खुद का संडे – श्वेता अग्रवाल : Moral Stories in Hindi

नीलांश कई दिनों से देख रहा था कि निली काफी उदास और गुमसुम सी होती जा रही है।बस मशीन की तरह अपना काम निपटाती रहती है।ना हँसना न खिलखिलाना। माँ-पापा की चाय, बिट्टू-पिंकी की पढ़ाई, लंच-डिनर, उसका टिफिन, घर की साफ-सफाई सब काम बिल्कुल परफेक्ट, समय पर लेकिन खुद बिल्कुल बुझी-बुझी सी। जब भी नीलांश … Read more

सिंदूर – पूजा मिश्रा : Moral Stories in Hindi

आज फिर गंवार की तरह मांग भर सिंदूर लगा कर चल दी ,कितनी बार कहा है मुझे तुम्हारा इस तरह तैयार होना अच्छा नहीं लगता ।  अरे प्रवेश सुहागिन को सिंदूर लगाना चाहिए इसीलिए लगाती हूं  अच्छा अगर नही लगाओगी तो सुहागन नही हो ,तुम मेरी पत्नी हो ये सब जानते है पर इस तरह … Read more

जिम्मेदारियां और जीवन एक दूसरे के पूरक हैं – सरोजनी सक्सेना : Moral Stories in Hindi

जिम्मेदारियां और जीवन एक दूसरे के पूरक हैं ! दादी मां कहा करती थी लाडो पढ़ाई के साथ साथ मम्मी के साथ थोड़ा काम भी करवा लिया करो, तेरी मां पर घर की जिम्मेदारियां बहुत हैं ! सारा दिन काम कर के थक जाती हैं ! मैं ज्यादा उनकी बातो पर ध्यान नहीं देती थी … Read more

सिंदूर हो रहा दूर – रोनिता : Moral Stories in Hindi

क्या बात है? कुछ दिनों से देख रहा हूं बड़ी बदली बदली सी दिख रही हो? अमर ने अपनी पत्नी मनीषा से कहा  मनीषा:  अच्छा आपको अपने काम के अलावा कुछ और भी दिख गया? पर यह अजूबा कैसे हो गया? अमर:  क्या मतलब? काम पर ध्यान नहीं दूंगा तो यह घर कैसे चलेगा? तुम … Read more

सन्नाटा – पूनम शर्मा : Moral Stories in Hindi

आसमान सूर्य की लालिमा से नीलाभ रंग में परिवर्तित होकर कालिमा के आगोश में समा रहा था । इन परिवर्तनों से अनजान सुषमा कागज कलम में व्यस्त थी। तभी हिरावती ने आवाज़ देते हुए कहा-” मैडम जी! अंधेरा हो गया, घर चलिए, बहुत देर गया है। ” सुषमा बिना नजर उठाए बोली-” तूं चली जा, … Read more

फिर,वसंत लौट आया – महेश केशरी : Moral Stories in Hindi

‘बेटी मेघा, सिन्हा साहब के लिए चाय ले आओ’ रंजीत बाबू ने बैठक से ही आवाज लगाई। मेघा किचन से ही आवाज देती हुई बोली, ‘हाँ, पापा बस दो मिनट, और रुकिए, अभी लाती हूँ ।’ ट्रे में चाय उठाये, मेघा, कुछ ही देर में आकर बैठक में दाखिल हुई। मेघा, साँवली सी, पतली, लंबी … Read more

ये कैसा रिश्ता – उषा भारद्वाज : Moral Stories in Hindi

    हर वक्त उसकी आवाज कानों में गूंजती रहती थी घर पहुंचते ही वह ऐसे चिल्लाता था जैसे किसी के स्वागत का सारा जिम्मा उसका हो।           मुझे याद आने लगा वह दिन , जब मै  कॉलेज से आकर बैठी थी उसी समय  चिंकी ने आकर कहा -दीदी देखो आज हम लोग आपके लिए कुछ लाये हैं … Read more

आखिरी पड़ाव – डॉ शंकर लाल माहेश्वरी : Moral Stories in Hindi

उस दिन बंद कमरे में हो रही उनकी बातें अधखुली खिड़की से सुनीं, तो मैं दंग रह गया। अंदर से खाली होता जा रहा था, अज्ञात भय सालने लगा। बेटे अखिलेश की शादी हुए अभी दो ही साल तो बीते हैं। काफी सोच-विचार कर भरे घर की बेटी को बहू बनाकर लाया था। सोचा, थोड़ा … Read more

साँच को आँच नहीं – समिता बडियाल : Moral Stories in Hindi

नीलिमा जी जबसे बाज़ार से लौटी हैं , गुस्से में इधर – उधर बड़बड़ाते हुए घूम रहीं थी।  माधव जी (उनके पति ) ने  बेचैनी का कारण पूछा  नीलिमा जी फट पड़ी : हे भगवान् क्या बताऊँ आपको ? ऐसी चरित्रहीन बहु पल्ले पड़ी है की पूछो मत।  अरे हुआ क्या भाग्यवान ये तो बताओ … Read more

जिम्मेदारियाँ कभी खत्म न होंगी। – डाॅ कंचना सक्सेना : Moral Stories in Hindi

सुनीति अपने माँ बाप की इकलौती संतान थी। बड़े लाड़ -प्यार से पाला था। माता -पिता की आँखों का तारा। कभी कोई दुख की छाया उस पर न पडे़, माँ की हर समय यही कोशिश रहती। पिता बैंक में अफ़सर थे। अतः स्थानान्तरण होते रहते थे। उन्हें समय ही नहीं मिलता। माँ काॅलेज में लेक्चरर … Read more

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