रोफेसर हरीश वर्मा का तीन मंज़िला, संगमरमर-वाला, बेल्जियम काँच की खिड़कियों वाला मकान। पर अंदर? सन्नाटा ऐसा कि घड़ी की टिक-टिक भी पहाड़ लगती। 72 साल के वर्मा जी। बीवी को गुज़रे 10 साल। … Read more

घर ईंटों से नहीं दिलों से बनता है -प्रतिमा श्रीवास्तव

कमरें में धीमी रौशनी जल रही थी। सन्नाटा चारों ओर पसरा हुआ था, सांसो की आवाजाही भी कानों में साफ – साफ सुनाई दे रही। बिस्तर पर लेटी करुणा जी छत को अपलक निहार रहीं थीं, जैसे कुछ प्रश्नों के जबाब को तलाश रहीं हों। अतीत की यादों ने उन्हें झकझोर दिया था और आंखों … Read more

रिश्तों की कीमत – खुशी

आदित्य एक अनाथ लड़का था।जो अनाथाश्रम में रहता था।वही के जो मैनेजर थे वो ही वहां रह रहे बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाते थे।कभी कोई रहीस आदमी आ जाता तो  ढंग से खाना पीना मिल जाता नहीं तो वही रुखा सुखा। एक अपमान भरा जीवन जिया था उसने कभी कोई प्यार करने वाला नहीं … Read more

रिश्तों की कीमत – माता-पिता और बेटी – सुदर्शन सचदेवा

“बेटियाँ घर की रौनक होती हैं” — यह बात शर्मा जी अक्सर कहा करते थे। उनकी इकलौती बेटी अन्वी उनके जीवन की सबसे बड़ी खुशी थी। घर में उसकी हँसी गूंजती तो लगता जैसे हर कोना मुस्कुरा उठा हो। अन्वी बचपन से ही बहुत चंचल थी। सुबह उठते ही सबसे पहले माँ के गले लगती … Read more

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