समयचक्र – माधुरी गुप्ता : Moral stories in hindi

गिरधारीलाल जब से गांव से शहर आगरा आए थे उनकी किस्मत चमकने लगी थी।गांव में खेती बाड़ी करके घर का गुज़ारा होता था।जब तक उनके पिताजी थे तब तक तो ठीक था।कयोंकि खेती में मेहनत तो पूरी करनी पड़ती थी परन्तु नफा उतना नहीं मिलपाता था ।फिर कभी बारिश कम होने से सूखा या बारिश … Read more

समयचक्र – आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

“ई फोन भी ना, बजता है तो बजता ही चला जाता है। कोनो बच्चा भी घर में नहीं है, ई संजना भी ना जब आएगी कोनो ना कोनो नया चीज पकड़ा कर चल जाएगी।” अपनी बड़ी सी कोठी के आकार के घर के ओसारे पर सूप में चावल लिए बीनती विमला बड़बड़ा रही थी। “जी … Read more

पुरानी सुंदर यादें – गीता वाधवानी : Moral stories in hindi

काफी पुराना किस्सा है। मेरी दादी की एक पक्की सहेली थी जिनका नाम था सरला। उनके बड़े बेटे सुनील का विवाह हो चुका था और अब उनके छोटे बेटे हितेश की शादी थी। हमारे घर विवाह का निमंत्रण पत्र आ चुका था। दादी की सहेली को हम लोग दादी जी ही बुलाते थे।  मेरे डैडी … Read more

टूटा भ्रम : Moral stories in hindi

रधिया की मां! कहे देता हूं इस बार राधा को स्कूल भेजा क्रिकेट खेलने तो उसे बाद में पीटूंगा, पहले तेरी शामत आ जायेगी। बुधिया ने चीखते हुए अपनी पत्नी सुख्खी से कहा। सुख्खि भी जैसे ढीठ बन गई थी अपने पति की गीदड़ भभकियां सुन सुन कर। कहां जाती है अब स्कूल वो?सारे दिन … Read more

कछुआ और खरगोश –  आरती झा आद्या : Moral stories in hindi

छठी में पढ़ने वाले रोहित के स्कूल बस से उतरते ही उसके सवाल जवाब शुरू हो जाते था। स्कूल में किसने क्या किया! किसे आज सजा मिली। किसे टीचर ने प्यार किया। किससे लड़ाई हुआ, किससे आज से बात नहीं करनी है। आज उसकी नजर में कौन अच्छा बच्चा था, कौन उसे पसंद नहीं है। … Read more

मेरी बेटी घुट घुट कर नहीं जीएगी –   हेमलता गुप्ता : Moral stories in hindi

मां मां… देखो तो पापा को, कितने उतावले हो रहे हैं आज , कितनी बार दरवाजे के चक्कर काट चुके हैं! हां भई.. उनकी लाडली बिटिया ससुराल में पूरे 15 दिन विताकर वापस आ रही है! पता नहीं पापा 15 दिन कैसे रहें रिया के बिना! चुप कर… क्या तू लाडला नहीं है हमारा, अरे.. … Read more

समयचक्र यही है…रश्मि झा मिश्रा : Moral stories in hindi

आज से कोई चालीस पचास साल पहले तक… शादियां घर के बड़े ही पूरी तरह तय करते थे… लड़के लड़कियों को बस तैयार होकर मंडप में बैठना होता था… खासकर बड़े घरानों में तो शादी से पहले एक दूसरे को देखना… नाक कटाने वाली बात होती थी…और यदि किसी तरह देख भी लिया… तो उसे … Read more

कुछ उनकी सुनें, कुछ अपनी कहें – प्रियंका सक्सेना : Moral stories in hindi

“तुम बिन मैं कुछ नहीं, राधा ना जाओ मुझे छोड़कर| ” राघव बिलख बिलख कर राधा के निर्जीव शरीर से लिपट कर कह रहे थे| आरती और प्रकाश भी फफक फफक कर रो रहे थे|  अपने पिता को राधा से अलग करते हुए प्रकाश रोते रोते बोला, “पापा, मम्मी चली गई हैं हमेशा के लिए … Read more

समय का फेर – संगीता त्रिपाठी : Moral stories in hindi

सुबह -सुबह फोन की घंटी बजी, उमा जी घबरा गई, इस समय किसका फोन आ सकता हैं, अभी तो पांच ही बजे हैं। फोन पर सना की आवाज सुन उमा और घबरा गई “सब ठीक हैं सना,उधर से सना की रूहासी आवाज उनको विचलित कर दे रही थी      “क्या, तेरे सास -ससुर हमेशा के लिये … Read more

समय का बदलाव – मंजू ओमर : Moral stories in hindi

ये समय चक्र है हमेशा एक सा नहीं रहता कभी किसी का पलड़ा भारी तो कभी किसी का। लक्ष्मी आंटी का बड़ा रूतबा था अपने घर पर , अपने बहुओं पर , रिश्तेदारों में , मुहल्ले पड़ोस में।हर समय बस वो अपनी अपनी ही कहती रहती है घर के बाहर थोड़ी देर को खड़ी हो … Read more

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