दूसरी पारी का वह पहला दिन (भाग 1) – नरेश वर्मा 

सोचा था कि आज देर से सोकर उठूँगा क्योंकि यह एक बंधन मुक्त सुबह होगी ।किंतु शरीर जो इतने वर्षों से चली आ रही दिनचर्या का अभ्यस्त रहा था उसने नियत समय सुबह के साढ़े पाँच बजे आँखें खोल दीं।अब शरीर का भी क्या दोष ,उस बेचारे को तो नहीं पता था कि इस सुबह … Read more

मुसीबत – वीणा सिंह : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : पांचवी कक्षा में संजय का नामांकन हुआ. सारे बच्चों से अलग गुमसुम सा रहता! उसी स्कूल में दो साल पहले तीसरी कक्षा में एडमिशन लिया था कविता ने! ये उम्र होती है जिसमे लड़कियां और लड़के मस्त बेफिक्र और खूब बातूनी होते हैं. लड़कियां भी खूब शरारती नटखट और शोख … Read more

आपकी पूर्णिमा – रचना कंडवाल: Moral Stories in Hindi

 पल्लवी और अमित की चार साल पुरानी शादी का अंत हो चुका था। पल्लवी ने उसे कभी दुःख के अलावा कुछ नहीं दिया था।मेजर अमित शर्मा की शादी शहर के सबसे बड़े वकील देवेन्द्र कुमार जी की बेटी से बहुत धूमधाम से हुई थी। दोनों के माता-पिता की अच्छी खासी दोस्ती थी। पल्लवी जब शादी … Read more

आपकी पूर्णिमा (भाग 1) – रचना कंडवाल: Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : पल्लवी और अमित की चार साल पुरानी शादी का अंत हो चुका था। पल्लवी ने उसे कभी दुःख के अलावा कुछ नहीं दिया था।मेजर अमित शर्मा की शादी शहर के सबसे बड़े वकील देवेन्द्र कुमार जी की बेटी से बहुत धूमधाम से हुई थी। दोनों के माता-पिता की अच्छी खासी … Read more

सिक्के के दो पहलू – संगीता त्रिपाठी  : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : “सुन मीता, बड़ी खुशखबरी हैं, काम खत्म कर आजा लंच ब्रेक में पार्टी करते हैं “। नैना ने अपनी दोस्त और कलीग मीता को फोन कर बोला ।    “प्रमोशन लिस्ट आ गई क्या..?”   “हाँ पर ऑफिस की नहीं, मिलने पर बताउंगी “कह कर नैना ने फोन काट दिया।        मीता बड़ी … Read more

दोयम दर्जे की सोच (भाग 2)- आरती झा आद्या

थोड़ी देर में ही लड़कियों की भीड़ लग जाती है… हमारे पास मरने के अलावा रास्ता ही क्या है… रोज रोज नोचे जाने से तो अच्छा है.. एक बार में खुद को खत्म कर लो.. एक लड़की दूसरी से कहती है। रोज रोज नोचे जाने से क्या मतलब है इसका.. जैसे ही दिया ने उनसे … Read more

दोयम दर्जे की सोच (भाग 1)- आरती झा आद्या

दिया उम्र पंद्रह माता पिता की लाडली उनकी नयनतारा आज अदालत के कठघरे में खड़ी थी। क्या दोष था उसका.. जबरदस्ती घर में घुस आये उन गुंडों से बेटी को बचाने में माता पिता की मौत देखना.. खुद को बचाने में गलती से एक लड़के को चाकू लग जाना.. और उस लड़के का तत्काल मर … Read more

घरवाले है या मेहमान – रश्मि प्रकाश  : Moral Stories in Hindi

‘‘सुनो …आज माँ ,भैय्या ,भाभी और दोनों बच्चे पन्द्रह दिन की  छुट्टियां मनाने यहाँ हमारे पास आ रहे हैं…उनके सत्कार में कोई कमी नहीं रहनी चाहिए…पहली बार आ रहे हैं वो लोग हमारे पास …तो समझ लो तुम्हारे लिए ये परीक्षा की घड़ी है….उनके पास हम जब भी गए तो दो चार दिन के लिए … Read more

कालचक्र (भाग 2)- डॉ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : “मां तुम्हारी नाराजगी मुझसे है न … मेरे भूख से तो नहीं ..सब बताऊंगी .. पहले पेट में तो कुछ डालने दो.”   मां सब-कुछ बर्दाश्त कर सकती है किन्तु संतान की भूख-प्यास नहीं..हाथ का काम छोड़ मां ने उसके हाथ में सुबह का ठंढा दाल-चावल और थोड़ी सी सब्जी पकड़ा … Read more

कालचक्र (भाग 1)- डॉ उर्मिला सिन्हा : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : समय का पहिया घुमता रहता है ..कभी उपर कभी नीचे. कालचक्र के झंझावातों से इस नश्वर संसार में कोई अछूता नहीं है.   इति जब घर लौटी.शाम ढल चुकी थी.. बरामदे में ताऊ दोनों हाथ पीठ पर बांधे चहलकदमी कर रहे थे…सांझ के धुंधलके में उनके चेहरे का भाव इति को … Read more

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