कविता एक भरे पूरे परिवार की बेटी थी। मास्टर्स किया हुआ था।परिवार में पिताजी राम कुमार जो पेशे से एक व्यवसाई थे।उनका डिस्पोजेबल का बिजनेस था।दो भाई नितिन और सचिन भी पिताजी का कारोबार देखते थे। उनकी पत्नियां सुमन और विजया उनके दो दो बच्चे बड़े भाई के दो बेटे राहुल और संजय और छोटे भाई के दो बच्चे अर्जुन और सारा और उनकी मां सीता देवी एक खुशहाल परिवार था।
सीता देवी को घर जोड़ना और बहुओं को भी एक सूत्र में बांधना आता था।इसीलिए उनका परिवार एक साथ हंसी खुशी रहता था।बहुओं को उन्होंने पहले दिन ही गुरु मंत्र दिया था बेटा जो भी परेशानी हो पहले अपने घर में ही बताना अगर यहां बात ना हल हो तभी मायके तक जाना बेटा अपने घर को बसाना तुम्हारे हाथ में ही है। बहुओं ने भी सास की बात का मान रखा और वो चारों ऐसे घुल मिल कर रहती जैसे मां बेटी। ऐसे ही संस्कार उन्होंने कविता को भी दिए थे।वो भाभियों की बराबर मदद करती बच्चों को पढ़।ती घर में सहयोग देती।अब कविता के विवाह के लिए भी लड़के देखे जाने लगे।उसकी शादी समर से तय हुई जो मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत था।पिताजी राजेश एक सरकारी मुलाजिम थे मां गृहलक्ष्मी थी।समर की कंपनी बैंगलोर में थी।शादी हो कर कविता बैंगलोर आ गई।
नया माहौल अकेले रहने की उसे आदत नहीं थी घट पर हर समय कोई ना कोई होता।शादी के हफ्ते तक वो ससुराल में अपने सास ससुर के साथ रही फिर वो बैंगलोर आ गए।कुछ दिन घर सजाने घूमने में निकले अब कविता घर में होती और समर सुबह 9:00 बजे निकलता और रात 7:00 बजे तक आता।कविता घर में बोर हो जाती उसने समर से पूछा मै भी कुछ काम कर लू सारा दिन घर बैठ बोर हो जाती हूं।समर बोला देखो यहां इतना ट्रैफिक है और तुम्हे वर्क एक्सपीरियंस नहीं है तो अभी रुको।एक दिन सुबह काम निपटा कर कविता अपनी भाभी से बात कर रही थी कि मैं बोर हो जाती हूं सारा दिन कुछ करने के लिए नहीं है।
उसकी भाभी बोली जबसे तुम गई हो बच्चों को मैथ्स का कोई अच्छा ट्यूटर नहीं मिला है क्यों ना तुम ऑनलाइन क्लासेज ले लो अच्छा काम है कही जाने की जरूरत नहीं।कविता ने ऑनलाइन ट्यूशन स्टार्ट कर दी पहले तो उसके भतीजा भतीजी थे फिर उनके दोस्त भी जुड़ गए ऐसे होकर कविता 3 बजे से 6 बजे तक बैच लेती उसका टाइम भी अच्छा कटता और कुछ अपनी आमदनी भी हो जाती।दिवाली में वो अपने ससुराल आई सबने अच्छे से दिवाली मनाई और कुछ दिन कविता अपने मायके रुक गई।पेरेंट्स का रिव्यू अच्छा था आपका पढ़ाया बच्चों को समझ आता है प्लस नोट्स भी बहुत हेल्प करते है।
बच्चों के रिजल्ट भी अच्छे आ रहे थे तो और भी ट्यूशन उसे मिल गई।जैसे हीं वो वहां से वापस आए की कोविड ने दस्तक दी।वर्क फ्रॉम होम हो गया।घर का सब काम निपटा समर अपने ऑफ़िस के काम में लग जाता और कविता टयूशन में समर कहता भी मै काम में होता हूं तुम बोर हो जाती होगी।कविता कहती नहीं मैं तब तक ट्यूशन पढ़ा लेती हूं।
ऑन लाइन सुबह 11 से 1 और 3 से 6 टाइम का पता ही नहीं चलता।अरे वाह तुमने ये कब शुरू किया भाभी से बात हुई तो उन्होंने कहा तुम्हारे जाने के बाद बच्चों को किसी का भी मैथ्स समझ नहीं आया इसलिए तुम उन्हें ऑनलाइन पढ़ा दो।पहले वो चार थे फिर धीरे धीरे बच्चे जुड़ते गए इसलिए अब 4 बैच लेती हूं। उतना करा करो जितना आराम से हो मेरी जॉब अच्छी है तो कोई पैसो की समस्या नहीं है। बात पैसों की नहीं खुद को बिजी रखने की है।कई बार समर चीड़ भी जाता यार तुम मुझे टाइम नहीं देती अगर उसका ऑफिस जल्दी खत्म हो जाता तो।फिर आया वो दिन जिस दिन कंपनी में छटनी हुई और समर की जॉब चली गई।
वो बहुत फ्रस्ट्रेटेड हो गया।होम लोन बाकी चीजें कैसे मैनेज होगी।उम्मीद मत छोड़ो सब अच्छा होगा।अब कविता टयूशन पढ़।ती तो समर उसकी घर के कामों में मदद कर देता।पर वो जॉब नहीं थी तो परेशान था। कविता की अपनी मां से बात हुई उसने बताया कि समर की जॉब चली गई है।होम लोन है गाड़ी का भी लोन है सब कैसे होगा। बेटी ये तेरे संस्कारों की परीक्षा है तूने अपने पिताजी और भाइयों को देखा था ना इतना सब होते हुए भी वो पाई पाई बचाते थे तू भी समर का सहारा बन उसे मजबूत बना अगर कुछ जरूरत हो तो बताना ।
नहीं मां आपके संस्कारों ने हमे मांगना नहीं सिखाया है। मैं भी नहीं मांगूंगी अपनी और समर की ढाल खुद बनूँगी।उधर एक दिन कविता बीमार थी तो उसकी जगह समर ने उन बच्चों को फिजिक्स पढ़ा दिया ।बच्चे बोले वाह बुआ फूफा जी तो बहुत अच्छा फिजिक्स पढ़ाते हैं आप उनको बोलो हमे टाइम निकाल कर पढ़ा दे।अच्छा पूछती हूं। कविता ने समर को बच्चों की बात बताई और बोली मैं तो बहुत कम उनकी प्रॉब्लम सॉल्व कर पाती हूं अगर आप चाहे तो बच्चों को पढ़ा दीजिए।समर तैयार हो गया ऑनलाइन मैथ्स साइंस के इतने बच्चे आए कि दोनों 5 दिन ट्यूशन में बिजी रहते और सैटरडे संडे फ्री।फिर उन दोनों ने अपना खुद का इंस्टीट्यूट खोल दिया अब ऑनलाइन ऑफलाइन बहुत बच्चा था।
कुछ फेकल्टी हायर कर उन्होंने 3 से 12 तक इंस्टीट्यूट बढ़ा लिया।घर गाड़ी दोनो लोन फ्री हो गए इस साल जब वो दिवाली में आए तब समर सपरिवार अपने ससुराल आया तब उसने बताया कैसे जॉब चली गई थी और कविता के सपोर्ट और प्रेरणा से आज हमारा खुद का इंस्टीट्यूट है जिसका नाम है कविता कोचिंग्स जी दादू फूफा जी बहुत अच्छा पढ़ाते है अच्छा जी और मै बुआ आप तो बेस्ट हो आप दोनों ही बेस्ट हो।
बहुत अच्छे बेटा रामकुमार बोले तुमने हमारे संस्कारों की लाज रखी और अपने परिवार को संभाला जीती रहो।लाखों में एक बहु मिली है हमे राजेश बोले और देखो बेटा तुम नौकरी से भी आज़ाद हो गए अपना काम अपना होता है तरक्की करो फूलों फलो अपने संस्कारों को कभी मत भूलो।कुछ सालों में उनका इंस्टीट्यूट बहुत चल निकला पर जो कमजोर वर्ग के बच्चे होते उनसे वो कम ही पैसा लेते या नहीं भी लेते क्योंकि शिक्षा हर बच्चे का हक है और पैसों के अभाव में कोई वंचित नहीं रहना चाहिए।ये उन दोनों का मानना था।सच है दोस्तों हर व्यक्ति के साथ संस्कार बहुत जरूरी है यदि अच्छे संस्कार होंगे तभी हम अच्छे नागरिक बन पाएंगे।
स्वरचित कहानी
आपकी सखी
खुशी