मन के हारे हार, मन के जीते जीत होती है बेटा और तुम्हे पता है *असली खूबसूरती शरीर नहीं मन होता है* तुम कोशिश तो करो बेटा सब हो जाएगा। हौसला देते हुए रोशनी के पिता हरि ने बोला।
रोशनी उदास होते हुए बोली “इसको कोई नहीं देखता है, क्या करूं मैं अपने इस अच्छे मन का जब मेरे पास ना रंग है ना ही सुंदर शरीर।”
तुम देखना कोई तो होगा जो तुम्हारी सीरत देखेगा ना कि सूरत, चलो अब जल्दी से त्यार हो जाओ फिर दफ्तर के पहले दिन ही तुम लेट ना हो जाओ।
रोशनी एक काबिल और मेहनती लड़की थी, पर बचपन में कुछ बीमारियों के चलते उसके शरीर मोटा हो गया था, जिससे उसको बड़ी शर्म आती थी और अब भी है। कई बार और कई जगह प्रयास करने के बाद भी उसका वजन नहीं घटा जिसके चलते उसने लोहों से घुलना मिलना छोड़ दिया था और बस अपने में रहती थी और कमरे में रह कर पढ़ाई करती रहती थी। आज उसका बड़े ऑफिस में पहला दिन है।
*दफ्तर में*
वो जैसे ही दफ्तर में घुसी सब लोग उसको देख रहे थे, फिर उसने अपने टीम लीडर के बारे में पूछा और उनके केबिन में गई। वहां पर अपना परिचय देने के बाद उसके मैनेजर ने उसको उसकी टीम से मिल वाया। पर जैसा उसने सोचा था ऐसा कुछ भी नहीं हुआ, किसी ने उसका कोई मजाक नहीं बनाया और उसको बड़े प्यार से बुलाया, सिर्फ एक को छोड़ कर, और वो था रोनी, उसका कारण रोशनी नहीं थी, वो अपना काम को ज्यादा महत्व देता था।
मैनेजर ने रोशनी को रोनी से मिलवाया और बताया कि वो उसके नजर में रहकर सारा काम सीखेगी और जाएगी कि यहां काम कैसे होता है।
रोशनी और रोनी ने एक दूसरे को “हेलो” बोला और रोनी ने पुरानी सेल्स की फाइल निकल कर उसको पुराने ब्रांड्स की सेल्स की योजनाएं पढ़ने को कहा।
सारा काम वो सही से कर रही थी, ऐसा पूरे एक हफ्ते चला। फिर कुछ ऐसा हुआ जिसकी उसने उम्मीद नहीं की थी।
रोशनी कैफेटेरिया जा रही थी कि उसने अपने कॉलीग्स को आपस में बोलते हुए सुना “यार ये रोशनी जब से आई है, रोनी सर ने हमारे ऊपर से ध्यान हटा लिया है, ऊपर से इतनी मोटी है कि कही किसी दिन ये कुर्सी ही न तोड़ दे।” फिर दूसरी बोली “सही में, मैने भी देखा है कि कितना भाव खाती है। अपने आप को ज्यादा ही बड़ा समझती है।” रोशनी ये सब सुनके हैरान हो गई और वहा से चली गई। आज उसका ध्यान काम में कम और घड़ी पर ज्यादा था। जैसे ही पांच बजे वो सीधा घर भागी। उसको ऐसे हालत में देख कर हरि ने पूछा “क्या हुआ बेटा? तुम इतनी जल्दी आ गई आज और तुम रो क्यों रही हो?” रोशनी ने सारी बात बताई और हरि ने सारी बात ध्यान से और विस्तार से सुनी, फिर उसने बोला “बेटा लोगों का काम है बोलना, तुम उनको अपने काम से दिखाओ कि कितनी काबिल हो तुम, तभी तुम सही और वो गलत साबित होंगे, जरूरी ही नहीं होता कि ईंट का जवाब पत्थर से ही देना होता है।” उसके पिता के समझाने के बाद, उसने सोचा अब वो किसी से मतलब नहीं रखेगी और उनसे काबिल बनकर दिखाएगी।
एक दिन रोनी छुट्टी पर था और एक ऐसा उनका ग्राहक आया जिसको संभालना मुश्किल नहीं बल्कि नामुमकिन के बराबर था, और उसको सिर्फ रोनी संभाल सकता था।
रोशनी को फसाने के लिए उसके साथ काम करने वाले कर्म चारियों ने उसे ग्राहक को संभालने के लिए भेज दिया।
रोशनी ने हिम्मत दिखाई और क्लाइंट से पूछा “सर आपको क्या चेंजेज चाहिए?” पहले तो वो गुस्से में रोनी को ही बुला रहा था पर रोशनी ने भरोसा दिलाते हुए बोला “सर आज मैं ही आपकी परेशानी सुन पाऊंगी, रोनी सर छुट्टी पर गए है। मैं पूरी कोशिश करूंगी आपकी सहायता करने की।” ऐसे करते करते एक घंटा हो गया और फिर रोशनी कैबिन से बाहर आई, सबको लगा कि वो लोग रोशनी का रोता हुआ मुंह देखेंगे और रोनी उस पर चिल्लाएगा, पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। बल्कि ग्राहक बहुत खुश हुआ और अपने अगले प्रोजेक्ट के लिए उसने रोशनी को चुना और जब दफ्तर में मैनेजर आए तो मैनेजर को भी बोल दिया कि वो अपने अगला प्रोजेक्ट का काम रोशनी के साथ ही करेंगे जिसे सुन कर सब हक्के बक्के रह गए। मैनेजर भी हैरान हुआ कि जिस ग्राहक को कोई आज तक नहीं संभाल पाया, रोशनी ने उसको बड़े आराम से हैंडल कर लिया जिसके चलते उसने रोशनी को बधाई थी और उसकी पगार बढ़ाने का वादा किया।
अगले दिन रोनी आया और उसने रोशनी को बोला “मुझे गर्व है, तुम पर ऐसे ही आगे बढ़ते रहो। अगर कल तुम ना होती तो शायद हम अपने इतने महत्वपूर्ण ग्राहक को खो देते।”
जिस पर रोशनी ने मुस्कुराते हुए बोला “सर मैने जो भी सीखा है आपसे सीखा है, अभी और भी बहुत सारी चीजें है, मुझे आपसे सीखनी है।”
उस शाम जब रोशनी घर आई तो उसने सारी बात अपने पिता हरि को बताई और इस पर उस पर गर्व करते उसके पिता बोले “शाबाश मेरा बेटा, शाबाश, मैने कहा था न कि तुम कुछ भी ठान लो तो कुछ भी हासिल कर सकते है।”
*कुछ सालों बाद*
रोशनी अब खुद एक टीम लीडर है, रोनी का भी प्रमोशन हो गया है, और वो काफी तरक्की कर रही है, और जो लोग उस से और उसकी तरक्की से जलते थे, वो आज भी वही के वही है।
लेखिका
तोषिका