अपने लिए जीना गुनाह नहीं – अंजना ठाकुर   : Moral stories in hindi

बहू तुम ये योगा की क्लास लगा रही हो क्या जरूरत है फिजूल खर्ची की और फिर अभी तुम्हारे बच्चे छोटे है उन्हे कैसे जाओगी छोड़ कर आशी की सास डांटती हुई बोली आशी बोली मांजी इसमें फिजूल खर्ची क्या हमारे शरीर के लिए योगा सेहतमंद होता है घर पर नियमित हो नही पाता और … Read more

दायित्व – मनीषा सिंह : Moral stories in hindi

“बेटा बहुत दूर है हॉस्पिटल ।काफी भीड़ और ट्रैफिक वाली जगह भी है  गाड़ी चलनी मुश्किल हो जाएगी।  इसलिए हम मोटरसाइकिल से ही चलते हैं जल्दी निकल जाएंगे । सुरेंद्र जी अपने बेटे जतिन से कहा  “नहीं बाबूजी आप इतने बीमार हैं! मोटरसाइकिल आपके लिए सही नहीं रहेगा और बाहर गर्मी भी काफी है।  हम … Read more

दायित्व – मीनाक्षी सिंह : Moral stories in hindi

राघव बेटा….. ज़रा शाम को सरला  (पत्नी ) की दवा लेता आना बाजार से…. खत्म हो गयी है …. एक दिन नहीं हुआ दवा खत्म हुए…. सांस फूलने लगी है उसकी…. शिवदयाल जी ऑफिस जाते हुए बेटे  राघव से बोले….. जी पापा… ले आऊंगा…. और कुछ…..?? राघव पूछता है ……. भईया…. पेपर आने वाले है … Read more

दायित्वों का निर्वहन – पुष्पा जोशी : Moral stories in hindi

दीपक बेटा आप छत पर हैं, और मैं आपको पूरे घर में देख आई, आज मैं बहुत खुश हूँ , आपकी सफलता की खुशी में मैंने आपके लिए आपकी पसन्द का गाजर का हलुआ और आलू की टिकिया बनाई है, जया जी की खुशी उनकी वाणी में स्पष्ट नजर आ रही थी। छत पर सीढ़ियाँ … Read more

दायित्व संस्कारों का – अंजना ठाकुर : Moral stories in hindi

ये तुमने क्या किया गंवार जाहिल औरत इतने महंगे डिनर सेट की प्लेट तोड़ दी अब पूरा सेट खराब हो गया मेरा _अनु गुस्से मै अपनी मेड से बोली  काकी सुनीता की आंख मैं आंसू आ गए बोली बहुरानी  गलती से टूट गई हम तो कब से काम कर रहे है इस घर मैं आज … Read more

तुम पर सिर्फ मेरा अधिकार है – हेमलता गुप्ता : Moral stories in hindi

बालकनी में गीले कपड़े डाल रही थी तभी नीचे उसकी झलक दिखाई दी, कितने दिन हो गए, उन्हें देखे हुए! आज अचानक नजर पढ़ते ही खुशी से चीख निकल गई, तभी कोई और उनसे मिलने आ गया और उनके ऊपर हाथ फेरने लगा, मुझे यह सब सहन नहीं हो रहा था, और मैं बालकनी में … Read more

एक पत्र – डॉ उर्मिला सिन्हा : Moral stories in hindi

स्थान-गुलमोहर तले   दोस्त,  आज बरसों बाद मैं तुम्हें पत्र लिख रही हूं। गृहस्थी के मकड़जाल में कुछ ऐसी उलझी कि दीन-दुनिया ही भुला बैठी। अपना तन-मन धन सर्वस्व न्यौछावर कर बैठी अपने संसार को सुखमय बनाने के लिए।मन के किसी कोने में तुम्हारी याद क्षणभर के लिए ही सही विद्युत तरंगों की भांति चमक जाती … Read more

अर्धांगिनी की कद्र कीजिये पतिदेव – संध्या त्रिपाठी : Moral stories in hindi

 उठो विप्लव जल्दी से तैयार हो जाओ आज ड्राइवर नहीं आया है तो गाड़ी लेकर बुकिंग में तुम्हें ही जाना पड़ेगा बद्री प्रसाद जी ने अपने बेटे विप्लव को उठाते हुए कहा….! अरे पापा यह नौकरों वाला काम मुझे पसंद नहीं है.. कह कर विप्लव करवट बदल कर फिर सो गया…।  देखो विप्लव यह बिजनेस … Read more

अपने प्रति दायित्व – गीता वाधवानी : Moral stories in hindi

आज विभा जब बाजार गई, तब अचानक एक महिला उससे टकरा गई। विभा ने कहा-“सॉरी !”  उसे औरत ने भी कहा-“सॉरी”और जब दोनों ने एक दूसरे को देखा, तब 2 मिनट लगे एक दूसरे को पहचानने में। हालांकि पहले विभा ने पहचान लिया-“अरे शिल्पा तू।”  शिल्पा उसकी एक पुरानी सहेली थी। कई वर्षों बाद दोनों … Read more

प्रेम भरे रिश्ते – सीमा प्रियदर्शिनी सहाय : Moral stories in hindi

मेरे गृहनगर में मेरा स्थानांतरण कर दिया गया था।  मन ही मन बहुत ज्यादा खुशी हो रही थी। ऐसा भी हो सकता है विधाता के इस निर्णय पर…! मन में जितनी खुशी थी उससे ज्यादा रोमांचक फील कर रही थी। अपने माता-पिता के घर में जाकर रहना, कितनी खुशी की बात होती है…!! बड़े भैया … Read more

error: Content is protected !!