शीशे का महल: एक अनकही पारिवारिक दास्तान

 राधिका को देखते ही सीमा  अपने आंसुओं का बांध नहीं रोक पाई और फूट-फूटकर रोते हुए उसके गले लग गई। राधिका उसे संभालते हुए अंदर ले गई। कमरा अस्त-व्यस्त था। राधिका ने सीमा  को बिस्तर पर बिठाया और पानी पिलाया। जब सीमा  थोड़ी शांत हुई, तो राधिका ने उससे वे सारे सवाल किए जो पिछले कई हफ्तों से उसकी रातों की नींद उड़ाए हुए थे। सीमा  ने भर्राई हुई आवाज में जो कहानी सुनाई, वह किसी खौफनाक सपने से कम नहीं थी। उसने बताया कि समर कोई बिजनेसमैन नहीं, बल्कि एक शातिर धोखेबाज था। 

शर्मा परिवार के विशाल और हरे-भरे आंगन में हमेशा खुशियों की चहक रहती थी। इस घर की जान दो चचेरी बहनें थीं—राधिका और सीमा । राधिका स्वभाव से शांत, सुलझी हुई और यथार्थवादी थी, जबकि सीमा  चुलबुली, सपनों की दुनिया में खोए रहने वाली और बेहद भावुक लड़की थी। सीमा  के चेहरे पर हमेशा एक मासूम सी मुस्कान तैरती रहती थी, लेकिन पिछले कुछ महीनों से उसकी वह मुस्कान केवल उसके मोबाइल की स्क्रीन तक सिमट कर रह गई थी। वह परिवार के साथ बैठकर चाय पीने या हंसी-मजाक करने के बजाय अपने कमरे में बंद रहती और घंटों फोन पर किसी से बातें किया करती। राधिका, जो सीमा  को अपनी सगी बहन से भी ज्यादा मानती थी, उसकी इस बदलती हुई आदतों को बड़ी खामोशी और चिंता से देख रही थी। एक शाम, जब घर के सभी बड़े किसी शादी समारोह में गए हुए थे, राधिका ने ठान लिया कि वह सीमा  से इस विषय पर खुलकर बात करेगी। उसने सीमा  के कमरे का दरवाजा खटखटाया। सीमा  अपने फोन में इतनी मगन थी कि उसे दस्तक सुनाई ही नहीं दी। जब राधिका खुद अंदर गई, तो उसने देखा कि सीमा  किसी की तस्वीर देखकर बेतहाशा मुस्कुरा रही है।

राधिका ने प्यार से उसके कंधे पर हाथ रखा और पूछा कि आखिर वह कौन है जिसने उसकी रातों की नींद और दिन का चैन चुरा लिया है। सीमा  की आंखें एक अजीब सी चमक से भर उठीं। उसने बिना किसी झिझक के राधिका को बताया कि वह एक सोशल नेटवर्किंग साइट पर ‘समर’ नाम के एक लड़के से मिली है। सीमा  के शब्दों में एक ऐसा सम्मोहन था जैसे वह किसी जादू के असर में हो। उसने बताया कि समर एक बहुत बड़ा बिजनेसमैन है, जो उसे दुनिया की हर खुशी देना चाहता है। राधिका के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं। उसने सीमा  का हाथ अपने हाथों में लेकर बहुत ही कोमलता से समझाया कि आभासी दुनिया में दिखने वाले लोग हमेशा वैसे नहीं होते जैसे वे स्क्रीन पर नजर आते हैं। वहां लोग अक्सर अपने चेहरों पर एक नकली मुखौटा पहनकर घूमते हैं। राधिका की बात सुनकर सीमा  का मुस्कुराता हुआ चेहरा अचानक तन गया। उसकी आंखों में एक अजीब सी जिद और बगावत उतर आई।

सीमा  ने अपना हाथ झटकते हुए कहा कि दीदी, आप बहुत पुराने ख्यालों की हो। मेरी ऑनलाइन दुनिया के दोस्त असल जिंदगी के लोगों से कहीं ज्यादा सच्चे और अच्छे हैं। हम आज के जमाने के युवा हैं और इतने समझदार हैं कि हमें सही और गलत का पूरा ज्ञान है। मुझे समर से प्यार हो गया है और हम दोनों एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते। हम जल्दी ही शादी करने वाले हैं। मुझे तो लगता है कि मेरी किस्मत में मेरा जीवनसाथी इस इंटरनेट की दुनिया में ही मिलना लिखा था। यह कहकर सीमा  ने अपना फोन उठाया और बिना राधिका की तरफ देखे कमरे से बाहर चली गई। राधिका वहीं खड़ी रह गई, उसके दिल में एक अनजाना सा डर बैठ गया था। कुछ दिनों बाद, सीमा  ने अपने करियर का बहाना बनाकर एक दूसरे शहर जाने की जिद पकड़ ली। परिवार वाले पहले तो नहीं माने, लेकिन सीमा  की जिद और उसके आंसुओं के आगे उन्हें झुकना पड़ा।

सीमा  के जाने के बाद घर सूना सा हो गया। शुरुआत के कुछ हफ्तों तक सीमा  के फोन लगातार आते रहे। वह बहुत खुश नजर आती थी। लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, उसके फोन कॉल्स कम होने लगे। राधिका जब भी उसे फोन करती, उसका नंबर या तो व्यस्त आता या फिर बंद मिलता। कई बार फोन उठने पर सीमा  की आवाज में एक अजीब सी घबराहट और थकावट महसूस होती थी, जिसे वह काम के दबाव का नाम देकर टाल देती थी। राधिका का दिल अंदर ही अंदर घबरा रहा था। फिर लगभग एक महीने तक सीमा  का कोई अता-पता नहीं चला। न कोई फोन, न कोई मैसेज। राधिका ने उसके दोस्तों से भी संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी को कुछ नहीं पता था।

एक दिन शाम को राधिका डाइनिंग टेबल पर बैठी थी और सामने टीवी पर न्यूज़ चैनल चल रहा था। तभी ब्रेकिंग न्यूज़ की एक पट्टी स्क्रीन पर फ्लैश हुई। न्यूज़ एंकर एक बहुत बड़े ऑनलाइन ठगी और धोखेबाजी के गिरोह का पर्दाफाश होने की खबर दे रहा था। खबर की हेडलाइन थी—”वर्चुअल दुनिया का रियल धोखा: सपनों के राजकुमार ने लूटी कई लड़कियों की जिंदगी।” रिपोर्ट में बताया जा रहा था कि कैसे एक शख्स अमीर बिजनेसमैन बनकर लड़कियों को अपने प्यार के जाल में फंसाता था, उनसे पैसे ऐंठता था और फिर उन्हें बर्बादी के कगार पर छोड़कर गायब हो जाता था। टीवी स्क्रीन पर कुछ धुंधली तस्वीरें दिखाई जा रही थीं। अचानक राधिका की सांसें गले में अटक गईं। टीवी पर दिख रही एक पीड़ित लड़की के हाथ में वही कंगन था, जो राधिका ने सीमा  को उसके पिछले जन्मदिन पर तोहफे में दिया था। वह कंगन कस्टमाइज्ड था, वैसा दूसरा कोई हो ही नहीं सकता था। राधिका के हाथों से चाय का कप छूटकर जमीन पर गिर गया।

अगली ही सुबह, राधिका ने घर में किसी को कुछ बताए बिना उस शहर की ट्रेन पकड़ ली। सफर का एक-एक पल राधिका के लिए एक सदी जैसा बीत रहा था। कॉलेज और सीमा  के कुछ पुराने संपर्कों की मदद से, वह उस पते तक पहुंचने में कामयाब हो गई जहां सीमा  रह रही थी। वह शहर के एक बहुत ही पिछड़े और सुनसान इलाके में एक खस्ताहाल इमारत थी। राधिका धड़कते दिल के साथ सीढ़ियां चढ़ी और एक बंद दरवाजे के सामने जाकर रुक गई। उसने कांपते हाथों से दरवाजा खटखटाया। कुछ देर बाद दरवाजा खुला। सामने खड़ी लड़की को देखकर राधिका की आंखों से आंसू छलक पड़े। क्या यह वही सीमा  थी? बिखरे बाल, सूजी हुई लाल आंखें, और एक मुर्झाया हुआ चेहरा, जिस पर किसी गहरे सदमे के भाव स्पष्ट नजर आ रहे थे।

राधिका को देखते ही सीमा  अपने आंसुओं का बांध नहीं रोक पाई और फूट-फूटकर रोते हुए उसके गले लग गई। राधिका उसे संभालते हुए अंदर ले गई। कमरा अस्त-व्यस्त था। राधिका ने सीमा  को बिस्तर पर बिठाया और पानी पिलाया। जब सीमा  थोड़ी शांत हुई, तो राधिका ने उससे वे सारे सवाल किए जो पिछले कई हफ्तों से उसकी रातों की नींद उड़ाए हुए थे। सीमा  ने भर्राई हुई आवाज में जो कहानी सुनाई, वह किसी खौफनाक सपने से कम नहीं थी। उसने बताया कि समर कोई बिजनेसमैन नहीं, बल्कि एक शातिर धोखेबाज था। उसने सीमा  को शादी का झांसा देकर उससे लाखों रुपये ठग लिए थे। सीमा  ने अपने सारे गहने और परिवार से छुपकर लिए गए कर्ज के पैसे उसे दे दिए थे। जब सीमा  ने शादी का दबाव बनाया, तो वह उसे इस टूटे-फूटे कमरे में छोड़कर हमेशा के लिए गायब हो गया।

सीमा  रोते हुए कह रही थी, “दीदी, आपने सही कहा था। मैं उस मुखौटे के पीछे का असली चेहरा नहीं देख पाई। मैं प्यार में अंधी हो गई थी और मुझे लगा कि वही मेरी दुनिया है। लेकिन उसने सिर्फ मेरा पैसा नहीं लूटा, मेरा विश्वास, मेरा आत्मसम्मान सब कुछ खत्म कर दिया।” राधिका ने सीमा  का माथा चूमा और उसके आंसुओं को पोंछते हुए कहा कि रिश्ते और इंसान स्क्रीन पर नहीं, बल्कि हकीकत की जमीन पर परखे जाते हैं। राधिका ने उसे समझाया कि जिंदगी यहीं खत्म नहीं होती। परिवार वह मजबूत जड़ है, जो आंधी में भी पेड़ को गिरने नहीं देती। राधिका उसी शाम सीमा  को लेकर वापस अपने घर लौट आई। हालांकि सीमा  के घाव भरने में समय लगने वाला था, लेकिन उसे यह समझ आ चुका था कि आभासी दुनिया का चमकता हुआ कांच कभी असली हीरे की जगह नहीं ले सकता।

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