दिव्या(भाग–1) : Moral stories in hindi

दिव्या, जैसा नाम, देखने में वैसी ही दिव्य। बड़ी बड़ी आँखें, मुस्कुराता चेहरा, सुतवां नाक, दूध की तरह गोरी,  गोल मटोल छोटी तीन साल की दिव्या..मनमोहिनी..जो भी देखता बस बच्ची को देखता रह जाता। माता– पिता, दादी की दुलारी..रोते को हँसा देने वाली..छोटी सी होते हुए भी और बच्चों की तरह जिद्द करना उसके स्वभाव … Read more

सफ़र मुहब्बत का (भाग -19) : Moral Stories in Hindi

अब तक आपने पढ़ा…. गौरव अनुराधा को लेकर घर आ जाता है… सब लोग उस से मिलते है शांति जी जब तक अनुराधा पूरी तरह से ठीक ना हो जाए तब तक उसे जाने की इजाज़त नही देती… अब आगे…. गौरव के ऑफिस जाने के बाद शांति जी  अपने कमरे में थी और बैठी हुयी … Read more

एक बार फिर (आखिरी भाग ) – रचना कंडवाल : Moral stories in hindi

राजशेखर वेड्स प्रिया( शादी स्पेशल) राजशेखर और प्रिया की हल्दी की रस्म हो चुकी थी। पूजा के बाद दी ने उसे आराम करने को कहा वो रूम में आ गई अब आगे – उसने आंखें मूंद लीं कि तभी उसका फोन बज उठा। शेखर का फोन था। हेलो! मेरी जान प्रिया मुस्कराई पर चुप रही। … Read more

सिर्फ पत्नी हो गृहस्वामिनी नहीं (भाग 2 ) – रश्मि प्रकाश

शादी के बाद नंदनी ने महसूस किया कार्तिक बस अपने से मतलब रखता था ..उसे नंदनी से कोई मतलब नहीं था वो बस उसके घर में रहे काम करे और उसके माता-पिता का ख़्याल रखें ना उससे ज़्यादा वो कोई ख़्वाहिश रखें… कार्तिक अपने लिए जो चाहे खरीद लें पर जब नंदनी उससे कहती तो … Read more

सिर्फ पत्नी हो गृहस्वामिनी नहीं (भाग 1) – रश्मि प्रकाश

“ कितनी बार कहा है तुमसे इस घर के मामलों से दूर ही रहो… जब देखो तब अपनी नाक हमारे मामलों में घुसेड़ती रहती हो… अपना दिमाग़ मत चलाया करो…. बेकार का झमेला करना कोई तुमसे सीखें..।” ग़ुस्से में नितिन प्रिया  पर चिल्ला रहा था … ऐसे शब्द सुनकर नंदनी का खून खौल गया…जो आज … Read more

“प्रतिरोध” ( भाग 2)- डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा : Moral stories in hindi

बुआ बनारसी साड़ी पहनकर माथे पर आँचल डाले बाहर निकली। ये बनारसी साड़ी की भी एक कथा है । बुआ जब विदा होकर ससुराल आई थी तब मैके वाले ने अपने हैसियत से ढेरों साड़ियां दी थीं पर उसमें बनारसी साड़ी नहीं थीं। दुल्हन को साधारण चुनरी में देख बुआ के सास ससुर भड़क गए। … Read more

“प्रतिरोध” ( भाग 1)- डॉ .अनुपमा श्रीवास्तवा : Moral stories in hindi

मानसी बुआ आज बहुत खुश थीं। चंदेरी साड़ी और बालों में गजरा लगाए वह पूरे हवेली में चक्कर लगा रही थीं। खुश होने का कारण भी था उनके बेटे की शादी जो तय हो गई थी। सगुन का दिन आज के लिए ही निकल आया था। लड़की वाले पंहुचने वाले थे।  इतने सालों के बाद … Read more

अपनों का एहसान कैसा यह तो मेरा फर्ज था – कामिनी मिश्रा कनक : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : इस उम्र में हम दोनों तेरे ऊपर बोझ बन गए , हमें माफ कर देना  बेटा , तेरी काकी की वजह से मैं लाचार हो गया था। तुम चिंता मत करो मैं काकी को लेकर यहां से चला जाऊंगा ।  अब बहुत दिन हम दोनों आराम कर लिए , गांव … Read more

समय बलवान है – विभा गुप्ता  : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  : आसमान में गरजते बादलों को देख गोमती समझ गई कि इंद्र देवता कभी भी अपनी कृपा बरसा सकते हैं तो उसने चंपा और जमुना को कहा कि वे जल्दी-जल्दी हाथ चलाकर फ़सलों की कटाई पूरी कर ले और खुद भी तेजी-से हंसिया चलाने लगी तभी उसने देखा कि उसका पड़ोसी … Read more

जुनून बना पहचान – रश्मि प्रकाश : Moral stories in hindi

Moral stories in hindi  :  ‘‘माँ इस बार बारहवीं बोर्ड के बाद मुझे नया मोबाइल दिला दोगी?‘‘ कुशल ने अपनी माँ पूछा ‘‘ अरे हर साल क्या मोबाइल ही बदलते रहोगे? अभी नहीं बाद में देखेंगे।‘‘ कहकर गार्गी बेटे को मना कर दी जब रिजल्ट आया तो कुशल के अच्छे नम्बर और रैंक देख पापा … Read more

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