वो अब भी है दिल में! ! (भाग 3)- गीता चौबे “गूँज” : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : ‘शेखर.. कहाँ चले गए तुम अचानक ‘… सुरभि चिल्ला उठी। पागलों की भांति दौड़ दौड़ के चारों तरफ़ खोजने लगी…. पर दूर दूर तक शेखर का कहीं नामोनिशान नहीं था…। थक हार कर सुरभि वापस घर चली आयी। वह बहुत असमंजस में थी कि शेखर अचानक बिना बताए कहाँ चला … Read more

वो अब भी है दिल में! ! (भाग 2)- गीता चौबे “गूँज” : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi : सुरभि के पिता खुशी से इतने उतावले थे कि वे उसी वक़्त सुरभि के पास पहुँच कर उसे सरप्राइज देना चाहते थे। वे सुरभि की माँ के साथ खुद ही कार ड्राइव कर चल पड़े। पर होनी को कुछ और ही मंजूर था… एक तीखे मोड़ पर उन्होनें संतुलन खो … Read more

वो अब भी है दिल में! ! (भाग 1)- गीता चौबे “गूँज” : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi :‘ शीतल मंद सुरभि बह बाउ…’ तुलसीदास जी की इस पंक्ति को सुरभि के लब गुनगुना रहे थे जिसे वह साक्षात आत्मसात कर रही थी। बड़ा ही सुहावना मौसम था। सुंदर सुवासित समीर मंद गति से बह रहा था मानो हौले – हौले किसी महबूब की भांति सुरभि के बदन को … Read more

बड़प्पन (भाग 2)- विभा गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : जब नेहा निखिल की पत्नी बन गई तो अपनी बहन को देवरानी बनाने का सुनीता की इच्छा पर पानी फिर गया।बस उसी बात का गुस्सा वह गाहे-बेगाहे नेहा को जलील करके निकालने लगी।कभी उसपर अपने पैसे का रौब दिखाती तो कभी घर के नौकरों के सामने उसे ‘ छोटे घर … Read more

बड़प्पन (भाग 1)- विभा गुप्ता   : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : ” क्या नेहा….इतने दिनों में एक सैंडविच बनाना भी नहीं सीख पाई…।” कहते हुए सुनीता ने हाथ में लिया हुआ सैंडविच ज़मीन पर फेंक दिया।तभी उसकी एक सहेली व्यंग्य से बोली, ” इसके मायके में किसी ने ब्रेड देखा ही नहीं होगा..।” इतना सुनते ही ड्राइंग रूम में बैठी सुनीता … Read more

ये तो मेरा फर्ज था – पूजा शर्मा : Moral Stories in Hindi

आरोही सरकारी डॉक्टर बन चुकी थी ,अपने ही अस्पताल के डॉक्टर रोहित से आज उसकी सगाई हो गई थी और दो दिन बाद ही उसकी शादी है। सगाई का फंक्शन खत्म होने पर सभी मेहमानों को विदा करने के बाद वह जैसे ही अपने घर आते हैं आरोही अपने कमरे में जाकर अपनी मम्मी पापा … Read more

बहू ससुराल को करे तो अच्छी पर बेटा ससुराल को करता बुरा क्यों लगता… (भाग 2) – रश्मि प्रकाश 

” अच्छा सुनो कल राशि के पैरेंट्स के घर जाना…. कुछ लेकर जाना होगा क्या….. पहली बार यहाँ से जा रहा तो मुझे कुछ समझ नहींआ रहा है ….वहाँ से तो तुम पता नहीं क्या क्या  थमा देती थी ।” निकुंज ने जैसे ही बोला सरला जी की रही सही चिन्ता सच में बदलतीनज़र आने … Read more

बहू ससुराल को करे तो अच्छी पर बेटा ससुराल को करता बुरा क्यों लगता… (भाग 1) – रश्मि प्रकाश 

“ देखो तुम्हारी चिंता तो जायज है, पर ये भी तो समझो ना वो भी अब उसका ही परिवार है….. सरला अपने बच्चे पर भरोसा रखो….एकतो तुम्हारी वो बेकार सी सहेलियाँ जाने क्या पटी पढ़ा जाती तुम्हें और तुम बस चिन्ता में मरी जाती हो…. अरे अपने दिए संस्कार परभरोसा तो रखो…बेकार की चिंता कर … Read more

अधूरी प्रेम कहानी (भाग 1) – लखविंदर सिंह संधू : short story with moral

short story with moral : बघेल सिंह अपने चार भाइयों में सबसे छोटे थे। बघेल सिंह के पिता के पास सिर्फ 20 एकड़ जमीन थी । बघेल सिंह के तीन बहने भी थी सभी की शादी हो चुकी थी। सारे परिवार में सिर्फ बघेल सिंह ने हीं मैट्रिक की थी ।बघेल सिंह के चार बच्चे … Read more

एक बार फिर (भाग 44 ) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

राजशेखर वेड्स प्रिया हल्दी स्पेशल अगले दिन सुबह सब हल्दी की रस्म की तैयारियां कर रहे थे। दी दोनों बच्चों को तैयार करके प्रिया के पास आ गई। प्रिया को देख कर उनको गुस्सा आ गया। प्रिया तुम अभी तक तैयार नहीं हु‌ई हल्दी मेरी है या तुम्हारी???? आपको देख कर तो लग रहा है … Read more

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