“रिश्तों में बढ़ती दूरियाँ” – समिता बडियाल : Moral Stories in Hindi

`सलोनी और सोमेश, अजीत और गीता के दो बच्चे थे। दोनों होनहार और पढाई में अब्बल। संस्कार तो कूट -कूट कर भरे थे। कभी पलटकर जबाब नहीं देते सलोनी नाम के जैसे साँवले रंग की , तीखे नैन -नक्श , कमर तक लम्बे बाल, आँखों में हल्का सा काजल। बहुत सुंदर लगती। माँ गीता तो … Read more

प्रायश्चित – रेणु गुप्ता : Moral Stories in Hindi

हनी ने एयरपोर्ट पर भारी मन से अपनी मौम और डैड से हाथ हिला कर विदा ली। उनके एयरपोर्ट के भीतर जाते ही उसके मन का सारा संताप अश्रुधारा के रूप में उसकी आँखों की राह बह निकला। बड़ी ही मुश्किल से अपने आप को संयत कर वह एयरपोर्ट से बाहर आई। वहाँ से घर … Read more

*अनुभूति* – मधुलता पारे : Moral Stories in Hindi

मंदिर की घंटियों की आवाज से अन्विता की नींद खुली देख कमरे में झकाझक उजाला फैला था । उसकी कल की थकान अभी तक नहीं उतरी थी। पर बहुत काम पड़ा था पर उठना जरूरी था। असल में रवि का ट्रान्सफर प्रदेश की राजधानी में प्रमोशन पर हुआ था। कल ही वे लोग इस घर … Read more

खुशियों के दिये – सुधा शर्मा : Moral Stories in Hindi

 कितना खूबसूरत है चारों तरफ रोशनी का नजारा ।कमला ने  शिवनाथ जी को शाल उढाते हुए कहा ,” अन्दर चलो , ठंड होने लगी है ।” “थोडी देर बैठो यहीं , कितनी सुन्दर रोशनी करी है सब ने   ।परसों  दीवाली है , कल मै भी थोड़ी सी लाइट लगा लूँगा ।”       ” मन नहीं … Read more

बेटी बना कर रखूंगी – शिव कुमारी शुक्ला : Moral Stories in Hindi

कहते हैं  ताली एक हाथ से नहीं बजती, दोनों हाथों का उपयोग करना जरूरी होता है ठीक वैसे ही सिर्फ बहू से ही बेटी बनने की उम्मीद करना एक असफल प्रयास है क्योंकि जब तक पूरा परिवार उसे बेटी नहीं  मान लेगाऔर बेटी के समान ही उससे व्यवहार नहीं करेगा तब तक बहु-बहु ही रहेगी … Read more

सॉरी- भैय्या – बालेश्वर गुप्ता : Moral Stories in Hindi

          पहली बार मेरे बचपन के घनिष्ठ मित्र प्रियांशु के भाई का फोन आया।स्वाभाविक रूप से आश्चर्य हुआ।मैंने पूछा आकाश सब ठीक है ना।मैं पहली बार तुम्हारा फोन सुन रहा हूँ।       आकाश बोला  नही भाईसाहब कुछ ठीक नही है।मुझे लगा कि भाइयो का जमीन जायदाद के बंटवारे का  झंझट होगा।फिर भी मैंने कहा कि क्या हुआ … Read more

कच्चे धागे से बुने रिश्ते – संजय मृदुल : Moral Stories in Hindi

सुनो अखिल! अब तुम्हें मेरा हालचाल पूछने के लिए आने की जरूरत नहीं है, तुम्हारे पापा है मुझे सम्हालने के लिए। जब हमें तुम्हारी जरूरत थी, तब तुम्हे नहीं लगा कि यहां होना चाहिए तुम्हें, तो अब रोज यूँ आकर दिखावा मत करो। अखिल ने कुछ कहना चाहा, पर माँ ने चादर ओढ़ कर करवट … Read more

जैसा तुम ठीक समझो – पूनम भटनागर : Moral Stories in Hindi

जावित्री और सुकेश पति-पत्नी बन कर फूले नहीं समा रहे थे। 7सालो की जान-पहचान के बाद अब कहीं जाकर शादी हो पाई थी। वहीं सुकेश का किसी और जाति होना तथा जावित्री का उनके स्टेटस का न होना शादी में बांधा बन रहा था। जावित्री के नाना सुकेश की दूसरी जाति की वजह से परेशान … Read more

“सुझाव” – मनीषा सिंह : Moral Stories in Hindi

बनारस की राइशो में एक नाम ठाकुर बलवंत सिंह का था। वह अपनी शानो-शौकत तथा रुतबो के लिए जाने जाते।   बलवंत की मां कमला बहुत ही बुद्धिमान तथा गंभीर महिला थी ।  बलवंत सिंह अपनी मां की बहुत इज्जत किया करते । इनके दो पुत्र बड़ा बेटा गोपाल और छोटा गोविंद । पत्नी दुर्गा बोले … Read more

“नज़ाकत रिश्तों की” – कुमुद मोहन : Moral Stories in Hindi

“कान खोल कर सुन लो तुम दोनों! नीमा और दामाद जी राखी पर आ रहे हैं कोई कमी ना होनी चाहिए!और बहू जी तुम? तुम तो अपनी कंजूसी अपने घरवालों के लिए ही बचा के रखना !मेरी बेटी की आवभगत खूब अच्छी तरह होनी चाहिए बस!” मयंक तुम आज ही जाके बैंक से पैसे निकाल … Read more

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