पुत्र से माफ़ी – रश्मि प्रकाश : Moral Stories in Hindi

“हद करते हो सुरेश…. कितना समझाया था तुम्हें पर तुमने मेरी जरा भी बात नहीं मानी…क्या ज़रूरत थी छोटे को दुकान पर बैठाने की …अच्छा ख़ासा वो शहर में पढ़ाई कर रहा था पर तुम्हें तो उसका शहर जाना भी नहीं पसंद आया और ना उसका पढ़ाई करना ।” मनोहर बाबू अपने बड़े बेटे को … Read more

एक निराला सच – माधुरी गुप्ता : Moral Stories in Hindi

मीरा आज एयरपोर्ट पर अपने मंगेतर अंगद को रिसीव करने आई थी,उसे देख कर अंगद खुशी से उछल पड़ा।वाउ मीरा तुम तो ऐसे सज धज कर आई हो मानो आज ही शादी के मंडप में बैठने जारही हो। कौन जाने हमारी आज ही शादी होजाय,और तुम्हारे लिए तो एक और भी सरप्राइज है ,जिसको सुन … Read more

तुमने तो मेरा गला ही पकड़ लिया – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : “राहुल बेटा ये तुम किसको घर ले आये हो, मैंने पहले ही कहा था कि मेरे कमरे में ऐसे वैसे लोग नहीं आने चाहिए, तुम अपनी ये यारी दोस्ती बाहर की बाहर ही निभाया करो, मेरे घर में दो बेटियां हैं तो मै इस तरह के लोग घर में आने … Read more

दिव्या(भाग–7) – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

चंद्रिका और सुधा भी नाश्ता कर फ्री हो गईं थी। “चंदू.. राघव ने दिव्या के आराम पर ध्यान देने के लिए कहा है। किसी तरह का स्ट्रेस ना ले वो.. ध्यान रखना और उसके कमरे को भी थोड़ा खाली करवा लेना। दिव्या का कमरा ही उसे उपयुक्त लग रहा है उपचार के लिए। मैं भी … Read more

मां तुझे सलाम – कविता भड़ाना : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : एक पार्टी के बाद नशे में धुत अभय को घर छोड़ने आया उसका दोस्त सुमेश, अभय की बेहद खूबसूरत बीवी को देखकर, मौके का फायदा उठाने के उद्देश्य से स्वाति का हाथ पकड़कर बोला…”स्वाति तुम इतनी सुंदर हो और ये तुम्हारा पति, तुम्हारी बिलकुल कदर नही करता”….. क्यों नहीं तुम … Read more

खानदान – कामिनी मिश्रा कनक : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : कमला जी रात का खाना खाकर, दवाई खाने के लिए सोफे पर बैठी ही थी ….की तभी अचानक दरवाजे की घंटी बजती है……..  इतनी रात को कौन आया होगा अब तो बहू भी सो गई है , सुदर्शन भी ऑफिस के काम से बाहर गया हुआ है…… वो भी 2 … Read more

बहु भी बेटी- गौरी भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

Moral Stories in Hindi : श्यामू काका !बहू को नीचे बुलाओ। मेम साहब बहू घर पर नहीं है उनको बाहर गए तीन घंटे हो गए। श्यामू काका की बात सुनकर सुषमा जी गुस्से में बोली-क्या !!!…बहू घर में नहीं है? नहीं मैम साहब…… श्यामू धीरे से बोला। “मां देख लो आप की नई बहू आपका … Read more

बिन तेरे ज़िंदगी (भाग 3) – बेला पुनीवाला

रीमा : उसमें धन्यवाद की क्या बात है आंटी जी ? जैसी आपके लिए नैना वैसी ही मैं। तो फ़िर मैं अपनी बहन जैसी सहेली को कैसे दुखी होते हुए देखूँ ? अब आप उसकी बिलकुल फ़िक्र मत कीजिएगा। देखना आप, कुछ ही दिनों में नैना पहले की तरह हंसती-मुस्कुराती आपको नज़र आएगी। अपनी ज़िंदगी … Read more

बिन तेरे ज़िंदगी (भाग 2) – बेला पुनीवाला

 कहते हुए तूफ़ान की तरह नैना नीचे रसोई में चली गई, रीमा ने उसे रोकने की कोशिश की मगर वह शायद उसके पूछे जानेवाले सवालों से भी भाग रही थी। रीमा ये देख़ एक पल के लिए सोच में पड़ गई, नैना ऐसा क्यों कर रही है, पहले तो वह काम न करने का बहाना … Read more

बिन तेरे ज़िंदगी (भाग 1) – बेला पुनीवाला

नैना एकदम चुपचाप सी अपने कमरें में बैठी है, वह ना तो घर में किसी से कुछ बात करती है, नाहीं किसी से  कुछ सलाह मशवरा करती है। बस खिड़की की बाहर नज़र गड़ाए ऊपर आसमान की ओर देखे जा रही है। खुला आसमान, आसमान के पीछे बादलो में सूरज, सूरज की तेज़ किरणें सीधे … Read more

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