नीलम शादी करके ससुराल पहुची, वो बहुत खुश थी। परिवार में पति और ससुर के अलावा कोई नहीं था। पति आनंद की अच्छा पड़ा लिखा, सरकारी नौकरी मैं था. सब ठीक चल रहा था,
ओर जल्दी ही वो पति औऱ ससुर की चहेती बन गई। नीलम से ससुर एक सेवानिवृत सरकारी अधिकारी थे. अच्छी सोसाइटी मैं बड़ा सा घर, सब सुख सुविधाएं से भरा हुआ, सोसाइटी मैं अच्छी पोजीशन थीं.
आनंद के महगें शौक और लगजरी लाइफ स्टाइल से उसकी पिताजी काफ़ी परेशान रहते थे, उन्हें शक था की आनंद को गलत काम तो नहीं के रहा हें जो इतने पैसे खर्च करता हें. बेटे से एक दो पूछा भी पर आनंद ने कहा, आप चिंता मत करके, मैं कुछ गलत नहीं कर रहा हूँ. नीलम आये दिन शॉपिंग करती और ससुर ज़ी को भी साथ ले जाती.
शादी के कुछ महीनो बाद, नीलम के जन्मदिन पर आनंद ने एक कार और खरीदी और नीलम को गिफ्ट कर दी. साथ मैं बोला, जब कभी कहीं जाना हों तो अपनी कार पर जाना.
नीलम एक साधारण परिवार की लड़की थीं, उसे कार चलना नहीं आता था. नीलम ने ड्राइविंग सीखी और अपने ससुर ज़ी को लेकर ही कहीं भी आना जाना करती. दोनों मैं खूब जमती थीं.
आनंद काम मैं व्यस्त रहता और इतवार को ही नीलम के साथ कहीं जाता. एक दिन नीलम ने आनंद से पूछा, तुम इतना ख़र्चा करते हों, तुम्हारी तनख्वा कितनी हें? आनंद बोला, काफ़ी अच्छा कमा लेता हूँ और कोई उधारी भी नहीं हैं, तुम ये सब मत सोचा करो.
नीलम के ससुर की भी उम्र हो गई और वो बीमार रहने लगे। तभी एक दिन आनंद को बुलाकर बोले, बेटा मैं सोचता हूँ कि गांव वाला घर बेच देते हैं, वहां जाना तो होता नही। आनंद बोला, रहने दो पिता जी, आड़े वक़्त मैं काम आएगा.
एक दिन आनंद ऑफिस से आया तो उसके हाथ मैं एक बैग था, जिसे उसने आते ही अलमारी मैं रख दिया और ताला लगा दिया. नीलम ने पूछा, आज ताला क्यों? आनंद बोका, कुछ जरूरी पेपर्स हैं बस। सुबह ऑफिस जाते समय आनंद अलमारी की चाबी भी साथ के गया. नीलम ने अपने ससुर ज़ी को ये बात बताई और बोला, आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ. ससुर ज़ी ने आनंद को फ़ोन किया तो वो बोला, गलती से आ गई होंगी.
कुछ दिन ऐसे ही तनाव मैं बीते और एक दिन खबर आई की आनंद रिश्वत लेते पकड़ा गया. आनंद की पत्नी और पिताजी दोनों सदमे मैं थे की पुलिस घर की तलाशी लेने आ गई. अलमारी से कैश का बैग आदि सब लेकर लोट गई. पुलिस के जाने के बाद नीलम के ससुर ज़ी बोले, अब मैं इस घर मैं नहीं रहुगा, गावं जा रहा हूँ. अच्छा हुआ, मैंने मकान नहीं बेचा. मेरे जाने के बाद, तुम आनंद से कैसे तालमेल बिठाओगी, अब बेटी, तुम्हारे संस्कारों की परीक्षा हैं.
नीलम बोली, मेरे संस्कार तो कहते हैं, की मुझे आपकी सेवा करनी हैं. आनंद के पास बहुत पैसे हैं, वो अपना ध्यान खुद रख सकता हैं, पर इस उम्र मैं आपकी सेवा कौन करेगा? यहाँ अब मेरा दम घुटता हैं, मैं भी आपके साथ गावं जाना चाहूँगी.
नीलम ने टैक्सी बुलाई और केवल दो जोड़ी कपड़े लेकर पापा के साथ गाँव के लिए निकल गए.
अंगद के पिताजी भावुक हो गए और बोले, मैं बहुत किस्मत वाला हूँ, आज अगर तुम्हारी माँ जिंदा होती, तो बहुत खुश होती। आनंद ने आज मेरी नाक कटवा दीं,न जाने लोग क्यों बेटा बेटा करते रहते है? एक बेटी ही है जो अपना पीहर के साथ साथ ससुराल का भी पूरा ध्यान रखती है। बड़ी से बड़ी तकलीफ मै भी हिम्मत नहीं हारती ओर कोई भी कुर्बानी देने से पीछे नहीं हटती।
बेटा, मुझे अगर अगला जन्म मिला तो मैं भगवान से यही मांगूगा की तू ही मेरी बेटी बनकर मेरे घर आना।
आनंद जमानत पर आ गया और नौकरी भी ज्वाइन कर ली पर अभी केस चल रहा हैं.
अकेला अपने किये पर पछता रहा हैं. उसके पास पैसा हैं पर अपनों की कमी खल रहीं थी. जीवन के इस मोड़ पर उसे समझ आया की पैसों से ज्यादा “रिश्तो की क़ीमत” होती हैं.
इंसान गलत काम करके अपनों के लिए पैसे लाता हैं लेकिन ये भूल जाता हैं की उसके गुनाहो की सज़ा सिर्फ उसे ही भुगतनी पड़ती हैं.
आप ही बताये क्या नीलम का त्याग और बलिदान क्या गलत था ??
साप्ताहिक विषय.. रिश्तो की कीमत
रचना
एम पी सिंह ‘मोहि”
स्वरचित, अप्रकाशित