गुरुर… किस बात का – हेमलता गुप्ता : Moral Stories in Hindi

क्या रानू दीदी… पूरे 1 साल बाद गर्मियों की छुट्टियों में बच्चों के साथ आई हो  और कह रही हो बस चार-पांच दिनों के लिए ही आई हूं, तुम्हारे जीजाजी को खाने की परेशानी हो  जाती है, इस बार  मैं कुछ नहीं सुनने वाला और हां आज दोपहर में तैयार रहना हम सब वाटर पार्क … Read more

बेटी कह देने से बहू बेटी नहीं हो जाती। – अर्चना खंडेलवाल : Moral Stories in Hindi

मानसी, ये दूध का गिलास निधि के कमरे में दे आ, उसकी परीक्षाएं चल रही है, दूध पीयेंगी तो पढ़ने में भी मन लगेगा, अपनी सास आरती जी की बात सुनकर मानसी अपना खाना छोड़कर पहले दूध देकर आ गई, वो अपने खाने की थाली से दोबारा खाने लगी थी कि आरती जी बुदबुदाने लगी, … Read more

गुरुर – सिम्मी नाथ : Moral Stories in Hindi

स्नेहा   जैसे ही सोकर उठी मम्मी  खुश होकर बोलीं , उठ गई बेटा चलो , पापा तुम्हारा इंतजार कर रहे हैं , पता है  4:00 सुबह से उठकर आम के बागान  में आम चुन रहे हैं रात की  आई आंधियों में आम काफी बिखरे पड़े हैं । सुनकर स्नेहा  बोली हूऊं ।  जाती हूं … Read more

दायरे – श्वेता सोनी : Moral Stories in Hindi

“परी, चल जल्दी से शादी का जोड़ा पहन ले, जयमाले की रस्म होने ही वाली है”..  सुगंधा आज जितनी उत्साहित है उतनी ही विवश भी. बस आज की रात कल बेटी विदा होकर चली जाएगी अपने घर,कैसा लगेगा तब यह घर जिस घर के कोने कोने में परी और सुगंधा की साथ-साथ साझा की गई … Read more

कि रानी बेटी राज करेगी!! – पूर्णिमा सोनी : Moral Stories in Hindi

मैं लैब में हूं, मम्मी…(  मतलब, अभी बात नहीं कर पाऊंगी..) आद्या ने जवाब दिया पूनम ने इत्मीनान के भाव के साथ फोन रख दिया…. ज्यादा बात ही नहीं हो पाई आज ही क्या… लगभग अक्सर ही मां बेटी के बीच ( बस) इतनी ही बात हो पाती है। और ये बस इतनी सी बात … Read more

माँ जी आपका खर्च अब हम नहीं चला सकते – मीनाक्षी सिंह : Moral Stories in Hindi

आज 1 तारीख थी …..बहु देविका ने सास सविताजी को सब्जी का थैला पकड़ा दिया…. और उनकी लाई गई पेंशन में से ₹200 निकालकर उन्हें सब्जी लाने के लिए भेज दिया….. बेचारी 70 वर्षीय सरिताजी हर महीने की 1 तारीख को इसी तरह कभी सब्जी लेने ,,,कभी परचून का सामान,,,लेने तो कभी कोई और काम … Read more

सॉफ्ट टारगेट – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

विद्यासागर जी पुराने जमीदार थे।कभी उनकी तूती बोलती थी।शान शौकत तो थी ही,साथ ही विद्यासागर जी का रूवाब बेइंतिहा था।जिधर से निकल जाते थे,उधर ही उनकी रियाया सर झुका कर खड़ी हो जाती।इतना होने पर भी विद्यासागर जी रहम दिल थे,अपनी रियाया के प्रति हमदर्दी रखते थे। जमीदारी उन्मूलन के बाद सब रुतबा खत्म,बस मजदूरी … Read more

मेरे सैय्या सुपरस्टार. – डॉ अनुपमा श्रीवास्तवा: Moral Stories in Hindi

अपने भैया के साथ लंबी बातचित् में मशगूल बुआ जी  को देख कर पूरे घर में बच्चों के साथ-साथ सभी  बुआ जी को तिरछी नजरो से देख रहे थे। इतना खुश तो वह होली- दिवाली में भी नहीं होती थीं। फोन पर उनके चेहरे और भाव भंगिमा से एक अलग ही खुशी टपक रहीं थी। … Read more

हाउस हसबैंड – डॉ पारुल अग्रवाल: Moral Stories in Hindi

राशि बहुत ही हंसमुख और प्यारी सी लड़की थी। उसका अभी कुछ ही समय पहले अमन के साथ प्रेम विवाह हुआ था। जिसमें दोनों के परिवार की सहमति थी। राशि ने अपनी शिक्षा मनोविज्ञान विषय में पूर्ण की थी और अब वो प्रमाणित काउंसलर थी और अपना खुद का क्लिनिक भी चलाती थी। शादी के … Read more

रिश्तों की डोर – शिव कुमारी शुक्ला: Moral Stories in Hindi

बच्चों  के स्कूल चले जाने के पश्चात मेधा अकेली रह गई घर में। वह उदास  बैठी सोच रही थी  आज उसकी उन्नीसवीं  मेरिज एनिवर्सरी है। शायद  मेहुल को तो यह दिन याद ही नहीं होगा कि  आज के  दिन ही वह अपना घर परिवार छोड पूर्ण विश्वास के साथ मेहुल का हाथ थाम आपना नया … Read more

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