अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा – अर्चना खंडेलवाल 

“समीर, मेरी बात ध्यान से सुनो। अब मुझसे नहीं होती तुम्हारे बाबूजी की सेवा। बस, बहुत हो गया।” आवाज़ में न तो गुस्सा था, न ही कोई ऊँचा स्वर। एक अजीब सी ठंडी, सपाट और निर्णय लेने वाली दृढ़ता थी। समीर पलटा। सामने उसकी पत्नी, वंदना खड़ी थी। उसके चेहरे पर थकान की लकीरें थीं, … Read more

विधि का विधान कोई टाल नहीं सकता – सीमा सिंघी

आज राधिका भरे पूरे परिवार के बावजूद अपने स्वभाव और व्यवहार की वजह से बिल्कुल अकेली पड़ गई थी। सामने मधुकर जी बीमार अवस्था में अकेले बिस्तर पर लेटे-लेटे अपनी पत्नी राधिका जी से कहे जा रहे थे। राधिका आज तुम्हारी वजह से मेरे इतने भाई बहनों के होते हुए,मेरे इतने बड़े परिवार के होते … Read more

तोहफ़ा – पुष्पा जोशी 

जब बेटे ने अपनी पहली तनख्वाह से अपनी मां को दिया सबसे बेहतरीन तोहफा.. मोबाइल की स्क्रीन पर मेसेज की बीप ने समीर का ध्यान अपनी ओर खींचा। “आपके खाते में 45,000 रुपये जमा कर दिए गए हैं – वेतन माह अगस्त।” समीर के चेहरे पर एक ऐसी मुस्कान तैर गई जिसे शब्दों में बयां … Read more

खोखली दीवारें – रश्मि प्रकाश 

कहीं बहु ने ससुराल की बातें अपने मायके में जग-जाहिर कर दी तो?? रसोई के दरवाजे की ओट में खड़ी सुलोचना देवी की सांसें जैसे गले में ही अटक गई थीं। उनकी बहू, आकृति, फोन पर अपनी माँ से बात कर रही थी। आवाज़ धीमी थी, लेकिन सुलोचना देवी के कान चौकन्ने थे। “हाँ माँ… … Read more

बेटा हो तो ऐसा – लतिका श्रीवास्तव 

जब दोनों बड़े बेटों के बाद सबसे छोटे बेटे ने भी माता पिता से अलग होने का फैसला ले लिया.. शाम की आरती का वक़्त हो चला था, लेकिन ‘रघुनाथ विला’ के बड़े से हॉल में अगरबत्ती की खुशबू के बजाय एक भारी मनहूसियत तैर रही थी। दीवार घड़ी की टिक-टिक हथौड़े जैसी लग रही … Read more

 नालायक औलाद – करुणा मलिक 

जब अपनी औलाद ही नालायक निकल जाए तो पराए घर से आई बहु का क्या कसूर..  दिवाकर बाबू अपनी पुरानी आरामकुर्सी पर बैठे थे, लेकिन आराम उनके नसीब में कहाँ था? उनकी नज़रें बार-बार दीवार पर लटकी उस घड़ी पर जा रही थीं, जिसकी टिकटिक घर के सन्नाटे को और गहरा बना रही थी। रसोई … Read more

समय दो… – रश्मि झा मिश्रा

“मां जी… आप लोग इतने दिन तो यहीं रहते थे… अब क्यों जा रहे हैं… मुझे आए तो अभी ठीक से चार महीने भी नहीं हुए… क्या मुझसे कोई परेशानी है…!” ” अरे… नहीं नहीं बेटा… तुम तो बहुत प्यारी हो… इतने दिनों तक तो सारे घर की जिम्मेदारी हमने ही संभाल रखी थी… राकेश … Read more

फेरी वाला – के आर अमित

वह बच्चों के कुरकुरे पॉपकॉर्न और बुढ़िया के लाल पिले बाल बेचता था। वह हर रोज आता और हंस हंस कर कहता कि जो कंघी में फंसे बाल फेंक देती हो उन्हें इकट्ठा कर लो मैं पांच हजार रुपये किलो के हिसाब से खरीद लूंगा। उसने अपना नंबर दिया और कहा कि जब थोड़े जमा … Read more

रिश्तों की डोर – संगीता त्रिपाठी

 “दीदी शादी से थोड़ा पहले आ आ जाइएगा,सब आपको ही बताना है “    “तू परेशान मत हो मै शादी से दो – तीन दिन पहले आ जाऊंगी “ननद शिखा की बात सुन माधवी सोच में पड़ गई ,दो – तीन दिन पहले आने से क्या शादी की सारी तैयारी हो जाएगी  ।    बेटी पीहू की … Read more

हमारा परिवार – एम पी सिंह

राहुल का परिवार गाँव में रहता था। परिवार में राहुल के माता पिता, ताऊ जी ताई जी, उनका बेटा रोहन और दादा जी थे। राहुल पढ़ाई में बहुत तेज था और रोहन औसत था। दोनो भाई  दोस्तों की तरह रहते थे। दादा जी के गुजर जाने के कुछ साल बाद राहुल के पिता जी भी … Read more

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