दुराव – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi
पीछे से भैय्या भैय्या की जानी पहचानी आवाज सुन शंकर ठिठक कर रुक गया, अरे ये आवाज तो पलक की है।शंकर का अनुमान सही था,पलक ही शंकर को पुकार रही थी। शंकर भैय्या, मैं कब से आपको ढूंढ रही हूं,रुआँसी पलक बोली।क्या बात है,पलक,सब ठीक तो है,परेशान सी लग रही हो? शंकर और मनु दोनो … Read more