सबसे बड़ा धन : परिवार – संजय सिंह

रामस्वरूप रोजाना की तरह मेहनत- मजदूरी करके ,शाम को घर लौटे ।घर पर पत्नी अपने रोजमर्रा कामों में व्यस्त थी ।रामस्वरूप के आने का उसे इल्म हो गया ।दौड़ती दौड़ती रसोई घर से पानी का गिलास भरकर, रामस्वरूप के सामने पेश कर दिया ।रामस्वरूप ने थके हाथों से पानी का गिलास पकड़ कर  पी लिया … Read more

सबसे बड़ा धन परिवार – तोषिका

कुछ दिनों में धनतेरस था प्रिया भागी भागी अपनी मां के पास जाके पूछती है “मां इस बार धनतेरस के लिए हम क्या धन लेने चले सुनार के पास?” तभी उसकी मां प्यार से समझती हुई बोली “प्रिया बेटा! धनतेरस का मतलब यह नहीं होता कि घर में धन ही आना चाहिए, कुछ लोग नए … Read more

हां हो गई हूं मैं स्वार्थी – मंजू ओमर 

तुम इतनी स्वार्थी कैसे हो गई  निशा।इस उम में जबकि मालती जी की ये हालत है , तुम उनको अकेला छोड़कर चली आई । तुम्हारा मन नहीं कांपा ये सोचकर कि उन पर क्या बीतेगी। निशा की बूढ़ी मौसी ने निशा से कहा। हां मौसी मैं हो गई हूं स्वार्थी,अब मेरा वहां क्या रह गया … Read more

भजन संध्या बनाम किटी पार्टी – शुभ्रा बैनर्जी 

महिमा की अनुशासन प्रियता व चुगली ना करने की आदत का परिणाम ही था कि,अधिकतर महिलाओं के सामूहिक आयोजनों में उसे बुलाया नहीं जाता था। ऊपर से स्पष्ट वादी शिक्षिका की साफ- सुथरी छवि का कवच भी था महिमा के साथ। अक्सर मोहल्ले की तथाकथित सहेलियां पिकनिक पर जाती रहती थीं,और महिमा को बाद में … Read more

*भाई जैसा मित्र नहीं ना भाई जैसा शत्रु…* – तोषिका

हेलो! प्रणाम मां दिया को लड़का हुआ है। मीरा को भी यह खुशी सुना देना वो भी इंतजार कर रही होगी।तभी मीरा पूछती है फोन पे कौन है दादी? दादी बोली, मीरा बेटा बधाई हो तुम अब एक बड़ी बहन बन गई हू। अब तुम्हारा एक छोटा भाई है जिसके साथ तुम खूब खेल सकती … Read more

भाई जैसा मित्र नहीं भाई जैसा दुश्मन नहीं – बबीता झा

रात 8:00 बज रहे थे। विनोद बरामदे पर टहल रहा था और बार-बार घड़ी की ओर देख रहा था। घड़ी में 8:00 बज गए। संजू अभी तक घर नहीं आया है। उसको तो 5:00 बजे तक घर आ जाना चाहिए था ना। मां, उसका फोन भी स्विच ऑफ आ रहा है। सब दोस्तों से भी … Read more

गलती – खुशी

प्रिया प्रिया कहा मर गई तुमने जो आज गलती की है ना उस गुनाह की कोई माफी नहीं है।मां जी क्या हुआ आप ऐसा क्यों कह रही है मैने ऐसा क्या कर दिया।तुमने तुमने मेरा विश्वास तोड़ा है सबके खिलाफ जा कर मैने तुम्हारा साथ दिया मेरे बेटे के खिलाफ खड़ी हो गई और तुम … Read more

अनाधिकार निर्णय – शुभ्रा बैनर्जी

“संजना ओ संजना,आज इतनी देर तक सोई हो,तबीयत खराब है क्या?बच्चों को स्कूल नहीं भेजना क्या?”  सोम की आवाज सुनकर ,संजना हड़बड़ाकर उठी।जैसे ही घड़ी की तरफ देखा, दंग रह गई।आज इतनी देर कैसे सोई ?तभी भोर का सपना आंखों के आगे नाच गया।छोटी बुआ किसी  तकलीफ में है क्या? कब से सोच रही हूं, … Read more

इस गुनाह की माफी नही – प्रतिभा परांजपे

पुष्पा ऑफिस जाने के लिए निकल ही रही थी तो,उसने बाबूजी को मां से कहते हुए सुना “कुंडली मिलान हो गया है। एक-दो दिन में  वे लोग पुष्पा को देखने आ सकते हैं । पुष्पा ने सुन तो लिया पर मन ही  मन झुंझला गई ,फिर वही देखने दिखाने का नाटक।  रात में भोजन के … Read more

हा, हो गई हू मैं स्वार्थी… – तोषिका

“अरे दीपा जल्दी से मेरा टिफिन लेकर आओ, मुझे दफ्तर के लिए लेट हो रहा है।” रसोई घर में खड़ी दीपा को बाहर से दीपक की चिल्लाते हुए आवाज़ आई। तुरंत ही दीपा बाहर आई और टिफिन का डब्बा दीपक के हाथ में थमा दिया। तभी दीपक वहां से गुस्से में और अपने आप से … Read more

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