बाबुल का दिल – गीता वाधवानी : Moral Stories in Hindi
“रंजना ,ओ रंजना! सुनो जरा जल्दी इधर आओ भई।”नरोत्तम जी खुशी से चहकते हुए बोले। रंजना -“हां हां बोलिए क्या हुआ? बड़े खुश दिख रहे हैं।” नरोत्तम-“मुंह मीठा करवाओ। गुप्ता जी ने हमारी अनुराधा के लिए बहुत अच्छा रिश्ता बताया है।” रंजना -“गुप्ता जी? वही जो रिश्ते करवाते हैं?” नरोत्तम-“हां हां वही” रंजना -“रिश्ता बताया … Read more