अपने हुए पराए  – मधु वशिष्ठ

 हेलो दीदी, सोनम दी के बारे में कुछ पता पड़ा? नहीं ,मेरे से भी काफी समय से कोई बात नहीं हुई, उसका फोन भी स्विच ऑफ ही जा रहा है। “परमात्मा करे सब ठीक हो”। सारी बहनें आपस में फोन करके सोनम दी के बारे में बातें जरूर कर रही थी, लेकिन मन सब का जानता था कि कुछ ठीक नहीं है। भाभी ,बहने, “परमात्मा करे सब ठीक हो बोल कर अपनी जिम्मेवारी परमात्मा पर डालकर” अपने काम में और अपने जीवन में व्यस्त ही हो जाना चाहतीं थी। वरना क्या ऐसा होता—–?

अपने हुए पराए,जी हां ज़रूरत के रिश्ते हैं सारे जरूरत खत्म , रिश्ते खत्म जब जब भी बहने बात करती, बहुत सी कहावतें चरितार्थ हो उठती।

गांव के 11 बच्चों वाले प्रतिष्ठित जमीदार के बहुत बड़े घर की पांचवी पुत्री थी सोनम। परिवार की प्रतिष्ठा के अनुरूप सभी छ: बहनों  और पांचों भाइयों का प्रतिष्ठित परिवारों में विवाह संपन्न हो गया था।

यूं तो सोनम का विवाह भी साथ ही के गांव के प्रतिष्ठित जमीदार परिवार के सूरज से हुआ था, सूरज की दोनों बहने भी साथ ही के गांव में ब्याही गईं थी। पिता का साया सर पर से उठने के बाद मां का लाड प्यार और अंतहीन पैसा, सूरज की उद्दंडता बढ़ाता चला गया। शादी के बाद भी पूरा दिन असामाजिक तत्वों के साथ बिताना और सब गलत काम करना, उसकी आदत बन गई थी। अपनी बहनों और ससुराल पक्ष से भी झूठ बोलकर वह काफी पैसे ऐंठ चुका था।मां की मृत्यु के बाद सूरज की दोनों बहनों ने अपना हिस्सा ले लिया था। और सूरज ने अपने हिस्से को गंवाने में चंद महीने ही लगाए। घर बाहर सब को धोखा देने के बाद, जब घर का सब कुछ बिक गया तो जीविकोपार्जन के लिए किसी दोस्त ने उसे उड़ीसा का रास्ता दिखाया। घर से बहुत दूर अपने पति के सुधरने की आस लिए सोनम अपने बच्चों को लेकर उड़ीसा चली गई।

अनजान शहर और अनजान नगर में किराए का मकान लेकर कुछ दिन तो सूरज ने मजदूरी करके ठीक से काटे। बाद में वहां भी उसने अपना एक गिरोह  बना लिया। गाहे-बगाहे पुलिस घर पर आती रहती और चोर सिपाही का खेल चलता रहता। इलाज के अभाव में, उसकी पुत्री भी चल बसी थी।

 जी हां, ऐसा नहीं कि वह अपने जीवन यापन की उम्मीद लेकर अपने माता पिता के घर ना आई हो। माता पिता वृद्धावस्था की बीमारियों के साथ बिस्तर पर लगे, खुद अपने बेटे बहुओं के सहारे दिन काट रहे थे। भाभियां अपने कान्वेंट में पढ़ने वाले बच्चों के सर पर गालियां बकने वाले सोनम के बच्चों का साया भी नहीं पढ़ने देना चाहती थी। सोनम के बच्चे तो डाइनिंग टेबल पर रखे खाने को भी  हैरान होकर देखते थे। अपने कमरे में भाभियों को सोनम के बच्चों का पूरा ध्यान रखना पड़ता था कि कहीं वह कुछ चुरा ना ले। उसी परिवार की स्वाभिमानी सोनम भूख से मरना तो स्वीकार कर लेती लेकिन अपने ही घर के लोगों का  व्यवहार उसे अंदर तक तोड़ देता था।

कभी अपनी बहनों के पास भी चली जाती, तो किसी की सास , किसी की ननद या किसी बहन का पति ही, ऐसा असहज व्यवहार करता  कि वह बेचैन होकर वापस अपने उड़ीसा में ही चली जाती थी। नजदीक ही ससुराल के घर में भी उसका कोई हिस्सा नहीं बचा था।

अमीर परिवारों की इकलौती गरीब, जब कभी भूखे पेट अपने बच्चे के साथ दिन काटती तो यही सोचती थी कि काश उसके माता-पिता ने उसकी शादी की बजाय अगर पढ़ा दिया होता तो आज यह दिन ना देखना पड़ता। घूंघट करके घरों में बर्तन मांजने का काम भी उसे स्वीकार्य था, परंतु सूरज का क्रिमिनल रिकॉर्ड देखते हुए कोई भी उसे घर के काम पर भी ना रखता।

 कुछ दिन पहले ही उसने रोते रोते बहन को बताया कि उसका बेटा भी पिता की राह पर ही चल निकला और अबकी बार पुलिस उसे भी पकड़ कर ले गई। अच्छी बातें तो सब करते हैं पर सहारा कौन देता है?

उसके बाद काफी समय से सोनम का किसी को भी कोई फोन नहीं आया। बहने, आपस में सोनम के बारे में बात करके ही अपने कर्तव्य का इतिश्री कर रही थी। भाई अपने घर के कामों में व्यस्त थे। कमोबेश यही हालत भाभियों की भी थी। सोनम का फोन भी बंद पड़ा था । हम जैसे सामाजिक प्राणी उसके विषय में बातचीत तो कर रहे हैं पर उससे ज्यादा कुछ करने की ना हमारी हिम्मत थी  और शायद ना ही जरूरत। हम तो अपनी ही उलझन में उलझे हुए थे। हां परमात्मा से उसकी कुशलता की जरूर प्रार्थना कर रहे थे लेकिन——-।

 पाठकगण,समाज पतन की ओर जा रहा है, “रिश्तों का और प्यार का कोई मूल्य नहीं रह गया है”, यह बातें करते हुए कभी किसी ने अपने मन में झांकने का प्रयत्न किया है कहीं समाज के इस पतन में हमारा खुद का भी कोई योगदान तो नहीं? आजकल अपनों की उपेक्षा के समाचार हम हर जगह पढ़ते सुनते रहते हैं, क्या इसमें जिम्मेदारी हमारी नहीं है। पाठकगण आप सब की जानकारी के लिए बता दूं यह खबर बेहद दुखद है कि अंत में सोनम की भी आत्महत्या की खबर सबके पास है और उसकी मृत्यु की खबर सुनकर सारे भाई बहन भी गए थे परंतु है आत्महत्या थी, क्या इसे रोका जा सकता था? पाठकगण कमेंट्स द्वारा सूचित करें।

मधु वशिष्ठ फरीदाबाद हरियाणा

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