*सहारा* – तोषिका

क्या बात है, बड़े खुश लग रहे हो श्यामलाल। क्या बात है ज़रा हमे भी तो बताओ, हस्ते हुए सूरज बोला। श्यामलाल मुस्कुराते हुए बोला “अरे ऐसी कोई बात नहीं है दोस्त बस आज मेरे बेटे नीरज का रिश्ता पक्का हो गया है कुछ महीनों में शादी है।” सूरज बोला “बधाई हो श्यामलाल! बधाई हो, होने वाली बहु कहा कि है?

नाम क्या है उसका? ज्यादा पढ़ी लिखी है?” अरे इतने सारे सवाल ” हमारे नीरज ने ही लड़की पसंद की है और उसी के दफ्तर में काम करती है।

उसका नाम मीरा है। बहुत ही सुंदर और सुशील है। हस्ते हुए श्यामलाल बोला”। सूरज ने इस पर कुछ देर विचार किया फिर बोला “कही ये शहर की लड़की तुम्हे तुम्हारे बेटे से दूर ना कर दे।” श्यामलाल बोला “ऐसा कुछ नहीं होगा, तुम देखना। मेरा बेटा बहुत समझदार है और उसने फैसला भी कुछ सोच समझ के ही  लिया होगा।”

अरे पापा कहा खो गए थे आप? श्यामलाल को हिलाते हुए मीरा बोली। श्यामलाल बोला “बेटा कही नहीं खोया था बस एक दोस्त की बात आज अचानक से याद आ गई थी, उसकी बात सच भी हुई और नहीं भी।” मीरा थोड़ी हैरान हुई

फिर बोली “कैसी बात पापा?” श्यामलाल थोड़ा हिचकिचाया फिर बोला “मीरा बेटा, मेरा एक दोस्त है सूरज, उसने तुम्हारे और नीरज के शादी के कुछ महीने पहले बोला था कि “मेरी बहु यानी कि तुम मुझसे मेरे बेटे को दूर कर दोगी और आज देखो वो मुझे छोड़ कर चला भी गया,

बस एक चीज का फरक है कि वो तुम्हारी वजह से नहीं, किसी और लड़की के चक्कर में तुम्हे, तुम्हारे इतने सालों के पवित्र बंधन को, मुझे और इस घर को छोड़ कर चला गया।”

श्यामलाल की आँखें में आंसू थे पर फिर भी वो अपनी बात आगे बोला “तुम्हे पता है बहु, मैने सीना ठोक कर सूरज को बोला था कि मेरा बेटा समझदार है, वो जो फैसला लेता है सही लेता है, पर मैं गलत निकला। बस मैं तो अब भगवान का शुक्र गुजार हू कि उन्होंने मेरी इस नालायक औलाद को तुम जैसी हीरे जैसे इंसान को अपनी पत्नी बनाने का सोचा।”

मीरा की आँखें में भी आंसू थे पर वो अपने पापा की आँखें में आंसू देख कर खुद पर काबू पाया और बोली “पापा जो होना था हो गया, शायद मेरी किस्मत में यही लिखा था पर मैं खुश हू कि मुझे आप जैसे पापा मिले और आपके बुढ़ापे में मुझे आपका *सहारा* बनने का ईश्वर ने मौका दिया।

ये सब बोल कर मीरा अपने कमरे में चली गई और रोने लगी, साथ में अपनी यादों को उस समय ले गई जहां पर कभी खुशी के पल भी हुआ करते थे।

१० अप्रैल २०२१ में हमारी शादी हुई थी, उस दिन आप बहुत खुश थे और मैं भी और हो भी क्यों ना, हमारी एक दूसरे के साथ शादी जो होने वाली थी।

*शादी का दिन*

मीरा आज मैं बहुत खुश हू, मेरी शादी तुमसे हो गई है, मुझे अब और कुछ नहीं चाहिए। अपने प्यार का इजहार करते हुए नीरज बोला और उसे गले लगा लिया।

दिन महीनों में बदल गए और फिर साल में। दोनों की पहली सालगिरा थी, जिसको उन्होंने बड़े धूम धाम से मनाया फिर ऐसे करके साल बीत रहे थे और दोनों में बात कम होने लग गई थी। मीरा को जब इस चीज का एहसास हुआ, उसे लगा कि शायद वह दोनों काम पर जाते है, इसीलिए एक दूसरे के लिए समय नहीं निकल पा रहे है, जिसके चलते उसने अपनी नौकरी छोड़कर, अपने रिश्ते को महत्व देना ज्यादा जरूरी समझा। पर इस से भी कुछ नहीं हुआ। धीरे धीरे उनके झगड़े होने लग गए पर फिर भी मीरा को उम्मीद थी कि उनका रिश्ता सुधरेगा पर ऐसा नहीं हुआ। एक दिन उसने नीरज के फोन में देखा कि किसी लड़की का कॉल आ रहा है और वो उसकी बॉस का फोन है , पहले तो उसे लगा सिर्फ काम के लिए है पर धीरे धीरे काफी कॉल बढ़ गए थे। कई बार तो रात में भी कॉल आने लग गया था। मीरा को शक होने लग गया था और उसका शक यकीन में तब बदला जब उसने नीरज को अपनी चौथी सालगिर पर उसको मना करके, अपनी बॉस के साथ डिनर करते देखा। उस दिन उसका भरोसा टूट गया था। जब नीरज घर आया तो मीरा ने सवाल किए और नीरज ने भड़कते हुए उसकी बेज़्जती की और तलाक की बात कर के वो घर से बाहर निकल गया। श्यामलाल ने समझाने की कोशिश की पर फिर भी उसके कानों में जू न रेंगी और वो हमेशा के लिए अपनी पत्नी और परिवार को छोड़ कर चला गया। आज अगर नीरज और मैं साथ होती तो आज हमारी पांचवीं सालगिरा होती, रोटी हुई और अपने बीते हुए कल की यादों से बाहर आती हुई मीरा खुद से बोली।

तभी उसके कमरे के दरवाजे पर ठक ठक हुई और जब दरवाजा खोला तो देखा श्यामलाल पैसे लेके खड़ा हुआ था। मीरा ने पूछा “ये क्या है पापा?” श्यामलाल बोला “बेटा ये कुछ मेरी जमा पूंजी है, तुम इसको ले लो और अपना कुछ नया बिसनेस शुरू करो, मुझसे तुम्हारी ये हालत नहीं देखी जाती, ये सब मेरे बेटे की गलतीं है। तुमने उसके लिए क्या कुछ नहीं किया, पर मैं नीरज को एक अच्छे बाप की तरह उसको सही राह नहीं दिखा पाया, इसीलिए मैं चाहता हू कि मैं एक बेटी के पिता होने का अच्छे से फर्ज निभाऊं और मुझे पता है, तुम जरूर काबिल होगी बेटा।

मीरा की आँखें भर आई और उसने श्यामलाल को गले लगा लिया।

*कुछ सालों बाद*

मीरा अब एक कामयाब बिजनेस वूमेन थी और अपने लिए और श्यामलाल के लिए उसने खूब मेहनत करके अपने दम पर हासिल किया, और कुदरत का करिश्मा ऐसा देखो कि नीरज को अब मीरा की कंपनी से सहारा लेना पड़ा क्योंकि उसको जॉब से निकाल दिया था।

लेखिका 

तोषिका

#सहारा

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