“मायके की सूनी देहरी और बूढ़ी आँखों की आस” – मुकेश पटेल
“जब माता-पिता दुनिया से चले जाते हैं, तो एक बहन के लिए उसका भाई ही उसका मायका बन जाता है। वह दौलत या उपहारों की भूखी नहीं होती, वह तो बस अपने भाई की एक झलक पाकर ही अपने मायके को जीवित महसूस करती है… पर क्या आज का भाई इस मूक पुकार को सुन … Read more