*”दामिनी का दम”* (भाग-6) – श्याम कुंवर भारती : Moral stories in hindi

घटना स्थल पर पहुंचकर दामिनी ने देखा करीब डेढ़ सौ की संख्या में पत्थरबाज गणेश पंडाल से कुछ दूर खड़े थे। सामने घायल अवस्था में कुछ मोहल्ले वाले और पूजा समिति के लोग लाठी डंडा लेकर उनको ललकार रहे थे। दामिनी ने अपने साथ आए लड़के से पूछा’ _ पत्थरबाज कौन हैं।क्या ये लोग इसी … Read more

*”दामिनी का दम”* (भाग-5) – श्याम कुंवर भारती : Moral stories in hindi

वो थाना उस क्षेत्र का काफी व्यस्त और मुख्य पुलिस थाना था । वह शहर का का प्रमुख थाना था। जिस समय दामिनी उस थाना में प्रवेश की वहा गेट पर कोई पुलिस का जवान पहरेदारी में नही था। अंदर कुर्सियों और टेबल पर इधर उधर पुलिस के जवान गहरी नींद में सो रहे थे।उनकी … Read more

*”दामिनी का दम”* (भाग-4) – श्याम कुंवर भारती : Moral stories in hindi

थोड़ी देर में बैरा कई प्लेटो में भेज आइटम ले आया ।जिसमे रोटी चावल फ्राई,पनीर मसाला,मसरूम मसाला  और सलाद आदि दो लोगो के लिए प्राप्त थे। बैरे ने खाना परोसते हुए कहा _ मैडम ये गर्म गर्म रोटियां है और जरूरत होगी तो मैं ला दूंगा । दामिनी ने कहा _ ठीक है मैं बता … Read more

*”दामिनी का दम”* (भाग-3) – श्याम कुंवर भारती : Moral stories in hindi

ट्रेक जैसे ही लड़खड़ा कर पेड़ से टकराया दामिनी ने कार की ब्रेक पर अपना पैर जमा दिया । कार सड़क पर  काफी दूर घसीटती चली गई। कार रुकते ही उसने कार का गेट खोला और हाथ में रिवालबर लिए नीचे कूद पड़ी और लपकते हुए ट्रक की ओर भागी । दो बदमाश ट्रक से … Read more

*”दामिनी का दम”* (भाग-2) – श्याम कुंवर भारती : Moral stories in hindi

थोड़ी देर में वो लड़का चाय पीकर लौट आया और ड्राइविंग सीट पर बैठकर टेक्सी  स्टार्ट कर आगे बढ़ा दिया। दामिनी को इतनी तेज बारिश में चाय पीकर बहुत राहत महसूस हो रही थी ।मौसम में हल्की ठंड का एहसास हो रहा था।दिन में काफी तेज धूप  और उमस थी लेकिन रात में तेज बारिश … Read more

*”दामिनी का दम”* (भाग-1) – श्याम कुंवर भारती : Moral stories in hindi

राजधानी एक्सप्रेस धड़ाधड़ करती हुई अपनी तूफानी गति से भागी जा रही थी ।दामिनी अपने बर्थ पर बैठी अपनी कलाई घड़ी की ओर देखी ।उसने अपने मन में कहा कुछ ही देर में मेरा स्टेशन आने वाला है ।मुझे अब अपने समान को समेटना चाहिए ।उसके पास दो बड़े बैग थे ।एक छोटा बैग था … Read more

अपनों का सहारा – पुष्पा पाण्डेय : Moral Stories in Hindi

प्रन्द्रह साल बाद जेल में बीताने के बाद कांता जब घर लौटी तो सभी अपरिचित ही लगे। भाई जेल से लेकर आया तो भाभी को पसंद नहीं आया। ” अरे! इन्हें इनके ससुराल में छोड़ना था न। इतना बड़ा घर है, प्रोपर्टी है, इन्हें अब वहाँ  हक से अपने बेटे के साथ रहना था।” “हाँ … Read more

पांच गज की साड़ी – संध्या त्रिपाठी : Moral Stories in Hindi

अब सीखूंगी मम्मी जी साड़ी पहनना…. मुझे भी साड़ी पहनना पसंद है ….! पता नहीं  “अब ” वो “कब” आएगा …..और चीज़े सीखने में तो बिल्कुल समय नहीं लगता…. बल्कि हमें पता भी नहीं चलता और बच्चे माहिर हो जाते हैं ….l           हम तो जैसे माँ के पेट से ही सीख कर आए थे साड़ी … Read more

*दूल्हा पसंद** – श्याम कुंवर भारती : Moral Stories in Hindi

रंजीता को देखने के लिए लड़के वाले आए हुए थे। आकाश और उसके छोटे भाई विजय को लेकर उसके माता पिता  लड़की देखने आए थे। आकाश बड़ा लड़का था उसकी नौकरी एक सरकारी कंपनी में हो गई थी ।छोटा लड़का विजय अभी एमबीए फाइनल इयर में था । वह देखने में बड़ा स्मार्ट लड़का था … Read more

गंतव्य की ओर बढ़ते कदम – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

शालिनी  बैठी  सोच रही थी कि कबतक मैं इसी तरह मार खाती रहूंगी। कब तक सहन करूं ।आज पीटने की इन्तहा हो गई करीब एक घंटे तक लात-घूंसे बरसाता रहा। फिर भी मन नहीं भरा तो बेल्ट उठा ली। अब शरीर मार खा खा कर थक चुका है। और शक्ती नहीं रही यदि इसी तरह … Read more

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