मां यह लोग घर खर्च के पैसे अच्छा बेटा । सुनिए जी आपकी तनख्वाह मिल गई क्या हां ,पत्नी बोली तो क्यों ना हम इस महीने पीछे वाले कमरे में एक ऐसी लगवा ले। इस महीने नहीं हो पाएगा आगे देखेंगे आनंद जी बोले। क्यों नहीं हो पाएगा सैलरी तो पूरी मिली है ना। हां मिली तो है कितनी सैलरी है आपकी, क्या मतलब अरे वही तो पूछ रही हूं की कितनी सैलरी है आपकी सरला बोली। इतने साल नहीं पूछी तो अब क्यों पूछ रही हो । तुम्हारी जरूरतें तो सब पूरी होती है ना, जो चाहिए होता है वह मिलता है । और जब पैसे मांगती हो तो मिलते हैं ना । अरे कुछ मुझे भी तो पता होना चाहिए कि कहां आपकी सेविंग है किस बैंक में खाता है कुछ बचत होती है कि नहीं। मुझे तो बस आपसे मैं मांगती हूं तो दे देते हैं मेरे पास तो कोई सेविंग रहती नहीं है। कभी कोई इमरजेंसी में जरूरत पड़ गई तो । अरे तो दे तो देता हूं मांग तो लेती हूं तुम हमसे । अरे जब कभी तुम घर पर ना हुए या तुमसे कांटेक्ट ना हो पाया तो क्या होगा । तुम तो ना बिना मतलब का बहस करती हो। जैसे इतने साल से चल रहा है आगे भी चलता रहेगा । कोई इमरजेंसी आ भी जाती हो तो मैं हूं ना। आज न जाने क्या फितूर चढ़ गया है जो बिना मतलब की बहस कर रही हो।
सरला मन मसोस कर रह गई। लेकिन उसने मन मे ठान लिया था कि अब मैं किसी भी तरह आनंद के पीछे पड़कर सब कुछ जानकार ही रहूंगी । आखिर में पत्नी हूं इनकी सबकी जानकारी रखना मेरा भी अधिकार है । आनंद जी के आफिस चले जाने पर घर के काम निपटा कर और खा पीकर फुर्सत होकर सरला पहुंच गई कमरे में। और अलमारी का एक हिस्सा जो आनंद जी के कागज और कुछ फाइलों से भरा रहता था उसको खोलकर बैठ गई।एक एक फाइल के पेपर निकाल कर देख रही थी । देखते-देखते कब तीन-चार घंटे बीत गए पता ही नहीं चला । और आंनद के ऑफिस से आने का वक्त हो गया।
जैसे ही आनंद जी कमरे में घुसा तो देखा सरला उनकी अलमारी से सारी फायले निकाल कर बैठी थी। आंनद जी जोर से चिल्लाये जी क्या कर रही हो यह। दिन में इस बारे मे बात हो चुकी थी ना फिर भी तुमने । क्या जरूरत है तुम औरतों के पचरे में पडने की तुम अपना घर संभालो और बच्चों को देखो मैं नौकरी करता हूं। और सब की ज़रूरतें पूरी कर रहा हूं क्यों परेशान कर रही हो। जाओ चाय बना कर ले आओ । सरला सब छोड़कर चाय बनाने चली गई । और मन मे सोचती है कि क्या बात है जो यह मुझसे छुपा रहे हैं बात नहीं रहे हैं कुछ । आखिर मुझे भी तो जानने का हक है सब कुछ ।।20 साल हो गए मेरी शादी को ना मैंने कभी पैसे के बारे में पूछा ना कभी सैलरी के बारे में उन्होंने बताया । बस पूरे समर्पण से मैं इनका घर बच्चे और सास ससुर को संभालती है । भगवान ने कर कभी कोई जरूरत पड़े तो मैं क्या करूगीं।किससे मांगूगी पता नहीं है। मुझे क्यों नहीं बताना चाहते समझ नहीं आ रहा है। और आनंद जी का की औरतों को अपना घर बच्चे और परिवार संभालने चाहिए इन चक्कर में पढ़ने की कोई जरूरत नहीं है। इस बात को लेकर पति-पत्नी पति-पत्नी दोनों कई दिनों तक अनबन बनी रही।
1 हफ्ते बाद अचानक से आनंद जी को खबर लगी उनका सबसे अजीब दोस्त अजय का एक्सीडेंट में देहांत हो गया।।आनंद जी उसके घर गए दोस्त की पत्नी को सांत्वना दी और घर चले आए फिर दोस्त की मृत्यु की 10 दिन बाद आनंद के पास दोस्त की पत्नी नेहा का फोन आया । कि भाई साहब घर आ जाइए जरा कुछ बात करनी है । आनंद जी जब घर गए तो नेहा से पूछा क्या बात है भाभी जी । भाई साहब कुछ पैसे चाहिए थे इनका तेरहवीं का काम करना है, और भाई साहब हो सके तो आप मुझे कहीं पर छोटी-मोटी नौकरी दिलवा दे।जिससे मैं अपना और अपनी बेटी का खर्च उठा सकूं। एक बेटी थी नेहा की 10 साल की यह क्या कह रही है भाभी । क्या घर में पैसे नहीं है दोस्त अजय ने तो अच्छी खासी सेविंग कर रखी थी।और बड़े सेविंग प्लान भी ले रखे थे। उसने हां भाई साहब करते होंगे कि मुझे कुछ नहीं बताते थे । किस बैंक में उनका अकाउंट है और यह भी मुझे पता नहीं है। वह मुझे भी कुछ नहीं बताते थे । बस अपना घर देखो और बच्चों को देखो तुम्हें क्या करना है यह सब जानकार। बताना छोड़ दिया मैंने भी पूछना छोड़ दिया । अब कहां जाऊं किस बैंक में पता करूं, मैं कहां पर पेपर रखते थे कुछ पता नहीं । आनंद जी सोच में पड़ गए कि अजय के अनुसार ही तो मै चलता था की औरतों को ज्यादा ही इन चक्करों मे नहीं लगना चाहिए। फिर खोज बिन करने लगती है । उनका काम है घर संभालना बस वही करें बाकी जरूरत तो हम उन लोगों की पूरी कर रहे हैं ना ।आनंद नेहा भाभी को कुछ पैसे देकर घर आ गया । और सारे रास्ते सोचता रहा कि क्या मै और अजय यह सब ठीक कर रहे हैं जो पत्नी को पैसे के बारे में कोई जानकारी नहीं देते सब छुपाते हैं।
घर आज जाकर आनंद जी सीधे कमरे में गए और अलमारी में से कुछ फाइलें लेकर बाहर आए और सरला को आवाज़ लगाई सरला जरा दो कप चाय लेकर बाहर आना कुछ जरूरी बात करनी है । सरला जब चाय लेकर आई तो आनंद जी ने कहा बैठो तुमसे कुछ बात करनी है । सरला मै बहुत गलत था जो पैसों की जरूरी जानकारी तुमसे छुपाता था । आज मैं अजय के घर के गया नेहा की स्थिति देखकर मुझे एहसास हुआ कि समय का कोई भरोसा नहीं है। कभी भी किसी को कुछ भी हो सकता है। अब देखो अजय के अचानक चले जाने से नेहा कितनी परेशान है। क्योंकि अजय पत्नी को पैसे के बारे में कुछ नहीं बताता था, और उसके बातों में आकर मैं भी तुम्हारे साथ वही किया। अब कल को मुझे कुछ हो गया तो तुम क्या करोगी । तुम्हें पता होना चाहिए सब कुछ।।नहीं तो घर बिखर जाएगा। नहीं जी ऐसी बात ना करिए ईश्वर आपको लंबी उम्र दे । फिर आनंद ने पैसों की बचत और जो कुछ भी पॉलिसी थी कौन सी कब मैच्योर हो रही है सब बताया । अच्छे से समझाया खुश थी सरला आनंद जी के इस व्यवहार से । सारी अनबन दूर हो गई थी अब तो खुश हो ना हां जी आपने सब बताया खुलकर अच्छा लगा । मैं इन पैसों को खर्च करने को नहीं कह रही हूं। आपने इतनी बचत की अच्छी बात है । यह सब आखिर मेरे परिवार और बच्चों के लिए ही तो काम आएगा ना।
देखो आनंद परिवार एक दूसरे के समर्पण से चलता है। पति-पत्नी बनाकर एक जीवनसाथी परिवार का शुभारंभ करते हैं अपना घर परिवार बढ़ता है इसमें पति-पत्नी दोनों का ही समर्पण छुपा होता है एक के बिना दूसरा अधूरा है । एक दूसरे की पूरी जानकारी दोनों को होनी चाहिए। परिवार ऐसे नहीं चलता ,समर्पण का ही दूसरा नाम परिवार होता है। हां सुना सही कह रही हो तुम सभी पति-पत्नी को एक दूसरे से कोई बात नहीं छुपानी चाहिए। कुछ नहीं कह सकते कब किस चीज की जरूरत पड़ जाए ।
वह भी नहीं जानते इसलिए एक दूसरे की पूरी जानकारी होनी चाहिए पूर्ण समर्पण के साथ जीवन व्यतीत करना चाहिए हां जी आप सही कह रहे हैं।
मंजू ओमर
झांसी उत्तर प्रदेश
8 जून