“एक ही घर में दो नियम क्यों?” – संगीता अग्रवाल

दोपहर के तीन बजे थे। अनन्या अभी-अभी अपना लैपटॉप बंद करके उठी ही थी कि डोरबेल बजी। उसने घड़ी देखी और एक गहरी साँस ली। वह जानती थी कि इस समय कौन हो सकता है। यह समय उसकी सासू माँ, निर्मला जी की बचपन की सहेली और कॉलोनी की ‘खबर-नवीश’ सरला चाची के आने का … Read more

मायका पराया ससुराल अपना – करुणा मलिक

कार की खिड़की से पीछे छूटते पेड़ों को देखते हुए अवनि की आँखों से बहने वाले आँसू रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। ड्राइवर सीट पर बैठे उसके पति, निशित ने एक बार भी उसे चुप कराने की कोशिश नहीं की। वह जानता था कि यह वो सैलाब है जिसे बह जाने देना ही … Read more

सबसे बड़ा धन परिवार – बबीता झा

शंकर के घर में आज बहुत ही खुशी का माहौल था। आज उसकी छोटी बहन करुणा की शादी है। पूरा घर रिश्तेदारों से भरा हुआ है। सब यही बोल रहे थे कि शंकर ने करुणा के लिए बहुत ही अमीर घर का लड़का ढूंढा है। शंकर मन ही मन बहुत खुश हो रहा था। शंकर … Read more

बेवकूफ बहन – शुभ्रा बैनर्जी 

मां के असमय गुजर जाने के बाद,सबसे छोटी पायल वास्तव में अनाथ हो गई।बड़ा सा घर था पुश्तैनी।बचपन में बिजली और पानी की समुचित सुविधा नहीं थी।घर की छोटी होने के कारण, हैंडपंप से पानी उसे ही लाना पड़ता था।मिक्सी नहीं था तो, सिलबट्टे पर मसाला पीसना भी उसी के जिम्मे आता था।खाने की शौकीन … Read more

अपने तो अपने होते है – विमला गुगलानी

   कैनेडा में रात के दो बजे का समय, हरवंश को भारत से उसके खास मित्र जीवन का फोन आया। दिन भर के थके मांदे हरवंश का बिल्कुल मन नहीं था फोन पिक करने का लेकिन उसे लगा कि कोई खास ही बात होगी नहीं तो जीवन को भलीभातिं मालूम है ये समय हरवंश को फोन … Read more

आप तो घर की नौकरानी हो चाची – स्वाती जैन

सौम्या , यह क्या तुम तो आराम से यहां बैठकर खाना खा रही हो , रात में मेरे बेटे अंशु ने गाजर का हलवा बनाने कहा था , तुमने अभी तक हलवा नहीं बनाया ! जेठानी रीटा अपनी देवरानी सौम्या से बोली ! सौम्या घबराहट से बोली – बस दीदी , अभी बना देती हुं … Read more

सबसे बड़ा धन परिवार। – मधु वशिष्ठ

————– “प्रिया और विकास”, अभी छह महीने पहले ही तो दोनों की शादी हुई है।  प्रिया की मां की मृत्यु बचपन में ही हो गई थी पिता के दूसरी शादी करने के कारण दसवीं  के बाद की सारी पढ़ाई उसने हॉस्टल में रहकर ही करी थी। अत्यंत आत्मविश्वासी और स्वावलंबी   प्रिया ने नौकरी भी  … Read more

दोस्त या दुश्मन – एम. पी. सिंह 

लबान गाँव के संपन्न किसान गोबरी लाल के दो बेटे थे, मोडू लाल और लटूर लाल. कहने को तो वो दोनों सके भाई थे, पर उनका रिस्ता दोस्तों जैसा था, क्योंकि उम्र में ज्यादा अंतर नहीं था. स्कूल में अगर किसी एक को कोई कुछ बोल देता, तो दूसरा उससे लड़ने लगता. दोनों एक दूसरे … Read more

अहंकार – रश्मि प्रकाश 

“यह क्या कर दिया तुमने बिमला? तुम्हें अकल नहीं है? यह मेरी ‘इंपोर्टेड’ क्रॉकरी थी। जानती हो इसकी कीमत क्या है? तुम्हारी साल भर की तनख्वाह भी कम पड़ जाएगी इसे खरीदने में!” काव्या की चीख से पूरा घर गूँज उठा। हॉल में सन्नाटा पसर गया। कांच के बारीक टुकड़े फर्श पर बिखरे हुए थे … Read more

आत्मसम्मान का सुकून – गरिमा चौधरी 

“सुनो विकास, रिटायरमेंट के बाद अब प्रोविडेंट फंड का जो पैसा आया है, उसे मैंने फिक्स्ड डिपॉजिट में डाल दिया है। ब्याज से और मेरी पेंशन से घर का राशन और बिजली का बिल तो निकल जाएगा, लेकिन अब ऊपर के खर्चे, जैसे—गाड़ी की सर्विसिंग, इंटरनेट का बिल, और कभी-कभार की दवा-दारू… मैं चाहता हूँ … Read more

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